दुनिया की खबरें: महामारी की रोकथाम में कैसे जीत मिल सकेगी?, कमला हैरिस ने कहा- भारत की स्थिति बहुत ही दुखद

भारत विश्व में सबसे बड़ा धार्मिक देश है। भारतीय लोगों के लिए अमीर जीवन की अपेक्षा देवताओं में विश्वास करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिये मार्च की शुरूआत में महामारी पर अच्छी तरह नियंत्रण केवल एक कुंभ मेले की वजह से बिल्कुल खत्म हो गया।

फोटो: Getty Images
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नवजीवन डेस्क

हाल ही में कोविड महामारी ने फिर एक बार मानव जाति पर हमला किया, जिससे कई देशों में महामारी की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ गयी है। हालांकि, इसके पीछे की वजह वायरस उत्परिवर्तन है, लेकिन वह महामारी की रोकथाम व नियंत्रण के लिये विभिन्न देशों द्वारा उठाये गये नीति-नियम और कदम भी मायने रखते हैं। महामारी का प्रसार देश की जनसंख्या पर निर्भर करता है, इसलिये इस रिपोर्ट में हम केवल बड़ी जनसंख्या वाले देशों की चर्चा करेंगे। हम सिलसिलेवार आंकड़ों व वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से इस बात का विश्लेषण करेंगे कि महामारी के मुकाबले में किस पर विश्वास करके लोगों को जीत मिल सकेगी?

वर्ष 2021 में जारी विश्व जनसंख्या के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चीन 1.4 अरब की कुल जनसंख्या के साथ विश्व में पहले स्थान पर है, जबकि भारत 1.3 अरब के साथ दूसरे स्थान पर है और अमेरिका 30 करोड़ के साथ तीसरे स्थान पर है। अगर इन तीनों देशों की जनसंख्या का आकार एक समबाहु त्रिकोण है, तो उनमें कोविड के पुष्ट मामलों की संख्या में एक उल्टा त्रिकोण देखा गया है।

आधिकारिक संस्थाओं द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गत 8 मई की रात आठ बजे तक अमेरिका में कोविड के पुष्ट मामलों की कुल संख्या 33,418,826 है, जो विश्व में पहले स्थान पर है। उनमें मौत के मामलों की कुल संख्या 594,911 है। वहीं, भारत में पुष्ट मामलों की कुल संख्या 21,892,676 है, जो विश्व में दूसरे स्थान पर है। जबकि मौत के मामलों की कुल संख्या 238,270 है। उधर, चीन में पुष्ट मामलों की संख्या केवल 103,784 है, और मौत के मामलों की कुल संख्या सिर्फ़ 4,858 है, जो कि अमेरिका और भारत से कोसों पीछे है।

यह अतुल्य उल्टा त्रिकोण देखकर आम लोगों के दिमाग में शायद यह सवाल पैदा होगा कि आखिर किस कारण से यह परिणाम हासिल हुआ? शायद यह तीनों देशों की जनता की मान्यताओं से जुड़ा हुआ है।

तो हम सबसे पहले अमेरिका की चर्चा करते हैं, जहां महामारी की स्थिति सबसे गंभीर है। ध्यानाकर्षक बात यह है कि जनसंख्या के आकार और घनत्व दोनों के मामले में अमेरिका चीन और भारत से बहुत पीछे है। सामान्य जानकारी के अनुसार, इन तीनों देशों में से अमेरिका को सबसे आसानी से महामारी की रोकथाम करनी चाहिये। लेकिन अमेरिका में महामारी का सबसे असर हुआ, क्योंकि अमेरिकी जनता तथाकथित स्वतंत्रता पहले में विश्वास करती है। उनके ख्याल में मास्क पहनने से उनकी स्वतंत्रता का हनन होता है, फिर घर में पृथक रहना और शहर में लॉकडाउन लगाना तो उनकी समझ से परे है।

यहां तक कि जब अमेरिका में महामारी की स्थिति गंभीर बन हुई थी, तो अमेरिकी जनता मिलन समारोहों, सभाओं, रैलियों और बड़े पैमाने वाले प्रदर्शनों में भाग लेने में व्यस्त थीं। लेकिन इन कार्रवाइयों ने महामारी की रोकथाम व नियंत्रण में बाधाएं डालीं। वास्तव में यह तथाकथित 'स्वतंत्रता' स्वार्थ की एक अभिव्यक्ति है।

अब हम भारत की चर्चा करते हैं। सब लोग जानते हैं कि भारत विश्व में सबसे बड़ा धार्मिक देश है। भारतीय लोगों के लिए अमीर जीवन की अपेक्षा देवताओं में विश्वास करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिये मार्च की शुरूआत में महामारी पर अच्छी तरह नियंत्रण केवल एक कुंभ मेले की वजह से बिल्कुल खत्म हो गया। 11 अप्रैल को 2.8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने हरिद्वार पहुंचकर हिंदुओं की पवित्र मानी जाने वाली गंगा नदी में स्नान किया।

