केन्या: ईसा मसीह से मिलने के लिए मरने तक भूखे रहो..., कल्ट लीडर के भक्त अब भी नहीं खा रहे खाना, 318 लाशें मिलीं

केन्या में एक पादरी ने अपने अनुयायियों से कहा कि "ईसा मसीह" से मिलने के लिए मरने तक भूखे रहो। इस मामले में मृतकों की संख्या 318 हो गई है। कम-से-कम 613 लोग अब भी गुमशुदा हैं। कई अनुयायी अब भी खाने को तैयार नहीं हैं।

फोटो: DW
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डॉयचे वेले

जांचकर्ताओं ने पिछले हफ्ते तलाशी का इलाका बढ़ाया था। इसके बाद शाकाहोला जंगल में सामूहिक कब्रों से कई और लाशें निकाली गईं। मृतकों की संख्या 318 हो गई है. कम-से-कम 613 लोग अब भी लापता हैं।

जिन 95 अनुयायियों को बचाया गया है, उनमें से करीब 65 लोग बचाव केंद्र में देखभाल किए जाने के दौरान भी खाना ना खाने पर अड़े हैं। उन पर आत्महत्या का केस दर्ज किया गया है। केन्या के कानून में आत्महत्या की कोशिश अपराध है और इसके लिए दो साल तक की सजा हो सकती है। 15 जून को मोम्बासा शहर की अदालत में उनकी पेशी हुई।

जज ने देश के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सलाह पर उन्हें जेल ना भेजकर वापस बचाव केंद्र भेज दिया। आयोग ने इस मामले में आत्महत्या की कोशिश का केस दर्ज करने की आलोचना की थी। आयोग का कहना था कि वे पीड़ित हैं और सरकार को चाहिए कि सजा देने की जगह उन्हें मानसिक और मनोवैज्ञानिक मदद मुहैया कराए।

केन्या: ईसा मसीह से मिलने के लिए मरने तक भूखे रहो..., कल्ट लीडर के भक्त अब भी नहीं खा रहे खाना, 318 लाशें मिलीं

अप्रैल 2023 में सुर्खियों में आया केस

मामला जुड़ा है पॉल मैकेंजी नाम के एक पादरी और कल्ट लीडर से पॉल पहले टैक्सी चलाता था। 2003 में उसने दक्षिणपूर्वी केन्या मालिंडी शहर में अपना एक चर्च बनाया। इसका नाम रखा, गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च। उसके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी। 2019 में पॉल ने मालिंडी स्थित अपना चर्च बंद किया और कुछ अनुयायियों के साथ शाकाहोला जंगल चला आया। यह मालिंडी के ही पास हिंद महासागर की तटीय रेखा पर करीब 800 एकड़ में फैला जंगल है।

पॉल अपने अनुयायियों से कहता था कि उसमें दिव्य शक्तियां हैं और वह भविष्य देख सकता है। उसने कहा कि उसे ईसा मसीह का आभासी दर्शन हुआ है। आरोप है कि पॉल ने अपने अनुयायियों से नौकरी छोड़ने, स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई छोड़ देने और सांसारिक काम छोड़ देने का निर्देश दिया। इल्जाम है कि उसने अपने भक्तों से खाना छोड़ देने को कहा।

केन्या पुलिस के मुताबिक, पॉल ने अपने भक्तों से कहा कि उपवास तभी काम करेगा जब वे सभी साथ मिलकर ऐसा करेंगे। आरोप है कि पॉल ने लोगों को शाकाहोला जंगल के अपने फार्म पर बुलाया और कहा कि बाहर की दुनिया में किसी से नाता ना रखें। अधिकारियों के मुताबिक, पॉल ने अपने अनुयायियों से कहा था कि 15 अप्रैल को दुनिया खत्म हो जाएगी, तो अगर वे सबसे पहले स्वर्ग पहुंचने वालों में शामिल होना चाहते हैं, तो खुद को मार डालें।


