ईरानी हमले का खतरा? ट्रंप को लेकर बड़ा खुलासा, फूड ट्रक से गुपचुप सैन्य जेट तक पहुंचाए गए, जानें पूरा मामला

अमेरिका और ईरान तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। सुरक्षा खतरे के चलते डोनाल्ड ट्रंप को तुर्की में फूड ट्रक के जरिए गुपचुप सैन्य विमान तक पहुंचाया गया और उसी से ब्रिटेन ले जाया गया।

फोटो: सोशल मीडिया
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुर्की से ब्रिटेन की यात्रा को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप सार्वजनिक तौर पर एयर फोर्स वन में सवार हुए थे, लेकिन बाद में उन्हें गुपचुप तरीके से एक फूड ट्रक के जरिए दूसरे सैन्य विमान तक पहुंचाया गया। सुरक्षा एजेंसियों को उनके आधिकारिक विमान के खिलाफ ‘विश्वसनीय सुरक्षा खतरे’ की जानकारी मिली थी, जिसके बाद यह पूरा इंतजाम किया गया।

एयर फोर्स वन से फूड ट्रक तक, फिर सैन्य जेट में पहुंचे ट्रंप

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ की सोमवार की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने अंकारा में मीडिया की मौजूदगी के बीच ट्रंप सार्वजनिक रूप से एयर फोर्स वन पर सवार हुए थे। इसके बाद वह और उनके कुछ प्रमुख सहयोगी एक कैटरिंग ट्रक में चले गए। यह ट्रक विमान के दरवाजे के पास ही मौजूद था।

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, ट्रंप को इस फूड ट्रक से एक कार में ले जाया गया। यह ट्रक विमान के निचले हिस्से से जुड़ा हुआ था। इसके बाद उन्हें एक छोटे सी-32ए सैन्य जेट तक पहुंचाया गया। दोनों अखबारों ने नाम न बताने वाले अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप और उनके कुछ करीबी सहयोगी इसी सैन्य विमान से ब्रिटेन के मिल्डेनहॉल वायुसेना अड्डे पहुंचे।


पत्रकारों को भी नहीं थी विमान बदलने की जानकारी

मिल्डेनहॉल पहुंचने के बाद ट्रंप ने यात्रा के अगले हिस्से के लिए कतर की ओर से उपहार में दिए गए विमान में सवार होकर अमेरिका के लिए उड़ान भरी। वहीं एयर फोर्स वन में मौजूद अन्य अधिकारी और पत्रकार पुराने विमान से ब्रिटेन पहुंचे और बाद में ट्रंप के साथ यात्रा में शामिल हुए। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि राष्ट्रपति पहले ही विमान बदल चुके हैं।

विमान में मौजूद पत्रकारों ने बताया कि उड़ान के दौरान उनसे खिड़कियों के पर्दे बंद रखने को कहा गया था। व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्टों की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया। हालांकि व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान सुरक्षा संबंधी चुनौतियां थीं और उनसे निपटने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के कई दुश्मन राष्ट्रपति को निशाना बनाना चाहते हैं और ऐसे खतरों से निपटने के लिए प्रशासन अपने पास मौजूद हर संसाधन का इस्तेमाल करता है।

कतर के विमान की सुरक्षा पर उठे थे सवाल

8 जुलाई को अंकारा में हुए नाटो शिखर सम्मेलन से वापसी के दौरान भी इसी तरह की एक घटना सामने आई थी। उस समय ट्रंप अंकारा की यात्रा के लिए कतर की ओर से उपहार में दिए गए विमान का इस्तेमाल कर रहे थे। ट्रंप इस विमान की शानदार और लग्जरी सुविधाओं की अक्सर तारीफ करते रहे हैं।

लेकिन सीक्रेट सर्विस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों का मानना था कि विमान में जल्दबाजी में किए गए तकनीकी बदलाव उसे पुराने एयर फोर्स वन विमानों के बराबर सुरक्षा नहीं दे पाए थे। इसके बाद ट्रंप को पुराने एयर फोर्स वन में स्थानांतरित किया गया और कतर के विमान को ब्रिटेन भेज दिया गया। इसके बाद ट्रंप को सैन्य जेट के जरिए ले जाया गया।

ट्रंप ने उस समय कहा था कि कतर के विमान को ब्रिटेन इसलिए भेजा गया क्योंकि वहां मौजूद अमेरिकी सैन्यकर्मी उस विमान को देखना चाहते थे। हालांकि रिपोर्टों के मुताबिक, इसके पीछे असली वजह सुरक्षा एजेंसियों को मिली ‘विश्वसनीय खतरे’ की जानकारी थी।


मिसाइल-रोधी सिस्टम और खास वायरिंग नहीं थी

रिपोर्टों के मुताबिक, कतर की ओर से दिए गए विमान में वे मिसाइल-रोधी सुरक्षा प्रणालियां और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हमलों से बचाने वाली विशेष वायरिंग मौजूद नहीं थी, जो पुराने एयर फोर्स वन विमानों में लगाई गई हैं।

बाद में सीक्रेट सर्विस और दूसरे सुरक्षा अधिकारियों ने कथित तौर पर यह भी माना कि पुराना एयर फोर्स वन भी पर्याप्त सुरक्षित नहीं है। इसके बाद ट्रंप को गुप्त रूप से एक सैन्य जेट में ले जाने का फैसला किया गया। यह बोइंग 757 का एक संस्करण है, लेकिन इसमें वे आलीशान सुविधाएं नहीं हैं जिनके लिए ट्रंप जाने जाते हैं।

सुरक्षा रिपोर्ट लीक होने पर पत्रकारों को समन

कतर की ओर से दिए गए विमान की सुरक्षा कमियों को लेकर ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने जब अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट प्रकाशित की, तब अमेरिकी न्याय विभाग ने रिपोर्टरों और उनके रिश्तेदारों, यहां तक कि एक पत्रकार की मां तक को समन भेजकर उनके फोन की मांग की।

अधिकारियों ने इन असामान्य समनों का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद उन लोगों का पता लगाना था जिन्होंने गोपनीय जानकारी लीक की थी। उनका दावा था कि इस लीक से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ी। हालांकि आलोचना बढ़ने के बाद इन समनों को वापस ले लिया गया।

जानकारी लीक होने के आरोपों ने अप्रत्यक्ष रूप से उन सुरक्षा चिंताओं की पुष्टि कर दी, जिनसे जुड़ी खबरों का पहले ट्रंप और अमेरिकी अधिकारियों ने खंडन किया था।

ट्रंप ने कहा था कि उस विमान को सेवा से हटाकर उसमें बड़े स्तर पर तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। पुराने एयर फोर्स वन विमान और कतर की ओर से दिए गए विमान, जिसे भविष्य में एक अन्य एयर फोर्स वन के रूप में इस्तेमाल किया जाना है, दोनों ही बोइंग 747 के अलग-अलग संस्करण हैं।