आर्थिक संकट से घिरे पाकिस्तान को बचाने की इमरान खान की आखिरी कोशिश, देशवासियों को दी 6 दिन की मोहलत

इमरान खान की अगुवाई वाली पाकिस्तान की सरकार इसी साल मई में टैक्स एमनेस्टी स्कीम लाई थी, जिसके तहत बेनामी संपत्ति, अघोषित नकद का खुलासा करने का मौका दिया गया था, लेकिन अब तक इस योजना में केवल 250 लोगों ने हिस्सा लिया और केवल 45 करोड़ रुपए का कर जमा हुआ है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लगातार हाथ-पैर मार रहे प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक तरह से आखिरी कोशिश के तहत एक नया कदम उठाया है। उन्होंने देश की आर्थिक हालत को उबारने के लिए मई में टैक्स एमनेस्टी स्कीम नाम से एक नई योजना लॉंच की थी। उन्होंने सोमवार को एक बार फिर देशवासियों से इस स्कीम का फायदा उठाने की अपील करते हुए ऐलान किया कि 30 जून तक अपनी बेनामी संपत्ति के खुलासे या बकाया टैक्स देने वाले शख्स पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होगी।

इमरान खान ने एक निजी टीवी चैनल पर कहा कि आगामी 30 जून तक बेनामी संपत्ति का खुलासा करने या बकाया कर देने वाले शख्स पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं होगी। लेकिन अगर कोई 30 जून तक भी अपने कर का भुगतान नहीं करता तो फिर सरकार जांचकर उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत अपनी बेनामी संपत्ति की घोषणा करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि कर देन के लिए उनका प्रोत्साहन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि 30 जून के बाद टैक्स एमनेस्टी स्कीम का लाभ उठाने की समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी।

पाकिस्तान के पीएम ने देशवासियों से अपील करते हुए ये भी कहा कि अगर वे डेडलाइन तक करों का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं तो भी कम से कम टैक्स एमनेस्टी स्कीम में अपना रजिस्ट्रेशन करा लें। साथ ही उन्होंने कहा कि किस्तों में भुगतान की भी छूट होगी। अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं से खास अपील करते हुए इमरान ने कहा कि बाहर जाएं और खुद टैक्स जमा करें और दूसरों को भी प्रोत्साहित करें।

दरअसल इमरान देश में सरकार की आमदनी की संरचना को पटरी पर लाना चाहते हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान के हालात 60 के दशक जैसे हो गए हैं। उन्होंने बताया कि टैक्स न जमा होने की वजह से बीते कुछ सालों में देश का खजाना खाली हो गया है। ऐसे में फिर से कर अदा करने की लोगों को आदत डालनी होगी। इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान में हर साल करीब 10 अरब डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है। इमरान ने साफतौर पर कहा कि पाकिस्तान का टैक्स कलेक्शन पूरी दुनिया में सबसे कम है। ऐसी स्थिति में देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता।

गौरतलब है कि पाकिस्तान पिछले लंबे समय से भारी आर्थ‌िक संकट से गुजर रहा है और इमरान देश में सरकार की आमदनी की संरचना को पटरी पर लाना चाहते हैं। इसके लिए पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 6 अरब डॉलर के पैकेज का सहारा मिला है, जिसमें से 2 अरब डॉलर की राशि इस साल मिलेगी। लेकिन इसके लिए आईएमएफ ने इमरान सरकार के सामने कर राजस्व बढ़ाने का कड़ा लक्ष्य रखा है। आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार के सामने 600 से 700 अरब रुपए का अतिरिक्त राजस्व जुटाने की गंभीर चुनौती रखी है।

इसके अलावा देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पीएम इमरान खान दुनिया भर के देशों का दरवाजा खटखटा रहे हैं। लेकिन ज्यादातर देशों ने पाकिस्तान को कर्ज देने से मना कर दिया। तेल के धनी कतर के शासक अमीर शेख तमीम बिन हमाद ने अभी दो दिन पहले ही पाकिस्तान की यात्रा के दौरान ने पाक को तीन अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज के ऐलान किया। उन्होंने पाकिस्तान के साथ व्यापार, धन शोधन रोधक और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने में सहयोग का भी भरोसा दिया।

कतर चौथा ऐसा देश है जो हाल के दिनों में पाकिस्तान की मदद के लिए आगे आया है। इससे पहले चीन ने पाकिस्तान को वाणिज्यिक कर्ज के रूप में 4.6 अरब डॉलर देने का ऐलान किया था। वहीं सऊदी अरब ने तीन अरब डॉलर और उसके भुगतान पर 3.2 अरब डॉलर की तेल सहायता का ऐलान किया था। संयुक्त अरब अमीरात ने भी पाकिस्तान को दो अरब डॉलर नकद की मदद का ऐलान किया है। लेकिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए इतनी रकम से शायद ही स्थिति बदले। इसीलिए इमरान खान कई तरह के दांव पेंच आजमा रहे हैं।

बता दें कि इमरान खान की अगुवाई वाली पाकिस्तान की पीटीआई सरकार इसी साल मई महीने में टैक्स एमनेस्टी स्कीम लाई थी। इस स्कीम के तहत बेनामी संपत्ति, अघोषित नकद का खुलासा कर न्यूनतम दरों पर कर देने के बाद काले धन को सफेद करने का मौका दिया गया था। लेकिन अब तक इस योजना में केवल 250 पाकिस्तानियों ने हिस्सा लिया है और 45 करोड़ रुपए का कर ही इकठ्ठा हो पाया है।

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