'ईरान ने परमाणु समझौते के ढांचे को दी मंजूरी, अमेरिका ने रद्द किए हमले', ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने परमाणु समझौते के ढांचे को मंजूरी दे दी है। ऐसे में हमले रद्द किए गए हैं, लेकिन नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व स्तर से समझौते के ढांचे को मंजूरी मिल चुकी है, जिसके बाद उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित अमेरिकी हमलों और बमबारी को रद्द करने का फैसला लिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते को अंतिम रूप मिलने तक ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी।
ट्रंप बोले- अंतिम चरण में पहुंची बातचीत
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि ईरान के साथ बातचीत सर्वोच्च स्तर तक पहुंच चुकी है और वहां से मंजूरी भी मिल गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के तौर पर उन्होंने तय किए गए हमलों और बमबारी को रद्द करने का निर्णय लिया है। यह बयान उनके उस पहले के कड़े रुख से बिल्कुल अलग माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरान पर रात में "बहुत जोरदार हमला" करने की चेतावनी दी थी।
ट्रंप ने दावा किया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत अब अंतिम चरण में है और केवल औपचारिक हस्ताक्षर होना बाकी है। उनके अनुसार, समझौते से जुड़े दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं और अगले कुछ दिनों में प्रक्रिया पूरी हो सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हालिया संघर्ष के बाद तेहरान में एक नया नेतृत्व समूह उभरकर सामने आया है।
कई देशों की मंजूरी का दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि बातचीत के सिद्धांत और अंतिम बिंदुओं को सभी संबंधित पक्षों ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने अमेरिका, इजरायल, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और मिस्र समेत कई देशों का नाम लेते हुए कहा कि सभी पक्ष इस व्यवस्था पर सहमत हैं। हालांकि, उन्होंने प्रस्तावित समझौते की शर्तों या बातचीत के प्रमुख मुद्दों के बारे में कोई विशेष जानकारी साझा नहीं की।
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता ने भी इस व्यवस्था को मंजूरी दे दी है, तो उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार, इसका जवाब "हां" है।
नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि समझौते पर औपचारिक मुहर लगने तक अमेरिका ईरान पर अपना समुद्री दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी और समझौते पर हस्ताक्षर कब और कहां होंगे, इसकी घोषणा जल्द की जाएगी।
उन्होंने दावा किया कि हालिया सैन्य दबाव और संघर्ष में ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसके चलते तेहरान समझौते के लिए तैयार हुआ। ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और हवाई रक्षा प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, यही दबाव बातचीत को समझौते की दिशा में ले गया।
परमाणु हथियार रोकना ही मुख्य उद्देश्य
अपने पूरे बयान में ट्रंप ने बार-बार दोहराया कि इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौता यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान किसी भी रूप में परमाणु हथियार न बनाएगा और न ही उसे हासिल करेगा।
ट्रंप ने इसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता बताते हुए कहा कि संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और अब केवल दस्तावेजों को अंतिम रूप देना बाकी है।
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