चीन की परेशानी बन सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था की परेशानी, नहीं थम रहा कोरोना, सख्ती से ग्लोबल सप्लाई प्रभावित

कारखाना मालिकों ने बताया कि ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को काबू करने के लिए स्थानीय स्तर पर कई तरह के प्रतिबंध लागू हैं। इस वजह से काम जारी रख पाना मुश्किल होता जा रहा है। उत्पादन के लिए जरूरी कच्चा माल मंगवाना और बनाए हुए उत्पाद को बाहर भेजना कठिन हो गया है।

फोटोः सोशल मीडिया
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डॉयचे वेले

दुनिया में अब तक कोरोना के कुल संक्रमणों की संख्या ने पांच करोड़ का ग्राफ छू लिया। इस महामारी ने कमोबेश हर देश को प्रभावित किया है। महामारी शुरू हुए दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। दुनिया के ज्यादातर हिस्से अब कोविड के साथ जीने, इसके बीच जीवन और कामकाज सामान्य करने के व्यावहारिक तरीके अपनाने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि चीन कोरोना संक्रमण खत्म करने के लिए 'जीरो कोविड' नीति अपना रहा है। संक्रमण के अपेक्षाकृत कम मामलों के बावजूद यहां कोरोना को लेकर लॉकडाउन जैसे सख्त नियम लागू हैं। ओमिक्रॉन वैरिएंट कम जानलेवा, लेकिन काफी संक्रामक है। ऐसे में सख्तियों के बावजूद कोरोना को पूरी तरह काबू करने की चीन की कोशिशें कामयाब नहीं हो पा रही हैं।

सख्तियों के चलते कामकाज प्रभावित

संक्रमण की श्रृंखला को पूरी तरह रोकने की कोशिशों के तहत शंघाई और जिलिन प्रांतों में केवल हॉटस्पॉट पर ही नहीं बल्कि बाकी जगहों पर भी कई तरह के प्रतिबंध लागू हैं। इनके कारण जहां सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर दिख रहा है। 7 अप्रैल को आए गैवकल ड्रैगोनोमिक्स के एक शोध में पाया गया कि चीन के 100 सबसे बड़े शहरों में से 87 के भीतर क्वारंटीन जैसी सख्तियां लागू हैं।

उसकी इस नीति का असर देश में कई तरह से दिख आ रहा है। इनमें हाई-वे पर ट्रैफिक जाम, अवरुद्ध बंदरगाह, बिना काम के खाली बैठे कामगार और बंद हो रहे कारखाने शामिल हैं। चीन की कोविड रणनीति के चलते वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है। इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर आईफोन, कई तरह के सामानों की आवाजाही और आपूर्ति में बाधा पड़ी है।

'क्लोज्ड लूप' मैनेजमेंट नहीं दे पा रहा है हल

कुछ कंपनियां जुगाड़ लगाकर रास्ता निकालने की कोशिश कर रही हैं। मसलन, 'क्लोज्ड लूप' मैनेजमेंट, जिसके तहत कामगारों को बाहर की दुनिया से अलग-थलग फैक्ट्री में रखा जाता है, ताकि वे संक्रमित ना हों। मगर ये कोशिशें समस्या का ठोस हल नहीं दे पा रही हैं। कुछ कारखाना मालिकों ने बताया कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण बढ़ते कोरोना मामलों को काबू करने के लिए स्थानीय स्तर पर कई तरह के प्रतिबंध लागू हैं। इस वजह से काम जारी रख पाना मुश्किल होता जा रहा है। उत्पादन के लिए जरूरी कच्चा माल मंगवाना और बनाए हुए उत्पाद को बाहर भेजना कठिन हो गया है।

'फॉक्सकॉन इंटरकनेक्टेड टेक्नॉलजी' ताइवानी कंपनी फॉक्सकॉन की ईकाई है जो डेटा ट्रांसमिशन से जुड़े उपकरण और कनेक्टर बनाती है। कंपनी ने शंघाई के पास बसे कंशन में एक प्लांट खुला रखा है। मामले की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने बताया कि इस यूनिट में 'क्लोज्ड लूप' तरीके से काम करवाया जा रहा है, लेकिन तब भी कंपनी केवल 60 फीसदी क्षमता पर ही काम कर पा रही है। इस बारे में पूछे जाने पर फॉक्सकॉन ने कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया। इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे बनाने वाली 30 से ज्यादा ताइवानी कंपनियों ने 13 अप्रैल को बताया कि पूर्वी चीन में लागू कोविड प्रबंधन सख्तियों के कारण उन्हें अपना उत्पादन रोकना पड़ा है। यह रोक कम-से-कम अगले हफ्ते तक जारी रहेगी।

