भारत को क्या ट्रंप देंगे बड़ा झटका, लगाएंगे 100% टैरिफ? अमेरिकी संसद में आगे बढ़ा प्रस्ताव

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अमेरिकी प्रस्ताव आगे बढ़ा है, जिसमें भारत को भी संभावित शुल्क के दायरे में रखा गया है।

फोटो: सोशल मीडिया
i

रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिकी दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम, 2026 को आगे बढ़ाया गया है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। इस प्रस्ताव में भारत का नाम भी उन देशों में शामिल है, जिन्हें संभावित शुल्क के दायरे में रखा गया है। हालांकि, बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लग जाएगा। अंतिम फैसला राष्ट्रपति को करना होगा।

सीनेट के बाद प्रतिनिधि सभा में पहुंचा बिल

यह विधेयक अमेरिकी सीनेट से 86-11 मतों से पारित हो चुका है और अब प्रतिनिधि सभा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी सदन की नियम समिति ने 14 सितंबर को इस पर कार्रवाई की। सदन के रिकॉर्ड के मुताबिक, स्टेनी होयर और मार्सी कैप्टर की ओर से प्रस्तावित संशोधन में चीन, भारत, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य को उन देशों की सूची में रखने का प्रस्ताव था, जो रूस के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की खरीद के कारण 100 प्रतिशत तक शुल्क के लिए पात्र हो सकते हैं।

सीनेट से पारित संस्करण में देशों के नाम सीधे नहीं दिए गए थे। उसमें मात्रा के हिसाब से रूस की ऊर्जा के पांच सबसे बड़े आयातकों का उल्लेख किया गया था। बिल का उद्देश्य रूसी नेतृत्व, उसके ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाना है। इसके साथ अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान भी है।


कॉग्निजेंट पर भी अमेरिकी कार्रवाई

इसी बीच अमेरिकी श्रम विभाग ने आईटी कंपनी कॉग्निजेंट को PERM प्रणाली के तहत नए आवेदन करने से रोक दिया है। PERM वह प्रक्रिया है जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू करती हैं। अमेरिकी अधिकारियों को इस व्यवस्था के कथित गलत इस्तेमाल का संदेह है और मामले की जांच की जा रही है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच अमेरिका से बढ़ा LPG आयात

पश्चिमी एशिया में जारी तनाव का असर भारत की एलपीजी आपूर्ति पर भी पड़ा है। पिछले 12 महीनों के आंकड़ों के मुताबिक, संघर्ष के बाद के 6 महीनों में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो गई, जबकि उससे पहले के 6 महीनों में यह 10 प्रतिशत से भी कम थी। इंडियन एक्सप्रेस की शिपिंग डेटा पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, मार्च से अगस्त 2026 के दौरान अमेरिकी आपूर्ति भारत के एलपीजी आयात का करीब 53 प्रतिशत रही।

इस तरह एक तरफ रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर भारत अमेरिकी टैरिफ के संभावित दायरे में है, तो दूसरी तरफ पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच भारत की एलपीजी जरूरतों में अमेरिकी आपूर्ति की भूमिका काफी बढ़ गई है। ऐसे में रूस पर प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंध और पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े बदलाव, दोनों भारत के लिए अहम बने हुए हैं।