गौरतलब है कि उन्होंने महामारी की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों का कड़ाई से पालन नहीं किया। परिणामस्वरूप, इसके बाद केवल 72 घंटों में सैकड़ों लोगों में इस बीमारी के लक्षण आने लगे। इसके अलावा, और बहुत से लोग कोविड-19 वायरस की चपेट में आकर अपने-अपने घर लौटे, जो कि एक बहुत भयानक बात है।

अभी हाल ही में 4 मई को भारत के गुजरात राज्य में एक बड़ी धार्मिक गतिविधि का आयोजन हुआ, जहां महामारी की रोकथाम से जुड़ी नीति-नियमों की अवहेलना हुई। हजारों महिलाओं ने इस धार्मिक गतिविधि में भाग लिया। उनमें से अधिकतर लोगों ने मास्क नहीं पहना हुआ था।

अंत में हम विश्व में सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश चीन की चर्चा करते हैं। चीन में न सिर्फ जनसंख्या का आकार बहुत बड़ा है, बल्कि लोगों की तरलता भी तेज है। ये सभी कारक महामारी की रोकथाम व नियंत्रण के लिये बहुत प्रतिकूल हैं। लेकिन चीन को कैसे महामारी के मुकाबले में सफलता मिली? और किस पर विश्वास करके चीनी जनता को प्रोत्साहन मिला?

पहला, महासचिव शी चिनफिंग से केंद्रित चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी ने हमेशा से जनता की जान सुरक्षा और स्वास्थ्य को अपने काम के पहले स्थान पर रखा, और चीनी विशेषता वाली समाजवादी प्रणाली से लाभ उठाकर महामारी की रोकथाम व नियंत्रण के लिये सिलसिलेवार वैज्ञानिक कदम उठाये हैं। चीन के तेज व कारगर कदमों ने न सिर्फ़ महामारी के प्रसार को बंद किया, बल्कि दुनिया को भी आश्चर्यचकित कर दिया।

दूसरा, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अनगिनत सदस्यों ने अपना कर्तव्य निभाया, और महामारी के अग्रिम मोर्चे पर काम किया। जहां मुश्किलें मौजूद हैं, वहां सीपीसी सदस्यों की छवि मिल सकती है। उन्होंने अपने साधारण जीवन से एक-एक प्रभावित वीर कहानियां रचीं। गौरतलब है कि अभी तक सीपीसी के सदस्यों की कुल संख्या 9 करोड़ से अधिक है।

तीसरा, चीनी जनता चीनी कम्युनिस्ट पार्टी व चीन सरकार पर बड़ा विश्वास करती है, और सीपीसी के नेतृत्व का ²ढ़ समर्थन करती है। हर व्यक्ति स्वेच्छा से महामारी की रोकथाम के लिये देश द्वारा उठाये गये कदमों का पालन करता है। चीन में एक कहावत है कि अगर सभी लोग मिलजुल कर एक साथ कोशिश करेंगे, तो पहाड़ को भी हटाया जा सकता है। सभी चीनी जनता का समर्थन व सहायता पाकर चीन ने महामारी के साथ इस लड़ाई में व्यापक जीत प्राप्त की।

वैक्सीन को बौद्धिक संपदा बंधन से मुक्त कराने को स्थगित करने पर आम सहमति : ईयू

स्थानीय समय के अनुसार 8 मई को दो दिन का यूरोपीय संघ सामाजिक शिखर सम्मेलन उत्तरी पुर्तगाल के पोटरे शहर में संपन्न हुआ। यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के नेताओं ने महामारी-रोधी वैक्सीन को बौद्धिक संपदा बंधन से मुक्त कराने को स्थगित करने की आम सहमति जतायी। यूरोपीय संघ की समिति की अध्यक्ष उसुर्ला वॉन डेर लेयेन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, '' यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के नेताओं को लगता है कि वर्तमान में महामारी-रोधी वैक्सीन को बौद्धिक संपदा बंधन से मुक्त कराना सबसे आपातकालीन बात नहीं है। यूरोपीय संघ के सदस्य देश और अन्य आपातकालीन मुद्दों का सामना कर रहे हैं। यूरोपीय संघ में वैक्सीन के उत्पादन में तेजी लाने, वैक्सीन के कुल उत्पादन को बढ़ाना और वैक्सीन का निष्पक्ष और उचित वितरण करना बहुत जरूरी है। वैक्सीन को बौद्धिक संपदा बंधन से मुक्त कराना महत्वपूर्ण है। लेकिन इस बात का निश्चय करने में मध्यम और अल्पावधि के बजाय लंबी अवधि देने की जरूरत है।''

उन्होंने कहा कि वर्तमान तक पूरे यूरोपीय संघ में लगभग 16 करोड लोग वैक्सीन की पहली खुराक ले चुके हैं, जिसका अनुपात यूरोपीय संघ की कुल जनसंख्या में 25 प्रतिशत है। यूरोपीय संघ वैक्सीन का उत्पादन में तेजी ला रहा है। इसीलिए वे यह लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सुनिश्चित कर सकेंगे कि इस जुलाई टीका लेने वाले लोगों का अनुपात यूरोपीय संघ की कुल जनसंख्या में 70 प्रतिशत तक जा पहुंचे।

