टाटा, विप्रो, इन्फोसिस समेत कई आईटी कंपनियों को ट्रंप का झटका, अमेरिकी ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से निलंबित
वेंस ने येल, हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और कैलटेक समेत नौ प्रमुख विश्वविद्यालयों द्वारा रिसर्चर के लिए दिए जाने वाले जे-1 वीजा की भी जांच की घोषणा की। वेंस ने कहा कि इन विश्वविद्यालयों में कुछ अजीब हो रहा है। वे इन वीजा का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

अमेरिका ने गुरुवार को कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब समेत आठ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर दिया। अमेरिका ने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था से अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं।
सॉन्डरलिंग ने कहा, ‘‘मैं कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी जैसी दुनिया की कुछ सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर रहा हूं।’’ उन्होंने कहा कि श्रम विभाग ने कई सक्रिय संघीय जांच के कारण माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी इस कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है।
उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से, अमेरिका में ऐसी कोई कंपनी नहीं है जिसने माइक्रोसॉफ्ट से अधिक इस व्यवस्था का दुरुपयोग किया हो।’’ वेंस ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने 2025 में 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया और कहा था कि उसे योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिल सके। इसके बावजूद कंपनी को 6,000 से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर किए गए और उसने स्थायी श्रम प्रमाणन के लिए 3,682 आवेदन किए, जिनमें करीब 1,000 आवेदन उन्हीं पदों के लिए थे, जिन पर नौकरी से निकाले गए अमेरिकी कर्मचारी काम कर रहे थे।
सॉन्डरलिंग ने कहा कि श्रम विभाग इन कंपनियों से जुड़े स्थायी श्रम प्रमाणन के किसी नए आवेदन को स्वीकार नहीं करेगा और लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘2009 से अब तक केवल इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किया है। उन्हें एच-1बी वीजा के 2,30,000 से अधिक अनुमोदन और एक लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणन मिले हैं।’’ सॉन्डरलिंग ने कहा कि इसके कारण अमेरिकी कर्मचारियों के लिए सैकड़ों हजार नौकरियां प्रभावित हुईं।
हर साल मंजूर होने वाले एच-1बी आवेदनों में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है। वेंस ने एच-1बी वीजा पर नियुक्त विदेशी कर्मचारियों के लिए ‘‘विदेशी अनुबंधित श्रमिक’’ और इस कार्यक्रम का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के लिए ‘‘वीजा मिल’’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
वेंस ने येल, हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और कैलटेक समेत नौ प्रमुख विश्वविद्यालयों द्वारा शोधकर्ताओं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले जे-1 वीजा कार्यक्रम की भी जांच की घोषणा की। वेंस ने कहा, ‘‘इन विश्वविद्यालयों में कुछ अजीब हो रहा है। वे इन वीजा का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। वे इनका इस्तेमाल अमेरिकी स्नातक छात्रों और अमेरिकी शोधकर्ताओं के वेतन को कम करने के लिए कर रहे हैं।’’
जे-1 कार्यक्रम के तहत विदेशी नागरिक शोध, शिक्षण, अध्ययन और विशेष पेशेवर कार्यों समेत विभिन्न गतिविधियों के लिए विनिमय आगंतुक के रूप में अमेरिका आ सकते हैं। वेंस ने कहा, ‘‘यह अमेरिकी कर्मचारी और अमेरिकी जीवनशैली का मूलभूत अपमान है। हम ऐसे वीजा कार्यक्रमों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दे सकते, जिन्हें अमेरिकी कंपनियों को सबसे प्रतिभाशाली लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था, लेकिन उनका इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन को कम करने के लिए किया जाए।’’
अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी'एस्पोसिटो ने कहा, ‘‘मुझे परवाह नहीं है कि कोई विश्वविद्यालय कितना प्रतिष्ठित है। अगर कोई विश्वविद्यालय कानून तोड़ता है और अमेरिकी लोगों के हितों के खिलाफ काम करता है, तो मैं विश्वविद्यालय परिसर में खुद आपको हथकड़ी लगा दूंगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे परवाह नहीं है कि आपके पास कितना बड़ा कोष है, आपके पूर्व छात्रों का कितना प्रभाव है या कितने राजनेताओं से आपके सीधे संपर्क हैं। जैसा कि उपराष्ट्रपति ने कहा है, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। इसी वजह से हम वीजा धोखाधड़ी की जांच के लिए एक विशेष कार्यबल बना रहे हैं, जिसमें सरकार के विभिन्न विभागों के जांच विशेषज्ञों को एक साथ लाया जाएगा।’’
