मिडिल ईस्ट में भड़की जंग! ईरान-इजरायल-अमेरिका टकराव, किसने कहां किया हमला, कितना हुआ नुकसान? पढ़ें ताजा अपडेट

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर दिया है। खामेनेई की मौत के बाद जंग और भड़क गई है।

फोटो: AI Generated
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नवजीवन डेस्क

मध्य पूर्व एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं। इन हमलों का घोषित लक्ष्य ईरान के सैन्य और परमाणु ढांचे को नुकसान पहुंचाना था, लेकिन जैसे ही ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई और अन्य शीर्ष अधिकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आईं, तनाव ने विस्फोटक रूप ले लिया।

यह टकराव अब सिर्फ दो देशों के बीच की कार्रवाई नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर सीमाओं से बाहर निकलकर पूरे क्षेत्र में महसूस किया जा रहा है।

संयुक्त हवाई हमले और उसके बाद की हलचल

अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के तहत ईरान के रणनीतिक सैन्य और परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के तुरंत बाद ईरान में व्यापक क्षति और शीर्ष नेतृत्व के हताहत होने की खबरों ने माहौल को और भड़का दिया। तनाव का स्तर इस कदर बढ़ा कि क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका खुलकर सामने आने लगी।


ईरान की जवाबी कार्रवाई, 27 ठिकानों को निशाना बनाने का दावा

ईरान की प्रमुख सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने संयुक्त हमलों के जवाब में कड़ा प्रतिशोध लेने का दावा किया।

IRGC के अनुसार, उसने 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ इजरायल और अमेरिका के सहयोगी हवाई अड्डों व बेसों को निशाना बनाया। ईरान ने स्पष्ट किया कि यह कदम संयुक्त हवाई हमलों का सीधा जवाब है। इस दावे के बाद संघर्ष का दायरा और बढ़ता दिखाई दे रहा है।

सऊदी अरामको की रास तानुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला!

सऊदी में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी सऊदी अरामको पर ईरान ने ड्रोन हमला किया है। न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि सऊदी में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) के रास तानुरा रिफाइनरी के आस-पास एक ड्रोन हमले के बाद उसके संचालन को बंद करना पड़ा। यह रिफाइनरी कच्चे तेल को संसाधित करने वाली मध्य पूर्व की सबसे बड़ी सुविधाओं में से एक है और दुनिया के ऊर्जा निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है। सुविधा को सुरक्षा कारणों से रोका गया और आग या बाकी नुकसान को नियंत्रित करने के लिए उपाय किए गए हैं।

यह हमला ईरान की क्षेत्रीय जवाबी कार्रवाइयों का हिस्सा माना जा रहा है, जिनके कारण खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी मिसाइल या ड्रोन गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं।

जंग में हिजबुल्लाह भी कूदा

लेबनान स्थित हिजबुल्लाह ने भी इस टकराव में खुलकर हस्तक्षेप की घोषणा की। संगठन ने कहा कि उसने रात के समय इजरायल पर रॉकेट और ड्रोन हमले किए।

हिजबुल्लाह ने इन हमलों को खामेनेई की मौत का बदला और इजरायल की कार्रवाई का जवाब बताया। यह पहला मौका माना जा रहा है जब संगठन ने इतने व्यापक स्तर पर सीधे हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की है। इस कदम से लेबनान और इजराइल के बीच पूर्ण युद्ध की आशंका और गहरी हो गई है।


इजराइल ने लेबनान में की एयरस्ट्राइक

सीमा पार हमलों के बाद इजराइल ने लेबनान के विभिन्न हिस्सों में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले शुरू किए। इन हमलो में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इन हमलों में 149 लोग घायल भी हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार मृतकों में से करीब दो-तिहाई दक्षिणी लेबनान के थे।

वहं, इजरायली सेना ने कहा कि यह कार्रवाई उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी थी।

जान-माल का किसने कितना नुकसान?

संघर्ष के असर ने दोनों देशों और अमेरिकी सेना को भी सीधे प्रभावित किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में ईरानी सरकारी स्रोतों के हवाले से बताया गया है कि इरान में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हैं। मृतकों में सैन्य कर्मी, अधिकारी और आम नागरिक शामिल हैं। कई इमारतों और नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है।

इजरायल में ईरान की ओर से हुए मिसाइल हमलों में कम से कम 9 लोगों की मौत हुई है, जबकि 121 से ज्यादा लोग घायल बताए गए हैं। तेल अवीव समेत कई शहरों में इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचा है।

संघर्ष का असर अमेरिकी सेना पर भी पड़ा है। कम से कम 3 अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।


जंग का हवाई सेवाओं पर असर

युद्ध की स्थिति को देखते हुए कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध या निगरानी बढ़ा दी है। नतीजतन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट बदले जा रहे हैं या सेवाएं रद्द की जा रही हैं।

भारत समेत कई देशों ने मध्य पूर्व से गुजरने वाली उड़ानों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।

वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल

संघर्ष का असर वित्तीय बाजारों पर भी साफ दिख रहा है। तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जबकि सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ी है।

निवेशक अस्थिर माहौल को देखते हुए जोखिम भरे निवेश से दूरी बना रहे हैं।


मानवीय संकट गहराया

संघर्ष का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। प्रभावित इलाकों से लोगों का पलायन शुरू हो गया है। घरों, बाजारों और सार्वजनिक ढांचे को नुकसान पहुंचा है।

अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव है। अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां हालात पर नजर रखे हुए हैं।

किस ओर जा रहा है जंग?

जानकारों का मानना है कि अगर मौजूदा स्थिति पर जल्द काबू नहीं हुआ तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। अन्य देशों के सीधे तौर पर शामिल होने की आशंका भी जताई जा रही है।

सैन्य कार्रवाई, राजनीतिक बयानबाजी और वैश्विक प्रतिक्रियाओं के बीच मध्य पूर्व का भविष्य फिलहाल अनिश्चितता से घिरा हुआ है। घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। मौजूदा हालात को देखा जाए तो स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

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Published: 02 Mar 2026, 2:27 PM