'पहलगाम हमले के बाद क्या बदल गया कि पाकिस्तान से बातचीत हो', मनीष तिवारी का बीजेपी-आरएसएस से सवाल
मनीष तिवारी ने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान ने कोई संकेत दिया है कि वे अपने प्रधानमंत्रियों और सैन्य नेताओं द्वारा की गई अपनी पिछली उन प्रतिबद्धताओं का सम्मान करेंगे कि पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं करेगा।

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की पाकिस्तान से संबंधित टिप्पणी को लेकर बुधवार को कहा कि पहलगाम हमले के बाद से अब तक ऐसा क्या बदलाव आया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत की जरूरत महसूस हो रही है।
उन्होंने यह सवाल भी किया कि क्या संघ को ऐसी किसी ‘‘बड़ी शक्ति" द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो आज सारे गलत कारणों से पाकिस्तान की कृतज्ञ बनी हुई है।
होसबाले ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को दिए साक्षात्कार में मंगलवार को कहा था कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध को तोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम लोगों के बीच आपसी संपर्क है और संवाद के लिए हमेशा रास्ता खुला रहना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा था पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने भारत का विश्वास खो दिया है और अब समय आ गया है कि नागरिक समाज नेतृत्व करे।
होसबाले की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए तिवारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘22 अप्रैल, 2025 से अब तक क्या बदलाव आया है कि बातचीत होनी चाहिए। 22 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान में मौजूद और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में निर्दोष नागरिकों का नरसंहार किया था।’’
उन्होंने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान ने कोई संकेत दिया है कि वे अपने प्रधानमंत्रियों और सैन्य नेताओं द्वारा की गई अपनी पिछली उन प्रतिबद्धताओं का सम्मान करेंगे कि पाकिस्तान आतंकवाद को राज्य की नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं करेगा।
तिवारी ने अमेरिका का संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘तो, आप किस उद्देश्य से जुड़ना चाहते हैं? क्या यह केवल इसलिए है क्योंकि आपको कुछ उन बड़ी शक्तियों द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो आज सभी गलत कारणों से पाकिस्तान की कृतज्ञ हैं। इसलिए आपको उनके साथ बातचीत शुरू करने की आवश्यकता पड़ गई।’’
दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क पर होसबाले द्वारा जोर दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘सवाल यह है कि क्या दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क राज्य की नीति के साधन के रूप में आतंकवादियों का उपयोग करने के पाकिस्तान के दृष्टिकोण में कोई बदलाव करेगा? इसका जवाब नहीं है।’’
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