दुनिया की खबरें: ट्रंप बोले- 'ग्रीनलैंड पर कब्जा होकर रहेगा...' और ईरान प्रोटेस्ट में 2400 से ज्यादा मौतें

ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट में यह दलील दोहराई कि अमेरिका को ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से ग्रीनलैंड की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसे हासिल करने के लिए नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन)को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए’’

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण से कम कुछ भी स्वीकार नहीं है। उन्होंने यह टिप्पणी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों की मेजबानी के लिए आयोजित वार्ता से कुछ घंटे पहले की है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट में यह दलील दोहराई कि अमेरिका को ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से ग्रीनलैंड की आवश्यकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसे हासिल करने के लिए नाटो (उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन)को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए’’ अन्यथा रूस या चीन इसे हासिल कर लेंगे और यह नहीं होने जा रहा है।

ट्रंप ने लिखा, ‘‘ग्रीनलैंड के अमेरिका के हाथों में आने से नाटो कहीं अधिक शक्तिशाली और प्रभावी बन जाएगा। इससे कम कुछ भी स्वीकार नहीं है।’’

ग्रीनलैंड नाटो सहयोगी डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। यह भू-राजनीतिक उथल-पुथल के केंद्र में है क्योंकि ट्रंप इस पर अमेरिका के नियंत्रण पर अड़े हुए हैं जबकि ग्रीनलैंड वासियों का कहना है कि यह क्षेत्र बिकाऊ नहीं है।

व्हाइट हाउस ने जबरन इस आर्कटिक द्वीप पर कब्जा करने की आशंका से इनकार नहीं किया है।

वेंस का बुधवार को वाशिंगटन में डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन और उनके ग्रीनलैंड के समकक्ष विवियन मोट्ज़फेल्ड से इस पूरे मुद्दे पर बैठक करने का कार्यक्रम है।

नुक निवासी एवं 22 वर्षीय छात्रा तुता मिकेलसन ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी अधिकारियों को ‘पीछे हटने’ का संदेश मिल जाएगा।

ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका के ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के लिए ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’ है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस द्वीप को अमेरिका की सुरक्षा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। ट्रंप ने अपने इस कदम के लिए रूसी और चीनी जहाजों से उत्पन्न खतरे को एक कारण बताया है। हालांकि, ग्रीनलैंड के निवासियों और विशेषज्ञों ने उनके दावों पर सवाल उठाया है।

इस बीच, इस संकट को सुलझाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में आर्कटिक कॉकस के सीनेटरों से मुलाकात करने वाले हैं।

ईरान: मृतकों की संख्या बढ़कर 2,572 हुई, प्रधान न्यायाधीश ने मुकदमे चलाने और फांसी के संकेत दिए

ईरान के प्रधान न्यायाधीश ने सरकार विरोधी राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ त्वरित सुनवाई और फांसी की सजा का संकेत दिया है। वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बुधवार को कहा कि मृतकों की संख्या बढ़कर 2,572 हो गई है।

ईरान के उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश गुलामहुसैन मोहसेनी-एजेई ने मंगलवार को एक वीडियो में, मुकदमे चलाये जाने और फांसी की सजा के बारे में टिप्पणी की। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि मृत्युदंड दिये जाने की स्थिति में वह ‘‘बहुत कड़ी कार्रवाई’’ करेंगे।

इस बीच, अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ ने बताया कि बुधवार सुबह तक मृतकों की संख्या बढ़कर 2,571 हो गई थी। यह आंकड़ा दशकों में ईरान में हुए किसी भी विरोध प्रदर्शन या अशांति में हुई मौतों की संख्या से कहीं अधिक है और देश की 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाता है।

मृतकों की संख्या की जानकारी मिलने के बाद, ट्रंप ने ईरान के नेताओं को चेतावनी दी कि वह किसी भी प्रकार की बातचीत समाप्त कर रहे हैं और ‘‘कार्रवाई करेंगे।’’

ईरान के प्रधान न्यायाधीश एजेई ने कहा, ‘‘अगर हमें कोई काम करना है, तो हमें उसे अभी करना चाहिए। अगर हम कुछ करना चाहते हैं, तो हमें उसे जल्दी करना होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर इसमें दो महीने या तीन महीने की देरी होती है तो इसका उतना असर नहीं पड़ेगा। अगर हम कुछ करना चाहते हैं, तो हमें उसे तुरंत करना होगा।’’

पाकिस्तान के एक आव्रजन अधिकारी ने बुधवार को बताया कि ईरान में अध्ययन कर रहे दर्जनों पाकिस्तानी छात्र दक्षिण-पश्चिमी सीमा के एक दूरस्थ रास्ते से अपने घर लौट आए हैं।


थाईलैंड के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में यात्री ट्रेन पर क्रेन गिरने की घटना में 29 लोगों की मौत

थाईलैंड के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में बुधवार को एक यात्री ट्रेन पर निर्माण में इस्तेमाल की जाने वाली क्रेन के गिर जाने के बाद ट्रेन के पटरी से उतर जाने के कारण 29 लोगों की मौत हो गई और 64 अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि बचावकर्मी अब भी मलबे में तलाश कर रहे हैं और लोगों को प्राथमिक उपचार मुहैया करा रहे हैं। यह हादसा महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल परियोजना निर्माण के दौरान हुआ। यह परियोजना चीन को दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकतर हिस्सों से जोड़ेगी।

