'सिर झुकाया, आत्मसम्मान से समझौता किया', विदेशी ऋण के लिए अपमानित होने पर पाक पीएम शहबाज शरीफ का कबूलनामा
शहबाज शरीफ ने कहा, ‘‘जब आप ऋण लेने जाते हैं तो आपको अपने आत्मसम्मान की कीमत चुकानी पड़ती है। आपको समझौता करना पड़ता है... कभी-कभी, अनुचित मांगें सामने आ सकती हैं और आपको उन्हें पूरा करना पड़ सकता है, भले ही उन्हें पूरा करने का कोई कारण न हो।’’

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बात को कबूला है कि कर्ज की वजह से उनके देश को कई बार अपमानित होना पड़ा है। पीएम शहबाज शरीफ ने ‘‘मित्र देशों’’ से वित्तीय सहायता मांगने में अपमानजनक स्थिति का जिक्र करते हुए इस बात को सार्वजनिक मंच से खुलकर स्वीकारा कि विदेशी ऋण लेने की मजबूरी में पाकिस्तान को अपना सिर झुकाना पड़ा है और ‘‘आत्मसम्मान की कीमत पर’’ समझौता करना पड़ा।
शहबाज शरीफ का कबूलनामा
इस्लामाबाद में शुक्रवार को देश के प्रख्यात व्यापारियों और निर्यातकों के सम्मान में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए शरीफ ने उस कठिन दौर को याद किया जब पाकिस्तान को दिवालियापन के डर का सामना करना पड़ा था और कुछ लोग इसे (पाकिस्तान को) तकनीकी रूप से विफल होने के कगार पर बता रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘जब हमने पदभार संभाला, तब आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक थी और आम आदमी को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।’’
ऋण मांगने वालों का सिर झुका रहता है
प्रधानमंत्री ने 2023 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रबंध निदेशक के साथ अपनी मुलाकात का जिक्र किया जिसके बाद वैश्विक ऋणदाता ने एक आर्थिक कार्यक्रम को मंजूरी दी जिससे देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद मिली।
शरीफ ने कहा कि मित्र देशों ने मुश्किल समय में पाकिस्तान का पूरा समर्थन किया है और उन्होंने सेना प्रमुख एवं रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ मिलकर कई देशों के नेताओं से अरबों डॉलर के ऋण मांगने के लिए मुलाकात की।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं कैसे बताऊं कि हमने मित्र देशों से ऋण के लिए किस तरह अनुरोध किया? मित्र देशों ने हमें निराश नहीं किया। लेकिन जो ऋण मांगने जाता है, उसका सिर झुका रहता है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऋण से दायित्व भी उत्पन्न होते हैं जिन्हें पूरा करना होता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब आप ऋण लेने जाते हैं तो आपको अपने आत्मसम्मान की कीमत चुकानी पड़ती है। आपको समझौता करना पड़ता है... कभी-कभी, अनुचित मांगें सामने आ सकती हैं और आपको उन्हें पूरा करना पड़ सकता है, भले ही उन्हें पूरा करने का कोई कारण न हो।’’
इन देशों से कर्ज लेकर चल रहा पाकिस्तान का काम
पाकिस्तान अपने विदेशी मुद्रा भंडार और ऋण के प्रबंधन के लिए चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर सहित कई देशों से मिलने वाली वित्तीय सहायता पर अत्यधिक निर्भर है। ये देश, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ मिलकर नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को नियमित ऋण और पुनर्भुगतान प्रदान करते हैं।
पाकिस्तान पर कितना कर्ज
आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज का बोझ बढ़कर 52.366 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका था। जानकारों का मानना है कि जिस तरह की आर्थिक स्थिति फिलहाल पाकिस्तान में बनी हुई है, आने वाले वर्षों में वह कर्ज के इस दलदल में और गहराई तक फंसता चला जाएगा। पिछले कुछ सालों के आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि पाकिस्तान पर कर्ज बढ़ता गया है।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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