कैसे खुला मामला

खबरों के मुताबिक, मार्च 2023 में किसी ने पुलिस को इस मामले की जानकारी दी। इसी क्रम में पुलिस को दो बच्चों के मारे जाने की सूचना मिली। बच्चों की मां पॉल के चर्च की सदस्य है। आरोप है कि पॉल के कहने पर बच्चों के माता-पिता ने पहले उन्हें भूखा रखा। फिर मां ने "ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए" दम घोटकर उन्हें मार डाला। तीनों आरोपियों ने कथित तौर पर 16 और 17 मार्च को शाकाहोला गांव में उनकी लाश को दफना दिया।

इसी केस की गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस तफ्तीश के लिए शाकाहोला जंगल में इस समूह के ठिकाने पर पहुंची और यह भीषण मामला सामने आया। जिन दो बच्चों की मौत हुई थी, उनके तीसरे सहोदर को बचाने में पुलिस सफल रही। शुरुआत में यह मामला दो बच्चों की मौत से जुड़ा लग रहा था। 23 मार्च को जब पुलिस ने पॉल को कोर्ट में पेश किया, तब भी उस पर दो बच्चों को मरने तक भूखा रहने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया गया। लेकिन तब उसे जमानत पर छोड़ दिया गया। आरोप है कि छूटने के बाद पॉल वापस जंगल लौटा और पहले की तरह सक्रिय रहा।

आने वाले दिनों में पुलिस को जंगल में कब्रें मिली। मृतकों की गिनती बढ़ने लगी। यह आशंका मजबूत होती गई कि मृतकों की संख्या शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा हो सकती है। जांच का दायरा बढ़ाया गया, ज्यादा कब्रें मिलती गईं। मृतकों में कई बच्चे थे। इसके अलावा जंगल में भूख से मौत की कगार पर पहुंच चुके कई लोग भी मिले, जिन्हें अस्पताल भेजा गया।

जंगल को स्मारक बनाया जाएगा

मई के पहले हफ्ते तक 100 से भी ज्यादा लोगों के शव निकाले जा चुके थे। ज्यादातर मामलों में मौत की वजह भूख थी, लेकिन कुछ मौतें सांस रोके जाने और दम घुटने से भी हुई थीं। 5 मई को केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने एक जांच आयोग का गठन किया। तब से अब तक 318 शव मिल चुके हैं। इस घटना से केन्या स्तब्ध है। सरकार ने कहा है कि वह शाकाहोला जंगल को स्मारक घोषित करेगी।

आंतरिक और प्रशासकीय मामलों के कैबिनेट सेक्रेटरी प्रोफेसर किथूरे किंडिकी ने 8 जून को कहा, "यह ऐसी जगह नहीं, जहां फिर खेती हो सके या कोई इंसानी गतिविधि की जा सके क्योंकि जिन भाईयों और बहनों, वयस्कों और बच्चों को हमने खोया है, उनकी आत्माओं को कहीं ज्यादा गरिमा की जरूरत है।" उन्होंने यह भी कहा कि यह स्मारक सुनिश्चित करेगा कि केन्या और बाकी दुनिया "इंसानियत पर हुए इस अत्याचार" को कभी ना भूले।

राष्ट्रपति रूटो ने कहा है कि शाकाहोला में जो हुआ, वो "आतंकवाद" के समान है। आंतरिक मंत्री ने कहा कि हालांकि सरकार लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करती है, लेकिन इस घटना के मद्देनजर चर्चों, मस्जिदों, मंदिरों समेत सभी धार्मिक जमावड़ों के लिए सख्त नियम बनाए जाएंगे। मगर इस घटना को लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस-प्रशासन की आलोचना भी हो रही है। सवाल पूछा जा रहा है इतने समय तक इस स्तर पर भीषण और संगठित अपराध होता रहा और किसी को पता नहीं चला।

पॉल मैकेंजी फिलहाल जेल में है। उसपर भरोसा करने वाले कई पीड़ित अनुयायी जहां अब भी खाने को तैयार नहीं हैं, वहीं मैकेंजी खाना खा रहा है। आतंरिक मंत्रालय का कहना है कि पॉल के खिलाफ बहुत मजबूत मामला है और यह साबित हो जाएगा कि पॉल और अन्य आरोपियों ने "इंसानियत के खिलाफ अपराध" किए हैं।

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