कौन हैं भारतीय मूल के ऋषि सुनक, जिन्होंने ब्रिटेन के पीएम पद के लिए पेश की दावेदारी

ऋषि सुनक दिग्गज भारतीय आईटी कंपनी इंफोसिस के को-फाउंडर और दिग्गज कारोबारी नारायण मूर्ति के दामाद हैं जोकि नारायण मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति से कैलिफोर्निया में एक स्टूडेंट के रूप में मिले थे

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

ब्रिटिश सरकार में भारतीय मूल के पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने शुक्रवार को कंजरवेटिव पार्टी के नेता बनने के लिए औपचारिक रूप से अपनी दावेदारी पेश की। यदि वह सफल होते हैं, तो वह स्वत: ही यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बन जाएंगे।

उन्होंने ट्वीट किया, मैं कंजरवेटिव पार्टी का अगला नेता और आपका प्रधानमंत्री बनने के लिए खड़ा हूं। उन्होंने कहा: चलो विश्वास बहाल करें, अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण करें और देश को फिर से जोड़ें। उन्होंने एक वेबसाइट रेडी4ऋषि भी लॉन्च की।

सुनक ने ट्वीट के साथ तीन मिनट का एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने कहा: मैं राजनीति में आया क्योंकि मैं चाहता हूं कि इस देश में सभी को समान अवसर मिले, ताकि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकें।

उन्होंने कहा, "हमारा देश बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो एक पीढ़ी के लिए सबसे गंभीर है। और आज हम जो निर्णय लेते हैं, वे तय करेंगे कि अगली पीढ़ी के ब्रिटिश लोगों के पास बेहतर भविष्य का मौका होगा या नहीं। वह कोविड महामारी के दौरान वित्तीय सहायता प्रदान करके महीनों के भीतर काफी लोकप्रिय हो गए, जिसमें कर्मचारियों को छुट्टी और नियोक्ताओं को आसान ऋण शामिल हैं।


कौन हैं ऋषि सुनक?

  • बोरिस सरकार में वित्त मंत्री रहे ऋषि सुनक को ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है।

  • ऋषि सुनक दिग्गज भारतीय आईटी कंपनी इंफोसिस के को-फाउंडर और दिग्गज कारोबारी नारायण मूर्ति के दामाद हैं जोकि नारायण मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति से कैलिफोर्निया में एक स्टूडेंट के रूप में मिले थे और उनकी दो बेटियां हैं।

  • वह भारतीय माता-पिता यशवीर और ऊषा सुनक के बेटे हैं। उनके पिता यशवीर केन्या में जन्मे और पले बढ़े हैं जबकि उनकी माता ऊषा तंजान्यिका में पैदा हुई थीं जो बाद में तंजानिया का हिस्सा बन गया।

  • सुनक के दादा पंजाब प्रांत के थे, जो अपने बच्चों को लेकर पूर्वी अफ्रीका और फिर ब्रिटेन आ गए थे। सुनक के पिता डॉक्टर और मां दवाखाना चलाती थीं।

  • 42 साल के सुनक को करीब दो साल पहले 2020 में जब बोरिस सरकार में वित्त मंत्री बनाया गया था तो उन्होंने इतिहास रच दिया था।

  • उन्होंने कोरोना के दौरान कारोबारियों और कामगारों की मदद के लिए अरबों रुपये के विशाल पैकेज के पीछे अहम भूमिका निभाई थी। टूरिज्म इंडस्ट्री को 10 हजार करोड़ का पैकेज दिया था।

  • कोरोना के दौर में भी उन्होंने ब्रिटेन में लोगों की मजदूरी नहीं घटने दी थी।

  • हाल ही में अपनी पत्नी के गैर-नागरिक टैक्स स्टेटस को लेकर वह विवादों में घिरे थे। उनकी पत्नी अक्षता पर टैक्स चोरी का आरोप लगा था।

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