ईरान के मुद्दे पर UN में अमेरिका को रूस-चीन का झटका, निगरानी पैनल बढ़ाने का प्रस्ताव वीटो

रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान पर प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञ पैनल का कार्यकाल बढ़ाने के अमेरिकी प्रस्ताव को वीटो कर दिया है।

फोटो: सोशल मीडिया
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  • रूस और चीन ने UN में ईरान पर प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले विशेषज्ञ पैनल का कार्यकाल बढ़ाने के अमेरिकी प्रस्ताव को वीटो किया।

  • सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव 11-2 से खारिज हुआ, जबकि पाकिस्तान और सोमालिया ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

  • वीटो के बावजूद ईरान पर लगे प्रतिबंध खत्म नहीं हुए हैं और वे अभी भी लागू हैं।

  • ईरान ने रूस और चीन के फैसले का स्वागत किया, जबकि अमेरिका और फ्रांस ने निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंता जताई।

रूस और चीन ने ईरान के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। दोनों देशों ने उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया, जिसमें ईरान पर लगे प्रतिबंधों की निगरानी के लिए काम कर रहे संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल एक साल और बढ़ाने की बात कही गई थी। अमेरिका ने यह प्रस्ताव पेश किया था। वोटिंग में प्रस्ताव 11-2 से खारिज हो गया। पाकिस्तान और सोमालिया ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

हालांकि, रूस और चीन के वीटो का मतलब यह नहीं है कि ईरान पर लगे प्रतिबंध खत्म हो गए हैं। प्रतिबंध अभी भी लागू हैं। इनके तहत विदेशों में मौजूद ईरान की संपत्तियों को फ्रीज करना, हथियारों से जुड़े सौदों पर रोक और उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से संबंधित गतिविधियों पर कार्रवाई जैसे कदम शामिल हैं। यानी विवाद फिलहाल प्रतिबंधों को हटाने का नहीं, बल्कि उनकी निगरानी के लिए संयुक्त राष्ट्र के तंत्र को आगे जारी रखने का है।

कैसे दोबारा लागू हुए ईरान पर प्रतिबंध

ईरान पर ये प्रतिबंध 27 सितंबर 2025 को दोबारा लागू किए गए थे। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते में मौजूद 'स्नैपबैक' प्रावधान का इस्तेमाल किया था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति को फिर से सक्रिय किया गया और प्रतिबंधों की निगरानी के लिए UN विशेषज्ञों के पैनल को मंजूरी मिली।

अमेरिका इसी पैनल का कार्यकाल एक साल और बढ़ाना चाहता था। लेकिन रूस ने इस प्रस्ताव के कानूनी आधार पर ही सवाल उठा दिया। रूस के UN राजदूत वासिली नेबेंज़िया ने कहा कि 'स्नैपबैक' के जरिए ईरान पर प्रतिबंध दोबारा लगाना ही कानूनी नहीं था। उनके मुताबिक, ऐसे में विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल बढ़ाने वाला प्रस्ताव भी कानूनी आधार के बिना था। रूस और चीन के वीटो के कारण अमेरिका का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।


अमेरिका ने वीटो पर उठाए सवाल, ईरान ने जताया स्वागत

अमेरिका ने रूस और चीन के फैसले पर सवाल उठाए। UN में अमेरिकी उप राजदूत जेनिफर लोकेटा ने कहा कि विशेषज्ञों का पैनल ईरान और उसके सहयोगियों के बीच प्रतिबंधों के तहत प्रतिबंधित सहयोग को सामने ला सकता था। उन्होंने कहा कि पैनल के बिना प्रतिबंधों के उल्लंघन पर स्वतंत्र और सबूतों पर आधारित रिपोर्टिंग में कमी आएगी।

दूसरी ओर, ईरान ने रूस और चीन के वीटो का स्वागत किया। ईरान के UN मिशन ने दोनों देशों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों की कोशिश को रोक दिया। वहीं, फ्रांस ने कहा कि ईरान पर प्रतिबंधों को लागू करना जरूरी है, ताकि तेहरान अपने परमाणु दायित्वों पर वापस लौटे। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका के साथ एक अलग निगरानी व्यवस्था बनाने का विकल्प भी सामने रखा गया है।

सुरक्षा परिषद में हुए इस घटनाक्रम से ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और रूस-चीन के बीच बढ़ता मतभेद साफ दिखाई देता है। प्रतिबंध फिलहाल जारी हैं, लेकिन उनकी निगरानी के लिए संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा तंत्र को आगे बढ़ाने की अमेरिकी कोशिश को रूस और चीन ने वीटो के जरिए रोक दिया है।