वीडी सतीशन होंगे केरल के नए मुख्यमंत्री, हाईकमान ने लगाई मुहर
पेशे से वकील सतीशन ने 2001 में परावुर से विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के तेज़ और प्रभावशाली वक्ताओं में अपनी पहचान बनाई।

कांग्रेस की केरल इकाई के वरिष्ठ नेता वी डी सतीशन राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। कांग्रेस आलकमान ने पार्टी की प्रदेश इकाई के नेताओं के साथ लंबी मंत्रणा के बाद सतीशन के नाम पर मुहर लगाई।
केरल के लिए पार्टी के पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक तथा पार्टी प्रभारी दीपा दासमुंशी ने दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में सतीशन के नाम की घोषणा की।
उन्होंने कहा, "कांग्रेस विधायक दल की सात मई, 2026 को तिरुवनंतपुरम में बैठक हुई थी और सर्वसम्मति से कांग्रेस अध्यक्ष को केरल राज्य में विधायक दल के नए नेता के चयन के लिए अधिकृत करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसी के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष (सोनिया गांधी), लोकसभा में विपक्ष के नेता (राहुल गांधी), एआईसीसी पर्यवेक्षकों (माकन और वासनिक) के साथ व्यापक चर्चा की। सांसदों, पूर्व पीसीसी अध्यक्षों सहित राज्य के कई अन्य नेताओं से भी परामर्श किया गया।"
उन्होंने बताया कि इन सभी चर्चाओं के आधार पर, यह निर्णय लिया गया है कि वी डी सतीशन को कांग्रेस विधायक दल का नेता नियुक्त किया जाए।"
सतीशन के अलावा कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे।
बीते सात मई को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी आलाकमान को विधायक दल के नेता के चयन के लिए अधिकृत किया गया था।
सतीशन के लिए यह पद उनकी राजनीतिक यात्रा की बड़ी उपलब्धि है। कोच्चि जिले में जन्मे सतीशन इस महीने के आखिर में 62 साल के हो जाएंगे। उन्होंने अपनी पहचान गुटबाज़ी की राजनीति से नहीं बल्कि विधानसभा में अच्छे प्रदर्शन और संगठन में लगातार काम करके बनाई है।
पेशे से वकील सतीशन ने 2001 में परावुर से विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के तेज़ और प्रभावशाली वक्ताओं में अपनी पहचान बनाई।
आंकड़ों, तीखे व्यंग्य और दमदार बोलने के अंदाज़ के कारण सतीशन वामपंथी दलों के लिए बड़ी चुनौती बन गए। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें सबसे बड़ी सफलता ऐसे समय में मिली जब कांग्रेस अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही थी।
2021 के विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की बड़ी हार के बाद सतीशन को अचानक विपक्ष का नेता चुना गया। सतीशन ने इस जिम्मेदारी को अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने का बड़ा मौका बना लिया।
सोने की तस्करी का मामला हो, एआई कैमरे से जुड़े आरोप हों या कानून-व्यवस्था को लेकर विजयन सरकार पर लगातार हमले सतीशन ने खुद को केरल में वामपंथी सरकार के खिलाफ सबसे प्रमुख और आक्रामक नेता के रूप में स्थापित किया।
सतीशन गुरुवार सुबह अपने परिवार के साथ राज्य की राजधानी के लिए रवाना हुए और विपक्ष के नेता के रूप में पिछले पांच वर्षों से जिस सरकारी आवास में रह रहे थे, वहां पहुंचे।
एआईसीसी की घोषणा होने से कुछ मिनट पहले ही वह वहां पहुंच गए। इसके बाद वे बिना कुछ बोले, अपने सरकारी आवास पर जमा हुई बड़ी भीड़ के बीच से होते हुए आगे बढ़ गए।
अब जब वह विपक्ष की बेंचों से हटकर मुख्यमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो सतीशन के सामने केवल सरकार चलाने से कहीं बड़ी जिम्मेदारियां और उम्मीदें हैं।
उनका उदय कांग्रेस पार्टी के उस प्रयास को दिखाता है, जिसमें वह केरल की राजनीति की जिम्मेदारी एक युवा, अधिक सक्रिय और मीडिया को समझने वाली पीढ़ी को सौंपना चाहती है, जो मौजूदा मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की मजबूत राजनीतिक विरासत का मुकाबला करने के लिए तैयार है।
केरल में हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने राज्य की कुल 140 सीट में से 102 पर जीत दर्ज की।
पीटीआई और आईएएनएस के इनपुट के साथ
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