नाखोन रत्चासिमा प्रांत के जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार, दुर्घटना उस वक्त हुई जब रेलवे के एक ऊंचे हिस्से का निर्माण करने के लिए इस्तेमाल की जा रही क्रेन बैंकॉक से उबोन रत्चाथानी प्रांत की ओर जा रही ट्रेन पर गिर गई। इस घटना के बाद ट्रेन पटरी से उतर गई और उसमें आग लग गई। परिवहन मंत्री पिफत रत्चकितप्राकन ने बताया कि उन्होंने दुर्घटना की जांच के आदेश दिए हैं।

ट्रंप ने साल की शुरुआत में ही दिखा दिए आक्रामक तेवर, समर्थक भी हुए खफा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साल के शुरुआती दो हफ्तों में ही अपने तेवरों से सबको हैरान कर दिया है। एक ओर जहां वह वेनेजुएला पर अपना नियंत्रण जताने लगे हैं तो दूसरी ओर उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की भी धमकी दी है। इसके अलावा वह आप्रवासियों के खिलाफ भी कठोर कदम उठा रहे हैं।

वह देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अहम माने जाने वाले फेडरल रिजर्व को भी अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं, जिसके प्रमुख से उनका टकराव भी सामने आया है।

ट्रंप जिस तरह से एक के बाद एक बड़े फैसले लेकर खलबली मचा रहे हैं, वह बहुत चौंकाने वाला है। इसी बीच आने वाले मध्यावधि चुनाव में मतदाता उनके नेतृत्व पर अपना फैसला देने वाले हैं।

ट्रंप के हर फैसले में बड़े जोखिम हैं — चाहे वह विदेश में युद्ध में दाखिल होने का खतरा हो या देश की वित्तीय व्यवस्था को नुकसान पहुंचने का डर। लेकिन ट्रंप पूरी आक्रामकता के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिसकी वजह से रिपब्लिकन पार्टी के उनके कुछ सहयोगी भी घबराए हुए हैं।

येल विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और इतिहासकार जोआन बी. फ्रीमैन कहती हैं, “राष्ट्रपति कार्यालय बेकाबू हो गया है। हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा।” ट्रंप संभावित विरोध या मुश्किलों की परवाह नहीं कर रहे। मंगलवार को डेट्रॉयट में ट्रंप ने कहा, “फिलहाल मुझे काफी अच्छा लग रहा है।”

उनका भाषण मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने के लिए था और उन्होंने दावा किया कि महंगाई को लेकर चिंताओं के बावजूद अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। लेकिन वह फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल पर निशाना साधना भी नहीं भूले, जिन्होंने ट्रंप के दबाव के बावजूद ब्याज दरें नहीं घटाईं। ट्रंप ने कहा, “इस झक्की व्यक्ति की जल्द ही छुट्टी हो जाएगी।”

रिपब्लिकन नेताओं ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान ज़्यादातर समय उनका समर्थन किया। लेकिन इस हफ्ते दरार के संकेत मिलने लगे जब पॉवेल ने रविवार को बताया कि फेडरल रिजर्व की इमारत की मरम्मत के बारे में उनके बयान को लेकर केंद्रीय बैंक आपराधिक जांच का सामना कर रहा है।

पिछले साल भी न्याय विभाग ने ट्रंप के विरोधियों को निशाना बनाते हुए उनके खिलाफ कई मामलों की जांच शुरू कर दी थी, जिनमें पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कॉमी, न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के खिलाफ की गई जांच शामिल है।

लेकिन देश की मौद्रिक नीति तय करने में मदद करने वाले पॉवेल के खिलाफ कदम उठाना कुछ नेताओं के लिए हद पार करने जैसा है।

ट्रंप की कट्टर समर्थक और ‘फॉक्स बिजनेस’ की प्रस्तोता मारिया बार्टीरोमो ने असामान्य रूप से उनकी आलोचना की।

उन्होंने सोमवार के शो में कहा, “ऐसा लगता है कि वॉल स्ट्रीट के अधिकांश लोग इस तरह की लड़ाई नहीं देखना चाहते। राष्ट्रपति के पास बहुत अच्छे तर्क हैं, यह सही है। लेकिन वॉल स्ट्रीट इस तरह की जांच नहीं देखना चाहता।”

फेडरल रिजर्व अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है क्योंकि यह ब्याज दरें तय करता है, जिन्हें ट्रंप कम करना चाहते हैं। हालांकि, इस संस्था की स्वतंत्रता को कम करना उल्टा असर डाल सकता है।

ट्रंप अब अमेरिका की विदेश नीति में बदलाव कर रहे हैं। उन्होंने “अमेरिका फर्स्ट” की बात की थी, लेकिन अब उन्होंने अमेरिका की भूमिका को ऐसे देशों तक बढ़ा दिया है जहां हालात पहले से बहुत जटिल हैं। इस दिशा में सबसे बड़ा कदम वेनेजुएला में उठाया गया।

इस महीने अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने की कोशिश की। इस हमले से पहले ट्रंप यह कहते रहे कि वग मादुरो को इसलिए निशाना बना रहे हैं क्योंकि वह मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल है।

लेकिन अब ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए एक आर्थिक मौके के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है — खासकर तेल को लेकर।

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