‘गेट ऑफ टीयर्स’ बन सकता है नया वैश्विक संकट बिंदु, विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है गंभीर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलडमरूमध्य जल्द ही एक नए वैश्विक तनाव केंद्र के रूप में उभर सकता है, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
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पीटीआई (भाषा)

 वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पश्चिम एशिया संकट के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर पहले से बने दबाव के बीच अब एक और अहम समुद्री मार्ग ‘बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य’ को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलडमरूमध्य जल्द ही एक नए वैश्विक तनाव केंद्र के रूप में उभर सकता है, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस के परिवहन का प्रमुख मार्ग है। ईरान ने खुद पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद इस मार्ग को बंद कर दिया है जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी बीच, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अब बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी संकट का केंद्र बन सकता है।

दरअसल, 28 मार्च को यमन के हूती विद्रोहियों ने इजराइल की ओर मिसाइलें दागीं। यह कदम ईरान-इजराइल संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार उठाया गया है। यमन, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के एक किनारे पर स्थित है और हूती पहले भी लाल सागर में जहाजों पर हमले कर चुके हैं, जिससे 2023 और 2024 में समुद्री यातायात बाधित हुआ था।

हूती विद्रोही यमन के उत्तरी हिस्सों पर नियंत्रण रखते हैं और ईरान समर्थित माने जाते हैं।


खबरों के अनुसार, ईरान ने हूतियों से इस तरह के हमलों के लिए तैयारी करने को कहा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे हिस्से में लगभग 30 किलोमीटर चौड़ा है। यह जलडमरूमध्य यमन और अफ्रीका के देशों इरिट्रिया तथा जिबूती के बीच स्थित है। अरबी में इसका अर्थ ‘आंसुओं का द्वार’ यानी ‘गेट्स ऑफ टियर्स’ है, जो इसके खतरनाक समुद्री हालात को दर्शाता है।

यह जलडमरूमध्य और मिस्र की स्वेज नहर मिलकर भूमध्य सागर और हिंद महासागर के बीच सीधा समुद्री संपर्क स्थापित करते हैं। इसके कारण जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे का लंबा चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है।


सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 14 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, 2025 में प्रतिदिन करीब 42 लाख बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इस मार्ग से गुजरे, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग पांच प्रतिशत है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, लेकिन हमलों का खतरा ही जहाजरानी कंपनियों को वैकल्पिक लंबे मार्ग अपनाने के लिए मजबूर कर सकता है। इससे आपूर्ति श्रृंखलाओं में देरी और लागत में वृद्धि होगी। तनाव बढ़ने पर हालात और बिगड़ सकते हैं।

पिछले अनुभव बताते हैं कि नवंबर 2023 से सितंबर 2024 के बीच लाल सागर क्षेत्र में 67 हमले दर्ज किए गए थे, जिनमें कुछ जहाजों को गंभीर नुकसान भी हुआ। इसके चलते बीमा लागत में भी भारी वृद्धि हुई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों जलडमरूमध्य एक साथ प्रभावित होते हैं, तो यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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