दुनिया की खबरें: पुतिन-ट्रंप की सीक्रेट डील? और भारत-चीन के ‘नाजुक’ संबंधों में हस्तक्षेप नहीं करेगा रूस

पुतिन ने कहा है कि मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव के आधार पर यूक्रेन के साथ समझौता करने के लिए ‘‘तैयार और इच्छुक’’ है, बशर्ते कीव कुछ ‘‘समझौते’’ करने के लिए तैयार हो।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव के आधार पर यूक्रेन के साथ समझौता करने के लिए ‘‘तैयार और इच्छुक’’ है, बशर्ते कीव कुछ ‘‘समझौते’’ करने के लिए तैयार हो। उन्होंने यह दावा भी किया कि रूसी सेना युद्ध के मैदान में अपना प्रभुत्व बनाए हुए है।

पीटीआई सहित प्रमुख वैश्विक समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बातचीत में रूसी राष्ट्रपति ने बृहस्पतिवार रात कहा कि मॉस्को यूक्रेनी ड्रोन हमलों का मुकाबला करने के लिए अपनी हवाई रक्षा को मजबूत कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘‘रूसी लोगों की देशभक्ति और इच्छाशक्ति’’ यह सुनिश्चित करेगी कि वे यूक्रेन में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें।

इसी से संबंधित एक घटनाक्रम में, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पुतिन को लिखे एक खुले पत्र में युद्ध को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करने के लिए रूसी राष्ट्रपति के साथ आमने-सामने की बैठक का आह्वान किया।

जेलेंस्की ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए पूर्ण युद्धविराम का समर्थन करते हुए कहा कि शांति केवल यूक्रेन और रूस के बीच सीधे संवाद के माध्यम से ही संभव है। वहीं, क्रेमलिन ने पुष्टि की कि उसे पत्र प्राप्त हुआ है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने लिखा, ‘‘यूक्रेन इस युद्ध को हमारे और आपके बीच सीधी बातचीत के माध्यम से समाप्त करने का प्रस्ताव रखता है। मैं एक बैठक का प्रस्ताव कर रहा हूं।’’

प्रेस वार्ता में पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन को समझौते करने होंगे। उन्होंने विशेष रूप से पिछले साल अगस्त में अलास्का के एंकरेज में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई शिखर बैठक का जिक्र किया।

रूसी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘निस्संदेह, हम शांतिपूर्ण माध्यम से यूक्रेन के साथ एक समझौते पर पहुँचने के लिए तैयार और इच्छुक हैं-तथा यह उन बातों पर आधारित होगा जिन पर हमने एंकरेज में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बैठक में चर्चा की है।’’

भारत और चीन के ‘नाजुक’ संबंधों में हस्तक्षेप नहीं करेगा रूस: पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और चीन के ‘‘नाजुक’’ द्विपक्षीय संबंधों में रूस हस्तक्षेप नहीं करेगा।

पुतिन ने साथ ही विश्वास जताया कि भारत और चीन अपने पुराने सीमा विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पुतिन ने दुनिया की अग्रणी समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बृहस्पतिवार रात व्यापक विषयों पर बातचीत के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग -दोनों की सराहना करते हुए कहा कि भारत एवं चीन के साथ रूस की दशकों पुरानी साझेदारियां स्वाभाविक रूप से विकसित हुई हैं और दोनों के साथ उसके संबंध एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं।

रूस के राष्ट्रपति ने ‘पीटीआई’ के सीईओ और प्रधान संपादक विजय जोशी के एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘भारत और चीन के बीच नाजुक एवं बहुआयामी संबंध है और इसमें हस्तक्षेप करना अच्छा विचार नहीं है। बेशक, हमारा अपने दोनों मित्रों-भारत और चीन के साथ संवाद होता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी, दोनों सीमा संबंधी मुद्दे समेत आपसी हितों से जुड़े सभी मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।’’

भारत और चीन ने 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों और उसके बाद चार वर्ष से अधिक समय तक बने रहे सैन्य गतिरोध के कारण अपने संबंधों में आए गंभीर तनाव के बाद, पिछले एक वर्ष से अधिक समय में संबंधों को फिर से सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

