नेपाल 'जल प्रलय': अबतक 160 से ज्यादा लोगों की मौत, 750 से ज्यादा लापता, तबाही के बाद यूपी-बिहार में हाई अलर्ट
नेपाल में आए इस प्राकृतिक आपदा में 160 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में सुरक्षाकर्मी और पर्यटक भी शामिल हैं।

नेपाल के तीन जिलों में भोटेकोसी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में 160 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में सुरक्षाकर्मी और पर्यटक भी शामिल हैं। प्रशासन की ओर से मृतकों की पहचान का काम जारी है। बाढ़ के तेज बहाव ने नेपाल के कई इलाकों में परिवहन और संपर्क व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए हैं। इसके चलते कई क्षेत्रों का संपर्क दूसरे इलाकों से टूट गया है और राहत एवं बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं।
इस आपदा की चपेट में जलविद्युत परियोजनाएं और कई वाहन भी आए हैं। बाढ़ से 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है, जबकि कई वाहन तेज बहाव में बह गए। नेपाल सेना ने प्रभावित इलाकों में अभियान चलाकर 250 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। नेपाल में अब भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। इनमें 139 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 391 पर्यटकों और 44 सुरक्षाकर्मियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। सरकार के मुताबिक, नेपाल सेना के 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 कर्मी और सशस्त्र पुलिस बल के 13 जवानों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है।
बाढ़ ने तिमुरे गांव को सबसे पहले अपनी चपेट में लिया
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, भोटेकोसी नदी की सहायक नदी ल्हेन्डे का प्रवाह हिमस्खलन के कारण रुक गया था। इसके बाद अचानक पानी का दबाव बढ़ा और बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र के तिमुरे गांव को सबसे पहले अपनी चपेट में लिया। इस घटना की सबसे बड़ी वजह यह रही कि बाढ़ से पहले इलाके में बारिश नहीं हुई थी। ऐसे में स्थानीय लोगों को अचानक आने वाली इस आपदा का अंदाजा नहीं था। जिस समय बाढ़ आई, उस वक्त लोग अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे और अचानक आए तेज बहाव ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया।
नेपाल में राहत अभियान जारी
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, बाढ़ की सूचना मिलते ही सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित विभागों को खोज, बचाव और राहत अभियान के लिए सक्रिय कर दिया था। नदी किनारे रहने वाले लोगों को समय रहते सतर्क करने के लिए भी कदम उठाए गए। अधिकारियों ने सुबह करीब 9 बजे नदी किनारे के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया।
लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी के आसपास जाने से बचने की अपील की गई। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में बाढ़ से व्यापक नुकसान हुआ है। खास तौर पर रसुवा जिले में सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा चौकियों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। सीमा क्षेत्र में राहत एवं बचाव अभियान को प्राथमिकता दी जा रही है।
भारत ने नेपाल के लिए भेजी राहत सामग्री
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बीच भारत ने राहत और बचाव कार्यों के लिए 10 टन मानवीय सहायता भेजी है। इस राहत सामग्री का इस्तेमाल बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों की मदद के लिए किया जाएगा। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने राहत सामग्री औपचारिक रूप से नेपाल के संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को सौंपी।
भारत ने इस मुश्किल घड़ी में नेपाल को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस कठिन समय में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत राहत और बचाव कार्यों में नेपाल की हरसंभव मदद करने के लिए तैयार है।
यूपी और बिहार में भी अलर्ट
नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार में भी प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। दोनों राज्यों में सीमा से आने वाले संभावित जलप्रवाह और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में महाराजगंज और कुशीनगर समेत सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों के प्रशासन को अलर्ट किया गया है। अधिकारियों को स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। बिहार में भी गंडक, नारायणी और कोसी नदियों के जलस्तर की निगरानी की जा रही है। राज्य के छह जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए स्थानीय स्तर पर तैयारियों की समीक्षा कर रहा है।
केंद्र सरकार भी नेपाल की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। गृह मंत्रालय समेत कई केंद्रीय मंत्रालय हालात की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। नेपाल से आने वाले जलप्रवाह और उसके संभावित असर को देखते हुए संबंधित राज्यों और एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए
