पीओके में हिंसा की आग: लॉन्ग मार्च पर गोलियां, 20 से अधिक लोगों की मौत, मानवाधिकार उल्लंघन पर उठे सवाल
POK में लॉन्ग मार्च के दौरान हिंसा में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बाद मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे और UN से हस्तक्षेप की मांग उठी।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के लॉन्ग मार्च के दौरान कम से कम 20 लोग मारे गए और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना इस इलाके में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी अधिकारियों की बढ़ती कार्रवाई के बीच हुई।
मरने वालों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि घायलों में से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में डिटेल्स शेयर करते हुए जेएएसी ने कहा, "लॉन्ग मार्च का कारवां रावलकोट शहर पहुंच गया है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, 19 मृतकों की पहचान की पुष्टि हो गई है, जबकि एक व्यक्ति के पास पहचान के दस्तावेज नहीं थे और उसके सिर में गोली लगी थी। उसका शव पलांद्री अस्पताल में है। इस तरह कुल मौतों की संख्या कम से कम 20 हो गई है। बाकी विवरण बाद में साझा किए जाएंगे।"
रावलकोट में जुटे प्रदर्शनकारी, आगे की रणनीति का करेंगे ऐलान
जेएएसी ने आगे बताया, "प्रदर्शनकारी रावलकोट शहर के चांदनी चौक पर मौजूद हैं। दिन निकलते ही शहीद चौक पर एक सभा होगी, जहां आगे की कार्रवाई की घोषणा की जाएगी।"
यह मार्च उस समय शुरू किया गया, जब जेएएसी और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत किसी ऐसे नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर पाते। इसके बाद संगठन ने लोगों से दोबारा सड़कों पर उतरने की अपील की।
मीरपुर से शुरू हुआ था लॉन्ग मार्च
लॉन्ग मार्च की शुरुआत रविवार को मीरपुर डिवीजन से हुई थी। इसके बाद सोमवार को मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ने से पहले प्रदर्शनकारी रावलकोट में धरने के लिए एकत्र हुए।
इसी बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पीओके में बढ़ते मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर आकर्षित किया।
मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप, अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग
रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए संगठन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने सोमवार शाम रावलकोट में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की। आरोप है कि आम नागरिकों पर घातक हथियारों, भारी गोलाबारी, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग किया गया, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए।
हिंसा पर चिंता जताते हुए संगठन ने कहा, "गोलाबारी और घातक हथियारों का इस्तेमाल जारी है, जिससे आम नागरिकों की जान को और अधिक खतरा पैदा हो गया है।"
यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और लोकतांत्रिक देशों की सरकारों से अपील की कि वे पाकिस्तानी सेना द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों, शेलिंग और अत्यधिक बल प्रयोग को तुरंत रोकने के लिए हस्तक्षेप करें।
पीओके में लगातार बढ़ रहा तनाव
पीओके में जारी प्रदर्शन इस्लामाबाद के लंबे समय से चले आ रहे नियंत्रण के लिए सीधी चुनौती बनकर उभरे हैं। आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने बार-बार सख्त कार्रवाई की है, जिसमें कई आम नागरिक मारे गए और घायल हुए हैं। वहीं पूरा इलाका अभी भी कड़ी नाकाबंदी, कर्फ्यू और संचार सेवाओं के व्यापक ब्लैकआउट के बीच है।
भारत ने पहले भी उठाया था मुद्दा
पिछले महीने भारत ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा था कि वह पीओके में प्रदर्शनकारियों पर हो रही कार्रवाई के दौरान अपनी गलतियों और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने के लिए फेक न्यूज और भ्रामक वीडियो फैलाने की कोशिश कर रहा है।
साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।
पीओके में जारी विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई से जुड़े सवाल पर रणधीर जायसवाल ने कहा, "पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की बर्बरता की खबरें हैं, जिसमें कई लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके गलत कामों के लिए जवाबदेह ठहराएगी।"
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