दुनिया की 5 बड़ी खबरें: चीन-जापान में बढ़ा विवाद और कोरोना के इस वेरिएंट्स कारण खतरे में अमेरिका की अर्थव्यवस्था

जापान ने फुकुशिमा के परमाणु अपशिष्ट जल को समुद्र में डालने का फैसला किया। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रिकवरी के लिए नोवेल कोरोनावायरस के वेरिएंट्स को एक बड़े खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

कनाडा में रोजाना 8000 से ज्यादा आ रहे कोरोना के मामले

फोटो: IANS
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दुनियाभर में कोरोना की तेज रफ्तार जारी है। कनाडा में पिछले हफ्ते से, कोरोना के मामले लगभग 8100 आ रहे हैं, इसी के साथ रोजाना मामले में 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार कनाडा के मुख्य सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी थेरेसा टैम ने मंगलवार को बताया, "कोविड-19 महामारी कई कनाडाई लोगों के लिए तनाव और चिंता पैदा कर रहा है।"

टैम ने कहा, "पिछले सप्ताह से मरीजों की संख्या में वृद्धि जारी है। हर दिन अस्पतालों में कोविड-19 के करीब 3,000 से अधिक मरीजों का इलाज किया जा गया, जिसमें पिछले सप्ताह की तुलना में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।"

इसमें लगभग 970 लोगों को इंटेंसिव केयर यूनिट में इलाज किया गया था, जो कि एक सप्ताह पहले की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक था।

बलूचिस्तान में आतंकवाद फिर से पांव पसार रहा

फोटो: IANS
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पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में देश की खुफिया एजेंसी और सुरक्षाबलों ने लगातार जांच जारी रखी है, क्योंकि आतंकी तत्वों ने प्रांत के विभिन्न हिस्सों से आतंकी हमले जारी रखे हैं। ये लोग लक्षित हमले, अपहरण और विस्फोट जैसे वारदात को अंजाम दे रहे हैं, जिससे सुरक्षाबलों के प्रदर्शन पर गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है और इससे स्थानीय लोगों के बीच डर का माहौल है।

हाल ही की एक घटना में, एक फुटबॉल स्टेडियम की दीवार के बाहर, अज्ञात बदमाशों द्वारा लगाए गए बम विस्फोट में कम से कम 14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

विवरण के अनुसार, बलूचिस्तान के जिले लासबेला के हब शहर में एक स्टेडियम मेंफुटबॉल मैच के दौरान लगाए गए बम से विस्फोट हो गया।

जिबूती में नाव पलटने से मरने वालों का आंकड़ा 42 हुआ

फोटो: IANS
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जिबूती तट पर नाव पलटने के कारण 42 लोगों की जान चली गई। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) ने इसकी जानकारी दी। संयुक्त राष्ट्र की माइग्रेशन एजेंसी ने कहा, यमन में लगभग 60 प्रवासियों को तस्कर नाव से ले जा रहे थे, जिसमें कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, आईओएम ने कहा कि मृतक में 16 बच्चे थे। सोमवार को आईओएम ने बताया कि तस्करों द्वारा ले जा रहे 34 प्रवासियों की मौत हो गई।

एजेंसी ने कहा, खतरों के बावजूद जिबूती पहुंचने वाले प्रवासियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी जारी है। फरवरी में 1,900 की तुलना में मार्च में 2,343 से अधिक प्रवासी यमन से पहुंचे ।

कोविड वेरिएंट्स की वजह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा

फोटो: IANS
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अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रिकवरी के लिए नोवेल कोरोनावायरस के वेरिएंट्स को एक बड़े खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। मिनियापोलिस रिजर्व बैंक के अध्यक्ष नील काशकारी ने यह बात कही। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, काशकारी ने वायरस के एक वेरिएंट का जिक्र करते हुए न्यूयॉर्क के ईकोनॉमिक क्लब को बताया, "सबसे बड़ा खतरा तो मुझे इन वेरिएंट्स से रिकवरी की दिख रही है।" उन्होंने जिस वेरिएंट का जिक्र किया, उसकी अधिकता देश के कई भागों में देखने को मिल रही है और जिसकी चपेट में युवा आसानी से आ रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, अगर डेकेयर सेंटर्स और स्कूल वगैरह को वायरस के प्रसार पर काबू पाने के मद्देनजर बंद रखा जा रखा जा रहा है, तो इससे हम आने वाले समय में आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

परमाणु अपशिष्ट जल को समुद्र में डालने का सभी लोग विरोध करेंगे : चीन

जापान ने फुकुशिमा के परमाणु अपशिष्ट जल को समुद्र में डालने का फैसला किया। इस पर पूरी दुनिया का ध्यान केंद्रित है, क्योंकि यह दुनियाभर में विवाद और शंका से भरा निर्णय है। "हम जानते हैं कि जापान की फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना अब तक दुनिया में हुई सबसे गंभीर परमाणु दुर्घटना है। इससे पैदा विकिरण रिसाव की मात्रा बहुत ज्यादा है और समुद्री वातावरण, खाद्य सुरक्षा व लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ा है।" जापान का पड़ोसी देश होने के नाते चीन इस पर बहुत चिंतित है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लीच्येन ने कहा कि जापान ने अपशिष्ट जल का सुरक्षित निपटारा न करने की स्थिति में देश और विदेशों के विरोध की अनदेखी कर एकतरफा दौर पर परमाणु अपशिष्ट जल को समुद्र में डालने का फैसला किया। यह फैसला बेहद गैर-जिम्मेदाराना है, जो विश्व सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा और पड़ोसी देशों के लोगों के हितों को बड़ा नुकसान पहुंचेगा।

दक्षिण कोरिया ने भी स्पष्ट रूप से जापान के फैसले का दृढ़ विरोध किया और जापान से समुद्री वातावरण को दूषित न करने की मांग की। चीन और दक्षिण कोरिया के विरोध का पर्याप्त कारण है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों और अनुसंधान संगठनों ने सबूत दिया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कहा परमाणु अपशिष्ट जल से वातावरण और मानवाधिकार को बड़ा नुकसान पहुंचेगा, जापान का फैसला अस्वीकार्य है। जर्मनी समुद्री विज्ञान अनुसंधान संस्थान ने कहा कि फुकुशिमा के तट पर दुनिया का सबसे मजबूत महासागरीय प्रवाह है। अपशिष्ट जल की निकासी से 57 दिनों में विकिरण रिसाव का फैलाव प्रशांत महासागर के अधिकांश क्षेत्रों तक जा पहुंचेगा और 10 साल बाद दुनिया भर के समुद्री क्षेत्र प्रभावित हो जाएंगे। विदेशी नेटिजनों ने प्रत्यक्ष रूप से कहा कि यह मानव के खिलाफ अपराध है।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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