उत्तर प्रदेश:' शाहजहांपुर में शहीदों की प्रतिमाओं का अपमान', कांग्रेस ने निकाला मशाल जुलूस

कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ने कहा, ‘‘मान्यता के अनुसार लोग खंडित मूर्तियों की पूजा नहीं करते हैं। ऐसे में खंडित मूर्तियों को गंगा में प्रवाहित किया जाना चाहिए और शहीद अशफाक उल्ला खान की खंडित प्रतिमा को जमीन में दफन किया जाना चाहिये।’’

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहीदों की प्रतिमाएं फिर से स्थापित किए जाने के बाद उनका दूध और गंगाजल से ‘‘अभिषेक’’ किया और मशाल जुलूस निकाला। कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

नगर निगम कार्यालय के बाहर सड़क किनारे स्वतंत्रता सेनानियों राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और ठाकुर रोशन सिंह की प्रतिमाएं स्थापित थीं, जिन पर जनप्रतिनिधि नियमित रूप से माल्यार्पण करते थे।

आरोप है कि रविवार रात इन्हें बुलडोजर से गिरा दिया गया और बाद में मलबे को कूड़ा वाहन में लादकर फेंक दिया।

कांग्रेस की जिला इकाई के अध्यक्ष रजनीश गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि शहीदों की प्रतिमाओं के अपमान से वह बेहद आहत हैं।

उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार रात सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने शहर में मशाल जुलूस निकाला और बाद में पुन: स्थापित प्रतिमाओं के पास पहुंचकर दूध व गंगाजल से उनका ‘‘अभिषेक’’ किया।

गुप्ता ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लोग शहीदों का अपमान कर सकते हैं, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए शहीद पूजनीय हैं।

इस बीच, महापौर ने कहा कि पुरानी प्रतिमाओं को ही ठीक कर पुनः स्थापित किया गया है जिसके बाद विवाद और गहरा गया है।

लोगों का कहना है कि पहले सामने आए वीडियो में प्रतिमाओं के सिर और धड़ टूटे दिख रहे थे, ऐसे में वही प्रतिमाएं कैसे फिर से लगा दी गईं।


कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ने कहा, ‘‘मान्यता के अनुसार लोग खंडित मूर्तियों की पूजा नहीं करते हैं। ऐसे में खंडित मूर्तियों को गंगा में प्रवाहित किया जाना चाहिए और शहीद अशफाक उल्ला खान की खंडित प्रतिमा को जमीन में दफन किया जाना चाहिये।’’

विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा विरोध-प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।

समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष तनवीर खान ने आरोप लगाया कि प्रतिमाएं इसलिए तोड़ी गईं क्योंकि उनके कार्यकाल में उनका सौंदर्यीकरण कराया गया था और शिलापट्ट पर उनका नाम दर्ज था, जिसे हटाने के लिए यह कृत्य किया गया।

मामले का संज्ञान लेते हुए योगी आदित्यनाथ ने कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद एक कनिष्ठ अभियंता और एक सहायक अभियंता को निलंबित कर दिया गया तथा कार्यकारी एजेंसी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

पीटीआई के इनपुट के साथ