ट्रंप को सीनेट में बड़ा झटका! ईरान युद्ध पर अपनी ही पार्टी के सांसदों ने छोड़ा साथ, 'वॉर पावर्स एक्ट' बढ़ा आगे

अमेरिकी सीनेट में ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर ईरान युद्ध पर ‘वॉर पावर्स एक्ट’ को आगे बढ़ाया।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

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अमेरिका में ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मंगलवार को अमेरिकी सीनेट में हुए अहम मतदान में चार रिपब्लिकन सांसदों ने ट्रंप का साथ छोड़कर डेमोक्रेट्स के साथ वोट किया। इसके बाद ‘वॉर पावर्स एक्ट’ के तहत ईरान युद्ध में राष्ट्रपति के अधिकारों को सीमित करने वाला प्रस्ताव 50-47 वोटों से आगे बढ़ गया।

इस वोटिंग को ट्रंप के लिए सार्वजनिक राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर राष्ट्रपति को अपनी पार्टी का पूरा समर्थन मिलता है। लेकिन 81 दिनों से जारी ईरान युद्ध और उसके बढ़ते नुकसान ने अब रिपब्लिकन खेमे के भीतर भी असहमति पैदा कर दी है।

किन रिपब्लिकन सांसदों ने ट्रंप के खिलाफ वोट दिया?

केंटकी के सीनेटर रैंड पॉल, मेन की सुसान कॉलिन्स, अलास्का की लिसा मुर्कोव्स्की और लुइसियाना के बिल कैसिडी ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया। वहीं, पेंसिल्वेनिया के डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेट्टरमैन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।

तीन अन्य रिपब्लिकन सांसद वोटिंग में शामिल नहीं हुए। इस तरह की क्रॉस-वोटिंग अमेरिकी राजनीति में बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर राष्ट्रपति के फैसलों पर सवाल खड़ा करती है।


'वॉर पावर्स एक्ट' को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?

डेमोक्रेट्स और युद्ध के आलोचकों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमा पार कर दी है। अमेरिकी ‘वॉर पावर्स एक्ट’ के मुताबिक कोई भी राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना 60 दिनों से ज्यादा समय तक सेना तैनात नहीं रख सकता।

आलोचकों के अनुसार यह समयसीमा 1 मई को ही खत्म हो चुकी थी। हालांकि व्हाइट हाउस का दावा है कि 8 अप्रैल को घोषित सीजफायर के बाद यह समय-सीमा रुक गई थी, जिससे ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए करीब 40 दिन और मिल गए।

हालांकि अमेरिकी नौसेना अब भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी जहाजों की नाकेबंदी के लिए तैनात है। यही वजह है कि विपक्ष लगातार ट्रंप प्रशासन पर सवाल उठा रहा है।

81 दिन के युद्ध ने बढ़ाया दबाव, भारी नुकसान का दावा

28 फरवरी से शुरू हुई इस लड़ाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को प्रभावित किया है। अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचा है। दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी पूरी तरह बंद करना पड़ा है।

पेंटागन के अनुमान के मुताबिक, इस युद्ध पर अमेरिका अब तक 29 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। इसके अलावा सहयोगी देशों के साथ रिश्तों में भी तनाव बढ़ा है। यही कारण है कि अब अमेरिकी संसद के भीतर भी युद्ध को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है।


क्या ट्रंप को सेना वापस बुलानी पड़ेगी?

सीनेट में हुआ यह मतदान फिलहाल ट्रंप को तुरंत सेना वापस बुलाने के लिए मजबूर नहीं करता। लेकिन यह उन सांसदों की बड़ी जीत मानी जा रही है जो राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर नियंत्रण की मांग कर रहे हैं।

‘वॉर पावर्स एक्ट’ को पूरी तरह लागू करने के लिए प्रस्ताव को सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित कराना होगा। फिलहाल दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को मामूली बढ़त हासिल है। हाउस में रिपब्लिकन 217-212 और सीनेट में 53-45 के अंतर से आगे हैं। दो निर्दलीय सीनेटर आमतौर पर डेमोक्रेट्स का समर्थन करते हैं।

कूटनीतिक कोशिशें भी जारी

सियासी टकराव के बीच युद्ध खत्म कराने की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने 14-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें हर्जाने की मांग, तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने अधिकार को मान्यता देने जैसी मांगें शामिल हैं।

इसके जवाब में वॉशिंगटन ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर और कड़ी पाबंदियों की मांग रखी है। अमेरिकी प्रस्ताव में 60 फीसदी एनरिच्ड यूरेनियम के कथित 440 किलोग्राम भंडार का बड़ा हिस्सा सौंपने की शर्त भी शामिल है।

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