अमेरिका की नाकेबंदी की घोषणा के बाद ईरान ने फारस और ओमान की खाड़ी में बंदरगाहों को धमकी दी

अमेरिका की इस घोषणा के बाद ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में स्थित बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी है जिससे क्षेत्र में टकराव गहराने का खतरा बढ़ गया है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

 अमेरिकी सेना द्वारा सोमवार से ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की नाकाबंदी शुरू किए जाने की घोषणा के बाद तेल की कीमतें और बढ़ने तथा युद्ध के और भीषण होने की आशंका है।

अमेरिका की इस घोषणा के बाद ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में स्थित बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी है जिससे क्षेत्र में टकराव गहराने का खतरा बढ़ गया है।

‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग’ (आईआरआईबी) के अनुसार, ‘‘फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सभी के लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं।’’ ईरानी सेना ने कहा, ‘‘इस क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।’’

इससे पहले, अमेरिका ने घोषणा की थी कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे या ईरान में शाम साढ़े पांच बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करेगा।

‘यूएस सेंट्रल कमांड’ (सेंटकॉम) ने कहा कि यह नाकेबंदी ‘‘सभी देशों के उन पोतों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी’’ जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। उसने कहा कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।


ये घोषणाएं पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को हुई लंबी युद्धविराम वार्ता के बिना किसी समझौते के समाप्त होने के बाद की गईं।

बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध संबंधी विचारों को लेकर पोप लियो 14वें पर असाधारण रूप से निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि पोप ‘‘बहुत अच्छा काम’’ कर रहे हैं और ‘‘वह बहुत उदारवादी व्यक्ति हैं’’ तथा उन्हें ‘‘कट्टर वामपंथियों को खुश करना बंद कर देना चाहिए।’’

ट्रंप ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब लियो ने सप्ताहांत में संकेत दिया था कि ‘‘सर्वशक्तिमान होने का भ्रम’’ ईरान में अमेरिका-इजराइल युद्ध को हवा दे रहा है। पोप और राष्ट्रपति के विचारों में मतभेद होना असामान्य नहीं है लेकिन किसी पोप का किसी अमेरिकी नेता की सीधे आलोचना करना असामान्य है और इसके बाद दी गई ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया भी सामान्य नहीं है।

अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू करने की घोषणा के बाद बाजार में शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में तेजी आई।

अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत आठ प्रतिशत बढ़कर 104.24 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल का मूल्य सात प्रतिशत बढ़कर 102.29 अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया।


ईरान युद्ध के दौरान ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है। फरवरी के आखिर में युद्ध शुरू होने से पहले इसकी कीमत लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी जो कुछ समय में बढ़कर 119 अमेरिकी डॉलर से अधिक तक पहुंच गई। शुक्रवार को शांति वार्ता से पहले जून के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 0.8 प्रतिशत गिरकर 95.20 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रह गया था।

इस बीच, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) रेडियो से कहा कि ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी में ब्रिटेन शामिल नहीं होगा।