पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बोल पड़े भारी, इजरायल की सख्ती के बाद छाई खामोशी

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के इजरायल विरोधी बयान पर विवाद बढ़ गया है। इजरायल की फटकार के बाद उनके तेवर नरम पड़ गए हैं और खामोशी छा गई है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

राजनीतिक बयानबाजी के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ अपने ही शब्दों में घिर गए हैं। इजरायल को लेकर दिए गए कड़े बयान के बाद अब उनके तेवर अचानक नरम पड़ते नजर आ रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच शांति का मध्यस्थ बताने की कोशिश कर रहा है।

सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने इजरायल को “बुराई” और “इंसानियत के लिए अभिशाप” बताया, साथ ही उसके गठन से जुड़े लोगों पर भी निशाना साधा।

अपने बयान में उन्होंने कहा कि जब इस्लामाबाद में शांति की बातें हो रही हैं, उसी समय लेबनान और गाजा में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। इस बयान में इजरायल के प्रति उनका गुस्सा और नाराजगी साफ झलक रही थी।


इजरायल की कड़ी प्रतिक्रिया

इस बयान के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने सख्त प्रतिक्रिया दी और इसे “आपत्तिजनक” करार दिया। उनका कहना था कि किसी भी सरकार से इस तरह की भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती, खासकर ऐसे देश से जो खुद को निष्पक्ष मध्यस्थ बताता हो।

इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ शांति की बात और दूसरी तरफ ऐसे बयान यह दोहरा रवैया है। उन्होंने दो टूक कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा करना जानता है।

फटकार के बाद खामोशी

इजरायल की इस कड़ी प्रतिक्रिया के बाद ख्वाजा आसिफ की ओर से अचानक खामोशी देखी जा रही है। जो मंत्री पहले लगातार पोस्ट कर रहे थे, अब उनकी तरफ से कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


पाकिस्तान की छवि पर सवाल

यह पूरा विवाद पाकिस्तान के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। एक ओर वह अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के संघर्षविराम का श्रेय लेना चाहता है। वहीं, दूसरी ओर उसके मंत्री के बयान ने उसकी छवि को नुकसान पहुंचाया है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बयानबाजी का असर आने वाली शांति वार्ता पर पड़ेगा? इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसे पाकिस्तान का यह रवैया स्वीकार नहीं है। ऐसे में नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान सरकार इस मामले पर आगे क्या रुख अपनाती है।

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