रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शांति की एक और पहल, कल तुर्की में दोनों देश के विदेश मंत्री करेंगे बैठक

दोनों देशों के बीच इस बैठक का प्रस्ताव तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोग्लू ने रखा था। उन्होंने इसे त्रिपक्षीय प्रारूप में रखने का प्रस्ताव रखा था। रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता अब तक चुनौतीपूर्ण साबित हुई है और अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है।

फोटोः सोशल मिडिया
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नवजीवन डेस्क

रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच आज शांति की एक बड़ी पहल हुई है। दरअसल खबर है कि दोनों देशों के विदेश मंत्री कल तुर्की में मुलाकात करेंगे और आपसी तनाव के मुद्दों पर बातचीत करेंगे। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूसी आक्रमण शुरू होने के बाद से यह दोनों नेताओं के बीच पहली बैठक होगी।

रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को इस बैठक की पुष्टि की है, जिसके अनुसार रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके यूक्रेनी समकक्ष दिमित्रो कुलेबा गुरुवार को तुर्की में मिलेंगे।
रूस के सरकारी समाचार आउटलेट आरआईए नोवोस्ती ने बुधवार सुबह विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मारिया जखारोवा के हवाले से कहा कि लावरोव अंताल्या में एक अंतरराष्ट्रीय राजनयिक मंच में भाग लेंगे और वहां उनकी कुलेबा के साथ वार्ता की योजना है।


दोनों देशों के बीच इस बैठक का प्रस्ताव तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोग्लू ने रखा था, जिन्होंने इसे अपने, कुलेबा और लावरोव के साथ त्रिपक्षीय प्रारूप में रखने का प्रस्ताव रखा था।
बताया गया है कि बैठक गुरुवार को होगी, जबकि राजनयिक सम्मेलन शुक्रवार को होने वाला है। रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता अब तक चुनौतीपूर्ण साबित हुई है, अभी तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है।

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने नाटो की मांग छोड़ने के संकेत दिए हैं। जेलेंस्की ने रूसी हमले पर तमाम बड़े देशों के रुख से काफी निराश होते हुए स्पष्ट कह दिया कि यूक्रेन अब नाटो की सदस्यता की मांग नहीं करेगा। दरअसल यूक्रेन पर रूस के हमले का आज 14वां दिन है। इतने दिनों में यूक्रेन का बड़ा नुकसान हुआ है। यूक्रेन ने कई देशों से मदद मांगी लेकिन रूस की धमकियों के आगे बड़े-बड़े देशों की आवाज धीमी पड़ गई। इस युद्ध की एक बड़ी वजह यूक्रेन की नाटो में शामिल होने की योजना भी थी। हालांकि अब जेलेंस्की ने यह योजना छोड़ने का ऐलान कर दिया है।

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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