ईरान का बड़ा दावा, 24 घंटे में 220 अमेरिकी सैनिक मारे गए या घायल, बहरीन और UAE के सैन्य ठिकानों पर हमले
ईरान ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में बहरीन और यूएई स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों में 220 अमेरिकी सैनिक मारे गए या घायल हुए हैं। हमले में अमेरिकी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने बड़ा दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्तियों पर किए गए हमलों में भारी नुकसान हुआ है।
ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान की सेना के प्रवक्ता ने कहा कि जवाबी सैन्य कार्रवाई में करीब 220 अमेरिकी सैनिक और अधिकारी मारे गए या घायल हुए हैं और क्षेत्र में अमेरिका की कई सैन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।
बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े पर हमला
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फ़ाघारी ने शनिवार को कहा कि ईरानी हमलों के दौरान बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट को निशाना बनाया गया।
उनके अनुसार, इस हमले में 21 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।
अल धफरा एयर बेस पर भी हमला
ईरान का यह भी दावा है कि संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अल धफरा एयर बेस पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए।
प्रवक्ता के अनुसार, इस हमले में करीब 200 अमेरिकी सैनिक और सैन्यकर्मी मारे गए या घायल हुए।
फारस की खाड़ी में अमेरिकी तेल टैंकर भी निशाने पर
प्रेस टीवी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरानी सशस्त्र बलों ने फारस की खाड़ी के उत्तरी हिस्से में अमेरिकी स्वामित्व वाले एक तेल टैंकर को भी निशाना बनाया।
कब शुरू हुई जंग?
रिपोर्ट के अनुसार, यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एक नया सैन्य हमला किया।
ईरान का कहना है कि यह हमला अवैध और बिना उकसावे के किया गया था।
ईरानी मीडिया के मुताबिक इन हमलों में इस्लामी क्रांति के नेता अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई, कई सैन्य कमांडर और सैकड़ों ईरानी नागरिकों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
ईरान की जवाबी कार्रवाई
इन घटनाओं के बाद ईरान ने तेजी से जवाबी कार्रवाई शुरू की। प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन की बड़ी संख्या में हमले करते हुए इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
'सिर्फ अमेरिका और इजरायल के ठिकाने निशाने पर'
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि उनकी सैन्य कार्रवाई केवल अमेरिका और इजरायल की संपत्तियों और हितों के खिलाफ है।
उनका कहना है कि ईरान को उन देशों से कोई दुश्मनी नहीं है जहां ये अमेरिकी ठिकाने मौजूद हैं और वह उन देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है।
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