दुनिया की खबरें: अमेरिका-ईरान ज्ञापन समझौते की 60 दिनों की डेडलाइन खत्म और इंडोनेशिया में भूकंप से 68 लोगों की मौत
ईरानी मीडिया ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को कहा कि अमेरिका द्वारा 18 जून के मेमोरेंडम का बड़ा और बड़े पैमाने पर उल्लंघन किए जाने की वजह से, तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई बातचीत शुरू नहीं हुई।
अमेरिका और ईरान के बीच जो 60 दिनों का समझौता हुआ था, वो खत्म हो गया है। ऐसे में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि जिस हिसाब से अमेरिका ने बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया है, उसके बाद कोई भी चर्चा बेकार है।
ईरानी मीडिया ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को कहा कि अमेरिका द्वारा 18 जून के मेमोरेंडम का बड़ा और बड़े पैमाने पर उल्लंघन किए जाने की वजह से, तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई बातचीत शुरू नहीं हुई। इसकी वजह से 60 दिन की डेडलाइन की चर्चा बेमतलब हो गई।
ईरान वायर के अनुसार, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाघेई ने अमेरिकी-ईरान ज्ञापन में 60 दिन की कड़ी समयसीमा की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “ज्ञापन में 60 दिन की समयसीमा का कोई जिक्र नहीं है और इस्लामी गणराज्य ईरान कभी भी दबाव, अल्टीमेटम या समय की पाबंदी के तहत अपनी नीतियां नहीं बनाता।”
बाघेई के अनुसार, ज्ञापन में केवल 60 दिन की अवधि का जिक्र था ताकि दो मुख्य बिंदुओं, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु मुद्दे, पर चर्चा की जा सके। यदि कोई नतीजा नहीं निकला तो अवधि को बढ़ाया जा सकता है।
ईरान वायर के अनुसार, प्रवक्ता ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच किसी नए मध्यस्थ की भागीदारी के दावों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और कतर अपनी मध्यस्थता जारी रखे हुए हैं। कुछ यूरोपीय देशों ने द्विपक्षीय संपर्कों के दौरान कहा है कि अगर ईरान और अमेरिका चाहें तो हम बातचीत कराने में मदद को तैयार हैं, लेकिन इसका मतलब किसी नए मध्यस्थ को स्वीकार करना नहीं है।
बाघेई ने दावा किया कि ईरान और अमेरिका के बीच मुख्य रुकावट मध्यस्थों की कमी नहीं है, बल्कि वाशिंगटन की सोच, गलत अंदाजा और ऐसी रणनीति पर जोर है, जो पहले विफल हो चुकी हैं।
ट्रंप ने सऊदी अरब-तुर्किये-पाकिस्तान रक्षा समझौते को ‘बड़ा और साहसिक’ कदम बताया
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते को ‘‘बड़ा, साहसिक और महत्वपूर्ण पहला कदम’’ बताते हुए कहा कि इससे ये देश ‘‘अधिक सार्थक तरीके से’’ अपनी रक्षा कर सकेंगे।
सऊदी अरब के शहर मक्का में सात अगस्त को हस्ताक्षरित इस समझौते में सामूहिक प्रतिरोध का ढांचा तैयार किया गया है और इसमें प्रावधान है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
इस समझौते पर सऊदी अरब के शहजादे (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रज्जब तैय्यब एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे।
शरीफ ने सोमवार को तीनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते पर ट्रंप की ‘‘उदार टिप्पणियों’’ की सराहना करते हुए कहा कि पाकिस्तान अपनी तथा पूरे क्षेत्र की रक्षा सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं यह देखकर बहुत खुश हूं कि सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने हाल में और आखिरकार मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह दर्शाता है कि पश्चिम एशिया किस तरह एकजुट हो रहा है और देश आखिरकार किस तरह अधिक सार्थक तरीके से अपनी रक्षा कर सकेंगे।’’
ट्रंप ने कहा, ‘‘उल्लिखित तीनों देशों के महान नेतृत्व को बधाई। यह एक बड़ा, साहसिक और महत्वपूर्ण पहला कदम है-वाह।’’
