पंजशीर के विद्रोही गुट ने तालिबान के कब्जे के दावे का किया खंडन, मसूद ने कहा- खून की आखिरी बूंद तक लड़ेंगे

इससे पहले तालिबान की ओर से प्रवक्ता और कार्यवाहक संस्कृति एवं सूचना मंत्री जबीउल्लाह मुजाहिद ने एक बयान में कहा था कि राष्ट्रव्यापी सुरक्षा की स्थापना के उनके प्रयास सफल रहे हैं और पंजशीर प्रांत को अल्लाह की मदद और लोगों के समर्थन से हासिल कर लिया गया है।

फाइल फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

अफगानिस्तान में पंजशीर घाटी के विद्रोही गुट ने तालिबान की ओर से प्रांत पर कब्जा करने के दावों का खंडन किया है। तालिबान से लोहा ले रहे नॉर्दर्न अलायंस के प्रमुख अहमद मसूद ने सोमवार को एक ऑडियो संदेश जारी कर कहा कि खून के आखिरी बूंद तक लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से तालिबान के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है।

नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट (एनआरएफ) ने भी एक ट्वीट में कहा, "तालिबान का पंजशीर पर कब्जा करने का दावा झूठा है। एनआरएफ बल लड़ाई जारी रखने के लिए घाटी में सभी रणनीतिक मोर्चे पर मौजूद हैं। हम अफगानिस्तान के लोगों को आश्वस्त करते हैं कि तालिबान और उनके सहयोगियों के खिलाफ संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक न्याय और स्वतंत्रता नहीं मिलती।


इससे पहले तालिबान की ओर से दावा किया गया था कि तालिबानी लड़ाकों ने देश के आखिरी होल्डआउट पंजशीर प्रांत पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। खामा न्यूज ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि कार्यवाहक संस्कृति और सूचना मंत्री एवं तालिबान के प्रवक्ता, जबीउल्लाह मुजाहिद ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रव्यापी सुरक्षा की स्थापना के उनके प्रयास सफल रहे हैं और प्रांत को अल्लाह की मदद और लोगों के समर्थन से हासिल कर लिया गया है।

जबीउल्लाह मुजाहिद के बयान के अनुसार, कुछ प्रतिरोधी बल मारे गए हैं, जबकि अन्य प्रांत छोड़कर भाग गए हैं। बयान में कहा गया है, हम पंजशीर के लोगों को भेदभावपूर्ण व्यवहार के अधीन नहीं होने का आश्वासन देते हैं, वे हमारे भाई हैं और संयुक्त रूप से अफगानिस्तान के विकास के लिए काम करेंगे।


गौरतलब है कि पंजशीर प्रांत में पिछले सात दिनों से तालिबान और विद्रोही गुटों के बीच भारी संघर्ष हो रहा है, जिसके दौरान दोनों पक्षों के काफी लोग हताहत हुए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजशीर प्रांत में रविवार रात के संघर्ष में विद्रोही गुट के एक प्रमुख कमांडर जनरल अब्दुल वोदोद और सेना के प्रवक्ता फहीम दशती मारे गए। इससे पहले, प्रतिरोधी बल के सह-नेता अहमद मसूद ने तालिबान के साथ बातचीत की पेशकश की थी, जिसे तालिबान ने अस्वीकार कर दिया था।

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