कोरोना संकट के बीच काबुल में गुरुद्वारे पर आतंकी हमला, 27 श्रद्धालुओं की मौत, सिख संस्थाओं ने की निंदा

सर्वोच्च सिख संस्थाओं ने अफगानिस्तान के काबुल में गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। एसजीपीसी के अध्यक्ष भाईगोबिंद सिंह और श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि गुरुद्वारे पर हमले की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

दुनिया भर में कोरोना वायरस ने कोहराम मचा रखा ही। इस संकट के बीच अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारे पर आतंकवादी ने हमला बोला है। खबरों के मुताबिक, इस फिदायीन हमले में 27 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। बतया जा रहा है कि घटना सुबह 7.30 बजे हुआ, तब यहां सिख समुदाय के सैकड़ों लोग प्रार्थना के लिए जुटे थे। इस घटना के बाद सुरक्षाबलों ने गुरुद्वारे की घेराबंदी कर जवाबी कार्रवाई की और 4 आतंकियों को मार गिराया। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने ली है। बता दें कि अफगानिस्तान में करीब 300 सिख परिवार रहते हैं।

इस हमले घटना को लेकर भारत ने निंदा की है। कोरोना संकट के बीच अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लोगों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी ने बात किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज काबुल में गुरुद्वारे में हुए आतंकी हमले से मन काफी दुखी है। मैं इस हमले में मारे गए सभी लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। वहीं विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘कोरोना वायरस महामारी के समय में अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थानों पर इस तरह के कायरतापूर्ण हमले, अपराधियों और उनके आकाओं की शैतानी मानसिकता दिखाते हैं।”

कोरोना संकट के बीच काबुल में गुरुद्वारे पर आतंकी हमला, 27 श्रद्धालुओं की मौत, सिख संस्थाओं ने की निंदा

सर्वोच्च सिख संस्थाओं ने अफगानिस्तान स्थित पुराने काबुल शहर गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह और श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा है कि गुरुद्वारे पर हमले की जितनी निंदा की जाए उतनी कम है। कोरोना वायरस के चलते वैसे भी विश्वस्तरीय संकट छाया हुआ है निरंतर और गहरा रहा है। ऐसे में यह वहशी हरकत बेहद अमानवीय, अतिनिंदनीय है।

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा, “इस आतंकी हमले के लिए किसी कौम या समुदाय को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता, वे सिर्फ आतंकी होते हैं।” उन्होंने कहा, “यह बड़ी चिंता का विषय है कि जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैल चुकी है और फिर भी गोलीबारी जारी है।”

उधर एसजीपीसी अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल के मुताबिक उन्हें अफगानिस्तान के सिख सांसद नरेंद्र सिंह खालसा ने फोन पर जानकारी दी है कि अफगान सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। हमले में अब तक गुरुद्वारा साहिब में मौजूद 11 से ज्यादा (उस समय जब बात हुई थी)श्रद्धालु मारे जा चुके हैं और कई अन्य घायल हैं। गुरुद्वारे में मौजूद लोगों की तादाद तकरीबन 150 है।

हालांकि आतंकवादी हमले की सूचना मिलते ही अफगानिस्तान के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वहां फौरन सुरक्षा बल भेजे। उन्होंने आतंकवादियों को चौतरफा घेर लिया है। काबुल में रहते एक सिख व्यापारी सुखविंदर सिंह फौजी ने फोन पर जानकारी दी है कि उनकी सूचना के मुताबिक दोनों तरफ से जबरदस्त गोलीबारी चल रही है। इस हमले के बाद अफगानिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यक नए सिरे से दहशत में हैं। अफगानिस्तान के गुरुद्वारों, मंदिरों और अन्य इबादतगाहों पर पहले भी आतंकी हमले हो चुके हैं। मौजूदा हमले में तालिबान का हाथ बताया जा रहा है। मार्च के शुरू में अफगान में अल्पसंख्यक माने जाने वाले शिया मुसलमानों को निशाना बनाकर 32 बेगुनाहों की जान ले ली गई थी।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में हिंदुओं और सिखों सहित अन्य अल्पसंख्यकों पर अक्सर हमले होते रहे हैं। 90 के दशक में जब अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत थी तब हमलों और ज्यादतियों में इजाफा हो गया था। बाद में यह कम हुआ। लेकिन इन दिनों फिर जोरों पर है। जुलाई 2018 में हिंदुओं-सिखों का एक शिष्टमंडल अफगानिस्तान के राष्ट्रपति से मिलने जा रहा था, तब उस पर आतंकी हमला किया गया और उसमें 19 व्यक्ति मारे गए। पुराने काबुल शहर में हुए गुरुद्वारा साहिब पर हमले के बाद अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों में गहरी दहशत और रोष है। रोष का यह आलम पूरी दुनिया में पाया जा रहा है।

(पंजाब से अमरीक के इनपुट के साथ)

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