हार के बाद ईरान पर हमला करने वाले थे ट्रंप, सलाहकारों के दखल से टला फैसला

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया है कि पिछले गुरुवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में हुई बैठक में अधिकारियों से ईरान पर हमले के बारे में पूछा था। हालांकि, समय रहते सलाहकारों की राय पर उन्होंने अपना फैसला टाल दिया।

फोटोः सोशल मीडिया
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आसिफ एस खान

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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जो बिडेन के हाथों हार का मुंह देखने वाले राष्ट्रपति ट्रंप पिछले सप्ताह ईरान के मुख्य परमाणु ठिकाने पर हमले का विचार कर रहे थे। हालांकि, समय रहते सलाहकारों की राय पर उन्होंने अपना फैसला टाल दिया। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया है कि पिछले गुरुवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में हुई बैठक में अधिकारियों से इस बारे में पूछा था। उस बैठक में उप राष्ट्रपति माइक पेंस, विदेश मंत्री माइक पोंपिओ, नए रक्षा सचिव क्रिस्टोफर मिलर और चेयरमैन ऑफ जॉइंट स्टाफ जनरल मार्क मिल मौजूद थे।

यह बैठक ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण (आईएईए) के निरीक्षकों द्वारा ईरान के यूरेनियम भंडार के संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) के तहत अनुमति मात्रा से 12 गुना तक बढ़ जाने के दावे के बाद की थी। अधिकारी ने अखबार को पुष्टि की है कि सलाहकारों ने ट्रंप को ईरान पर हमले ना करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा संकट पैदा हो सकता है।

अखबार के अनुसार अधिकारी ने बताया, "बैठक में ट्रंप ने विकल्पों के बारे में पूछा था। इस पर सलाहकारों ने इसके दुष्‍परिणामों के बारे में उन्‍हें बताया और अंत में यह फैसला हुआ कि ईरान पर हमला नहीं किया जाएगा।" हालांकि, फिलहाल इस रिपोर्ट पर व्हाइट हाउस ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। वहीं निर्वाचित राष्ट्रपति जो बिडेन की टीम ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

यहांं बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने शासन के दौरान ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए रखा था। साल 2018 में ट्रंप ने बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका को ईरान के साथ हुए उस परमाणु समझौते से बाहर कर दिया था, जो बराक ओबामा के दौर में हुआ था। इस समझौते पर जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों ने भी हस्ताक्षर किए थे।

इसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच इस साल तनाव तब चरम पर पहुंच गया, जब उसने ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर को हवाई हमले में मार दिया था और देश पर दोबारा कई तरह के कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके जवाब में ईरान ने ट्रंप के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए इंटरपोल में लुकआउट नोटिस भेज दिया था। इसके अलावा ईरान ने आसपास के अमेरिकी सैन्य अड्डे पर फायरिंग भी की थी।

बता दें कि इससे पहले पिछले साल जून के महीने में ट्रंप ने ईरान पर बड़ा हमला करने के लिए पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन हमले के चंद मिनट पहले उन्होंने अपने प्लान को रद्द कर दिया था। उस समय यह स्थिति इसलिए पैदा हुई थी, क्योंकि ईरान ने निशाना लगाकर अमेरिका के एक ड्रोन विमान को मार गिराया था, जिससे तिलमिलाए ट्रंप बदला लेने के लिए ईरान पर हमला कराना चाहते थे।

गौरतलब है कि हाल में आए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बिडेन ने ट्रंप को बड़ी शिकस्त दी है। लेकिन ट्रंप अपनी हार मानने को तैयार नहीं हैं और वह लगातार आरोप लगा रहे हैं कि मतगणना के दौरान काफी धांधली हुई है। वह बार-बार कह रहे हैं कि वे चुनाव हारे नहीं बल्कि जीते हैं। वहीं, जो बिडेन ने ट्रंप के इस हठ की वजह से सत्ता परिवर्तन में होने वाली संभावित देरी को लेकर चिंता जताई है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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