रोकना पड़ रहा है कारखानों में उत्पादन

इससे पहले 12 अप्रैल को जर्मन कंपनी बॉश ने बताया था कि वह शंघाई और चांगचुन के अपने प्लांटों में उत्पादन रोक रहा है। इसके अलावा कंपनी ने दो और प्लांट के भीतर 'क्लोज्ड लूप' में काम शुरू करवाने की भी जानकारी दी। इसी दिन एप्पल के आईफोन असेंबल करने वाली ताइवानी कंपनी पेगाट्रॉन कोर ने भी शंघाई और कंशन में काम रुकवा दिया था। जर्मन कंपनी 'राइनसिंक' जिंक निर्माण सामग्री बनाती है। इसके एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सीईओ स्वैन आग्टन ने बताया कि ढुलाई संबंधी चुनौतियों के कारण कंपनी के शंघाई वेअरहाउस और उत्पादन केंद्रों के भीतर क्लोज्ड-लूप में काम करवाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि अप्रैल और शायद मई में भी कंपनी की सेल जीरो रहेगी।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए उन्होंने कहा, "हमें वेअरहाउस और उत्पादन केंद्र में लोग चाहिए। हमें ट्रक और चालक चाहिए। ये दोनों चीजें बेहद अहम हैं और दोनों ही अभी नामुमकिन हैं।" ऐसा नहीं कि केवल उन्हीं शहरों में कामकाज प्रभावित हो रहा है, जहां कोविड प्रतिबंध लागू हैं। पिछले हफ्ते इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी नियो ने अपने होफेई कारखाने में काम स्थगित करने की घोषणा की। होफेई में स्थानीय स्तर पर कोई कोरोना प्रतिबंध लागू नहीं है। मगर प्रभावित इलाकों के सप्लायरों ने काम बंद कर दिया, जिसके कारण कंपनी को होफेई में भी काम रोकना पड़ा।

ट्रांसपोर्ट की दुश्वारियां

प्रतिबंधों के कारण ट्रक ट्रांसपोर्ट खासतौर पर प्रभावित हुआ है। हाई-वे पर ट्रकों की लंबी कतारें हैं। कीमतों में काफी उछाल आया है। कई जगहों पर ट्रक चालकों को शहर में घुसने के लिए पीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा शहर में दाखिले पर भी कई टेस्ट करवाने होंगे। कई ट्रक चालक जो शंघाई जैसे संक्रमण प्रभावित इलाकों में गए थे, वे हाई-वे पर फंसे हुए हैं।

कारण यह कि प्रभावित क्षेत्र में घुसने के कारण उनका स्मार्टफोन हेल्थ कोड अपने आप ही अवैध हो गया है। ऐसे में ट्रक चालक कहीं नहीं जा सकते। खबरें आ रही हैं कि चालकों को कई दिन ट्रक में बिताने पड़ रहे हैं। पिछले हफ्ते ही चीन की सरकारी मीडिया में एक ट्रक चालक की खबर चली, जिसे शंघाई जाने के बाद ट्रक में सात दिन बिताना पड़ा था।

बंदरगाहों पर धीमा यातायात

शंघाई का कंटेनर बंदरगाह दुनिया का सबसे व्यस्त पोर्ट माना जाता है। वहां यातायात बहुत धीमा है। आंकड़ों के मुताबिक, शंघाई और नजदीक के जोशान पोर्ट पर इंतजार कर रहे कंटेनर जहाजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डैनिश जहाज कंपनी 'मैर्स्क' ने 11 अप्रैल को कहा कि उसके क्लाइंट शंघाई बंदरगाह जाने के बदले रास्ता बदलकर दूसरी जगहों पर जाएं।

विदेशी कारोबारी समूह भी सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों पर बोल रहे हैं। 'यूरोपियन चैंबर ऑफ कॉमर्स इन चाइना' ने पिछले हफ्ते सरकार को एक पत्र लिखा। इसमें बताया गया था कि चीन में काम कर रही जर्मन कंपनियों में से करीब आधों को सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतें हो रही हैं।

अर्थशास्त्रियों ने भी आशंका जताई है कि मौजूदा स्थितियों के कारण चीन की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। चीन ने इस साल साढ़े पांच फीसदी विकास दर का लक्ष्य रखा था। इसे हासिल कर पाना मुश्किल होता जा रहा है। पिछले हफ्ते आईएनजी ने चीन की जीडीपी से जुड़ी संभावनाओं को 4.8 प्रतिशत से घटाकर 4.6 फीसदी कर दिया। 13 अप्रैल को चीन में इसकी मुख्य अर्थशास्त्री इरिस पांग ने कहा कि चीन का कोविड संकट पूरी दुनिया की विकास दर को प्रभावित कर सकता है। पांग ने कहा, "चीन की एक परेशानी अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की परेशानी बन सकती है।"

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