शरीफ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन के उदार शब्दों की मैं गहरी सराहना करता हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सऊदी अरब के भाईचारे वाले साम्राज्य और तुर्किये गणराज्य के साथ मिलकर पाकिस्तान अपने देशों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की रक्षा करने में रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा।’’
इंडोनेशिया में भूकंप से 68 लोगों की मौत, हजारों लोग राहत के इंतजार में
भीषण भूकंप से प्रभावित इंडोनेशिया में हजारों लोग अब भी राहत सामग्री का इंतजार कर रहे हैं। भूकंप के कुछ दिन बाद भी कई इलाकों में राहत नहीं पहुंच पाई है। इस बीच, देश ने सोमवार को अपना 81वां स्वतंत्रता दिवस मनाया।
इस भूकंप में कम से कम 68 लोगों की मौत हुई है, दर्जनों लोग घायल हो गए और सैकड़ों घरों तथा अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा।
इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में पूरे देश में कार्यक्रम का नेतृत्व किया। साथ ही, उन्होंने लोगों से पूर्वी नुसा तेंगारा और देश के अन्य हिस्सों में आपदाओं से प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना करने को भी कहा।
फ्लोरेस द्वीप पर कई लोग दिनभर शोक मनाते रहे, अपनों की तलाश करते रहे और भूकंप के कारण संपर्क से कटे समुदायों तक राहत पहुंचने का इंतजार करते रहे।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, शनिवार को पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में आए भूकंप से 1,300 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें अकेले फ्लोरेस में करीब 250 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए। करीब 5,000 लोगों को अस्थायी शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा और 135 लोग घायल हुए।
प्रांत के गवर्नर ने रविवार को 14 दिन के लिए आपातकाल की घोषणा की है।
अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार, शनिवार सुबह छह बजे से कुछ पहले भीषण भूकंप आया जो 10 किलोमीटर की गहराई में केंद्रित था। सुनामी की चेतावनी जारी होने के बाद लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। बाद में, चेतावनी वापस ले ली गई। अधिकारियों ने इसके बाद भूकंप के कम से कम 995 झटके दर्ज किए, हालांकि इनमें से केवल 46 झटके लोगों ने महसूस किए।
फ्लोरेस में हजारों लोगों ने क्षतिग्रस्त मकानों के बाहर तिरपाल से बने तंबुओं में रात बिताई।
एसोसिएटेड प्रेस के एक फोटो पत्रकार ने द्वीप के कई हिस्सों में व्यापक तबाही देखी। पेड़ गिरने से सड़कें अवरुद्ध थीं, भूस्खलन के कारण बड़े-बड़े पत्थर पहाड़ों से नीचे गिर गए और कई मकान पूरी तरह तबाह हो गए। भूकंप के दौरान इमारतों के ढहने से वहां खड़ी कारें भी क्षतिग्रस्त हो गईं।
कई निवासियों के लिए इस आपदा ने वर्ष 1992 में फ्लोरेस में आए शक्तिशाली भूकंप और सुनामी की दर्दनाक यादें ताजा कर दीं। उस आपदा में करीब 2,500 लोगों की मौत हुई थी।
मंगराई रीजेंसी के सबसे अधिक प्रभावित इलाके रियो गांव में कपड़ों का कारोबार करने वाले रशीद जफर ने कहा, ‘‘मेरा घर अब सिर्फ मलबा रह गया है। हमें तत्काल भोजन, दवाओं और साफ पानी की जरूरत है।’’
आपदा प्रभावित क्षेत्र में 3,500 से अधिक सैन्य और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है तथा 275 टन राहत सामग्री क्षेत्र में पहुंचाई जा चुकी है। हालांकि, कई चुनौतियों के कारण कुछ सबसे अधिक प्रभावित समुदायों तक राहत सामग्री पहुंचाने में देरी हो रही है।
कुछ राहत सामग्री पहुंचने के बावजूद प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें खाना पकाने के लिए जरूरी सामान की अब भी जरूरत है।
रियो गांव की एक अन्य निवासी मारियाना तेवु ने कहा, ‘‘हमारे पास कुछ भी नहीं बचा है... यहां सामुदायिक रसोई क्यों नहीं है?’’
सत्रह हजार से अधिक द्वीपों वाला इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है। घोड़े की नाल के आकार की इस पट्टी में भूकंपीय भ्रंश और ज्वालामुखी हैं, जिसके कारण इंडोनेशिया में भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट की घटनाएं आम हैं।
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