भारत से शांति-वार्ता की इमरान खान की पहल से किसी नतीजे की उम्मीद करना क्या जल्दबाजी होगी !

पाकिस्तान में नई सरकार आने के बाद भारत के साथ रिश्तों में कुछ हलचल नजर आ रही है। पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की ओर से मिले एक खत के बाद भारत सरकार ने कहा है कि दोनों देशों के विदेश मंत्री अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में मिलेंगे।

फोटो: सोशल मीडिया 
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भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में कई सालों से तनाव बरकरार हैं। हालांकि पाकिस्तान के आम चुनावों में जीत के बाद इमरान खान ने कहा कि वे भारत से रिश्तों को बेहतर करना चाहते हैं। सितंबर के शुरुआत में उन्हें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश मिला, जिसमें दोनों देशों के बीच सार्थक और रचनात्मक संपर्कों पर जोर दिया गया था।

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ मोहम्मद फैसल ने ट्वीटर पर लिखा, “(पाकिस्तानी) प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को सकारात्मक जवाब भेजा है और उनकी भावनाओं की कद्र की है। चलिए बात करते हैं और सभी मुद्दों को सुलझाते हैं।” उन्होंने कहा, “अब हमें भारत के औपचारिक जवाब का इंतजार है।”

पाकिस्तान की तरफ से पत्र मिलने के बाद भारत ने कहा है कि दोनों देशों के विदेश मंत्री अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मिलेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने हालांकि साफ किया, “यह एक मुलाकात है, बातचीत की बहाली नहीं है। हम सिर्फ बातचीत के लिए सहमत हुए हैं। इसका एजेंडा भी अभी तय नहीं है।”

पाकिस्तान के जियो टीवी के मुताबिक, इमरान खान ने ही दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात का प्रस्ताव रखा था। दरअसल दोनों प्रतिद्वंद्वियों को बातचीत की मेज तक लाना कई साल से टेढी खीर साबित हो रहा है। दोनों देशों के बीच अब तक तीन बड़ी लड़ाइयां हो चुकी हैं और कश्मीर के मुद्दे पर अब भी उनके रिश्ते तनाव का शिकार हैं।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 1997 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल के साथ शांति वार्ता की शुरुआत की थी, लेकिन वह लंबी नहीं चल सकी। इसके बाद पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने 2004 में इस बातचीत को बहाल किया, लेकिन 2008 के मुंबई हमलों के बाद सब कुछ थम गया जिनमें 166 लोग मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों की बातचीत को बहाल करने की कई बार कोशिशें की गईं लेकिन उनका कोई नतीजा नहीं निकला।

प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ दिल्ली गए थे। मोदी ने भी उसी साल दिसंबर में अचानक पाकिस्तान का दौरा किया। लेकिन दोनों के बीच यह गर्मजोशी ज्यादा दिन तक नहीं चल सकी।

कश्मीर समस्या और आतंकवाद के मुद्दे पर मोदी सरकार का रुख सख्त रहा है। यही वजह है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की ओर से पाकिस्तान में सार्क सम्मेलन कराने के प्रस्ताव को भारत ने खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि अभी इस तरह के सम्मेलन के लिए माहौल उचित नहीं है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, “मुलाकात और बातचीत में अंतर समझना होगा। आतंकवाद को लेकर हमारे रुख में इससे कोई बदलाव नहीं आया है।”

‘तब्दीली’ का नारा देकर पाकिस्तान में चुनाव जीतने वाले इमरान खान पड़ोसियों से रिश्ते बेहतर करने की बात कह रहे हैं। लेकिन जल्द किसी बड़ी कामयाबी के आसार नजर नहीं आते। भारत में अगले साल होने वाले चुनावों से पहले पाकिस्तान के साथ रिश्तों को लेकर पर्यवेक्षकों को मोदी सरकार से किसी बड़े फैसले की उम्मीद नहीं है।

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