ईरान के सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई बेहोश, इस शहर में चल रहा इलाज?, ट्रंप की बर्बादी वाली धमकी के बीच चौंकाने वाली रिपोर्ट

ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई बेहोश हैं। ईरान के कोम शहर के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

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ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर एक खुफिया जानकारी में बड़ा दावा किया गया है। बताया गया है कि वे गंभीर रूप से घायल हैं और इस समय कोम शहर में उनका उपचार चल रहा है। जानकारी के अनुसार वे अचेत अवस्था में हैं और इसी कारण शासन से जुड़े किसी महत्वपूर्ण निर्णय में भाग लेने की स्थिति में नहीं हैं।

ब्रिटेन के एक प्रमुख समाचार पत्र द टाइम्स में प्रकाशित जानकारी के अनुसार यह विवरण एक कूटनीतिक दस्तावेज पर आधारित है, जिसे अमेरिकी और इस्राइली खुफिया एजेंसियों ने खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ साझा किया था। इसमें पहली बार यह दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई कोम शहर में उपचाराधीन हैं और इसी कारण वे शासन की निर्णय प्रक्रिया से दूर हैं।

सार्वजनिक रूप से नजर न आने से बढ़ी आशंका

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से मोजतबा खामेनेई की कोई सार्वजनिक उपस्थिति सामने नहीं आई है। हालांकि उनके नाम से संदेश ईरान के सरकारी माध्यमों द्वारा प्रसारित किए जा रहे हैं। उनकी लगातार अनुपस्थिति ने उनके गंभीर रूप से घायल होने की आशंका को और मजबूत किया है।

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश की कमान सर्वोच्च नेता के हाथों में ही है। इसके बावजूद कई विदेशी समाचार स्रोतों में उनकी सेहत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ स्थानों पर उनके अचेत अवस्था में होने की बात कही गई है, जबकि एक अन्य समाचार में यह भी दावा किया गया कि हमलों के दौरान उन्हें गंभीर शारीरिक क्षति पहुंची है।

चेतावनी के बीच सामने आई जानकारी

यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान को मंगलवार रात आठ बजे तक समझौता करने की समयसीमा दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि तय समयसीमा के बाद पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के समय ईरान मजबूत स्थिति में था, लेकिन अब उसकी ताकत काफी हद तक कमजोर हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कदम कई दशक पहले ही उठाए जाने चाहिए थे और उनका देश लंबे समय से इस मुद्दे से जूझ रहा है।

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