ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को बताया 'घटिया', बोले- लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर चल रहा है सीजफायर
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज करते हुए उसे घटिया बताया। चीन दौरे से पहले ट्रंप ने ईरान को लेकर तीखे बयान दिए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए उसे घटिया और अस्वीकार्य करार दिया है। सांसदों के साथ रोज गार्डन क्लब डिनर में शामिल होने से पहले ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा, “आज शाम के लिए ईरानियों को एक तरफ रख देंगे।” इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने ईरान की स्थिति को “अब तक की सबसे कमजोर” बताते हुए कहा कि तेहरान “लाइफ सपोर्ट सिस्टम” पर चल रहा है।
ट्रंप बोले- ईरान का प्रस्ताव बेकार
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को पढ़ने के बाद उन्होंने उसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “उन्होंने हमें जो घटिया चीज भेजी, उसे मैंने पूरा भी नहीं पढ़ा। ईरान लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर है और सीजफायर भी उसी हालत में चल रहा है।” ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे क्योंकि वह बहुत खतरनाक और अस्थिर देश है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि सीजफायर के दौरान ईरान ने जो सीमित निर्माण कार्य किया है, उसे अमेरिका “करीब एक दिन में तबाह” कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास पहले की तुलना में अधिक मजबूत गोला-बारूद भंडार मौजूद है और ईरान पर की जा रही कार्रवाई “दुनिया की सेवा” है। ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों की आलोचना करते हुए कहा कि जिन नेताओं के पास शक्ति थी, उन्हें पहले ही यह कदम उठा लेना चाहिए था।
‘न्यूक्लियर डस्ट’ और हमले को लेकर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व को कई स्तरों पर “मार गिराया गया” है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका से “न्यूक्लियर डस्ट” हटाने में मदद मांगी है क्योंकि संबंधित जगह “पूरी तरह बर्बाद” हो चुकी है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने कहा कि दुनिया में केवल अमेरिका और चीन ही ऐसे देश हैं जो इस तरह की सामग्री को हटाने की क्षमता रखते हैं।
इस बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने मंगलवार को कहा कि 14 सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता के अधिकारों को मान्यता देने वाला यही रास्ता व्यावहारिक है और किसी दूसरे दृष्टिकोण से केवल असफलता मिलेगी। गालिबफ ने यह भी कहा कि जितनी देरी होगी, अमेरिकी टैक्सपेयर को उतनी अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
चीन दौरे से पहले बढ़ा कूटनीतिक दबाव
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह लगभग एक दशक बाद इसी सप्ताह चीन दौरे पर जाने वाले हैं। हालांकि यह दौरा ऐसे दौर में हो रहा है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौता अस्थिर बना हुआ है। इसके साथ ही ईरान, ताइवान और पश्चिम एशिया संकट को लेकर भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में ट्रंप की सख्त बयानबाजी को आने वाले कूटनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
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