उन्होंने घोषणा की कि यूरोपीय संघ ने फाइजर कंपनी से वैक्सीन की खरीद पर नये अनुबंध पर हस्ताक्षर किया। इस अनुबंध के अनुसार वर्ष 2023 के अंत तक फाइजर कंपनी यूरोपीय संघ को वैक्सीन की 1.8 अरब खुराक मुहैया कराई जाएगी।

यूरोप की परिषद, यूरोपीय संसद व यूरोपीय आयोग के मुख्य नेताओं और यूरोपीय संघ के 24 सदस्य देशों के नेताओं ने पोटरे में इस शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जबकि जर्मनी की प्रधानमंत्री एंजेला मार्केल समेत 3 देशों के नेताओं ने ऑनलाइन इस सम्मेलन में भाग लिया। इस सम्मेलन के दौरान फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन, इटली के प्रधानमंत्री मारियो खींची और पुर्तगाल के प्रधानमंत्री कोस्टा ने वैक्सीन को बौद्धिक संपदा बंधन से मुक्त कराने को स्थगित करने का समर्थन किया।

भारत की कोविड की स्थिति बहुत ही दुखद है: कमला हैरिस

अमेरिका में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भारत में बिगड़ती कोविड स्थिति पर यह कहते हुए अफसोस जताया कि यह 'दिल टूटने से कम नहीं' था। राज्य के ब्यूरो ऑफ साउथ एंड सेंट्रल एशियन अफेयर्स (एससीए) द्वारा शुक्रवार को आयोजित एक प्रवासी कार्यक्रम में प्रस्तुत संदेश में हैरिस ने कहा, "मेरे परिवार की पीढ़ी भारत से आती है। मेरी मां (श्यामला गोपालन) का जन्म और पालन पोषण भारत में हुआ था। मेरे परिवार के सदस्य आज भी भारत में रहते हैं। भारत का कल्याण अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है।"

"भारत में कोविड संक्रमणों और मौतों का प्रकोप दिल दहलाने से कम नहीं है। आप में से जो लोग प्रियजनों को खो चुके हैं, मैं अपनी गहरी संवेदना भेजती हूं। जैसे ही स्थिति की भयावह प्रकृति स्पष्ट हुई, हमारे प्रशासन ने कार्रवाई की।"

सोमवार, 26 अप्रैल को, राष्ट्रपति जो बिडेन ने हमारे समर्थन की पेशकश करने के लिए प्रधान मंत्री (नरेंद्र मोदी) के साथ बात की। शुक्रवार, 30 अप्रैल तक, अमेरिकी सैन्य सदस्य और नागरिक जमीन राहत देना शुरु कर दिया था।

उन्होंने आगे कहा ''महामारी की शुरूआत में, जब हमारे अस्पताल के बेड कम पड़ गए थे, भारत ने सहायता भेजी थी। और आज, हम आवश्यकता के समय में भारत की मदद करने के लिए ²ढ़ हैं। ''

उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि '' हम भारत के दोस्तों के रूप में, एशियाई क्वाड के सदस्यों के रूप में और वैश्विक समुदाय के हिस्से के रूप में ऐसा करते हैं। मेरा मानना है कि अगर हम राष्ट्रों और क्षेत्रों में एक साथ काम करना जारी रखते हैं, तो हम सभी इसके माध्यम से जुड़े रहेंगे।''

अपने संबोधन में, उन्होंने इंडियास्पोरा और अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन जैसे प्रवासी समूहों को भी स्वीकार किया और कहा कि अमेरिका और भारत के बीच इन्होंने पुल का निर्माण किया है।
उन्होंने ये भी कहा कि पिछले वर्ष, आपने कोविड राहत प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

भारत में कोरोना के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। रविवार को भारत ने नए कोविड मामलों ने चार लाख के आंकड़े को पार कर लिया है, जबकि पिछले 11 दिनों में लगातार 3,000 से अधिक हताहतों की संख्या दर्ज की गई है।

काबुल स्कूल के पास विस्फोट, मरने वालों की संख्या 50 पहुंची

अफगानिस्तान के काबुल के एक स्कूल के पास कार में बम विस्फोट से मरने वालों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है। इसकी जानकरी अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने रविवार को दी है। समाचार एजेंसी डीपीए न्यूज एजेंसी ने मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक अरियान के हवाले से बताया कि अफगान राजधानी के एक शिया-हजारा आबादी वाले इलाके, दत्त-ए-बरची में एक स्कूल के पास शनिवार को हुई बमबारी में कम से कम 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

बम विस्फोट में मरने वालो में अधिकांश नागरिकों में स्कूली छात्राएं थी। यह हमला तब हुआ जब बच्चे स्कूल से घर लौट रहे थे। पीड़ितों की संख्या अभी बढ़ सकती है क्योंकि शनिवार देर रात तक एंबुलेंस घायल और मृत लोगों को स्थानांतरित कर रही थी। बमबारी करने वाले छात्रों को व्यापक रूप से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की गई थी।

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