मोदी और शी की तियानजिन में पिछले साल अगस्त में मुलाकात हुई थी। यह बैठक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार एवं शुल्क संबंधी नीतियों के बीच हुई थी और इसने एशिया की दो बड़ी शक्तियों के संबंधों को स्पष्ट दिशा दी। मोदी और शी ने इस बात की पुष्टि की थी कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि विकास में साझेदार हैं और उनके मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए।

रूस कहता रहा है कि आपसी सीमा विवाद को सुलझाना भारत एवं चीन का काम है और वह दोनों पक्षों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध देखना चाहता है।

पुतिन ने एशिया में रूस के रणनीतिक संतुलन को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत एवं चीन के साथ रूस की दशकों पुरानी साझेदारियां स्वाभाविक रूप से विकसित हुई हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के साथ रूस की बढ़ती निकटता चीन की कीमत पर नहीं है, ठीक उसी तरह जैसे चीन के साथ रूस का गहरा गठजोड़ भारत के साथ उसके संबंधों को प्रभावित नहीं करता।

उन्होंने कहा, ‘‘रूस ने (भारत और चीन के साथ) ये संबंध स्थापित किए हैं। यह स्वाभाविक रूप से हुआ। रूस और भारत के संबंध चीन को परेशान नहीं करते और चीन के साथ हमारे संबंध भारत को परेशान नहीं करते।’’

पुतिन और शी ने 2022 में जारी एक संयुक्त बयान में रूस एवं चीन के संबंधों को ‘‘असीमित’’ मित्रता के रूप में वर्णित किया था। भारत और रूस के बीच आपसी भरोसे और रणनीतिक समानता पर आधारित ‘‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी’’ है।

पुतिन ने रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय ढांचे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया जो बाद में ब्रिक्स का आधार बना।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एक समय सुझाव दिया था कि भारत और चीन के नेता रूस में मिलें और इसी तरह रूस-भारत-चीन ढांचे की स्थापना हुई। हमारे पास बात करने और सहमति बनाने के लिए कई मुद्दे थे।’’

बीजिंग और मॉस्को, दोनों रूस-भारत-चीन (आरआईसी) तंत्र को फिर से सक्रिय करने पर जोर दे रहे हैं ताकि वैश्वीकरण को कमजोर करने वाली ट्रंप की एकतरफा नीतियों का मिलकर मुकाबला किया जा सके।


बांग्लादेश में बढ़ती नशाखोरी और नैतिक पतन से अपराधों में वृद्धि, रिपोर्ट में जताई गई चिंता

बांग्लादेश में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े संकेतकों में चिंताजनक गिरावट दर्ज की जा रही है। बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा और शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न जैसी घटनाएं लगातार सुर्खियां बन रही हैं।

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में अपराधों में हो रही बढ़ोतरी के पीछे नशे का बढ़ता प्रचलन, नैतिक मूल्यों में गिरावट, सामाजिक निगरानी की कमजोरी और दंड से बच निकलने की संस्कृति प्रमुख कारण हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक विश्लेषकों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अपराधों में यह "भयावह" वृद्धि चार प्रमुख कारकों से प्रेरित है। इनमें व्यापक स्तर पर मादक पदार्थों का सेवन, सामाजिक और नैतिक मूल्यों का ह्रास, कमजोर सामाजिक नियंत्रण तथा अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का अभाव शामिल है।

प्रेसेंज़ा इंटरनेशनल प्रेस एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में नशीले पदार्थों की उपलब्धता अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच चुकी है। शहरी क्षेत्रों से लेकर दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक याबा, गांजा, फेंसिडिल और अत्यधिक खतरनाक 'आइस' (क्रिस्टल मेथ) जैसे मादक पदार्थ तेजी से फैल रहे हैं, जिनकी चपेट में बड़ी संख्या में युवा और किशोर आ रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, नशे की लत व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता और आत्म-नियंत्रण को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इससे समाज में हिंसक और विकृत मानसिकता को बढ़ावा मिलता है, जिसके कारण महिलाएं और बच्चे अपराधियों का आसान निशाना बन जाते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में यौन हिंसा और लूटपाट के अधिकांश मामलों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध मादक पदार्थों के सेवन से जुड़ा हुआ पाया गया है।

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