दुनिया की खबरें: इस्तीफा देने वाले ट्रंप के अधिकारी की सलाह, ईरान नहीं अमेरिका खतरे में और ईरान ने अपना रवैया...

जो केंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को गैर जरूरी और हलका करार दिया है। उन्होंने ट्रंप को बेवजह गुस्से से परहेज करने और गंभीर संवाद करने की सलाह दी।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

'जमीर को गवारा नहीं' कह कर शीर्ष पद से इस्तीफा देने वाले जो केंट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को गैर जरूरी और हलका करार दिया है। उन्होंने ट्रंप को बेवजह गुस्से से परहेज करने और गंभीर संवाद करने की सलाह दी।

मंगलवार को ट्रंप की बड़े बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम अमेरिका की वैश्विक छवि और उसकी महाशक्ति की स्थिति को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा कर सकते हैं।

जो केंट वही हैं जिन्होंने 17 मार्च को नेशनल काउंटर-टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर पद से ईरान संघर्ष को गलत करार देते हुए इस्तीफा दे दिया था।

अपनी विशलेषणात्मक टिप्पणी में, जो ने ट्रंप को चेताया है। उनके अनुसार, ट्रंप भले ही ईरान को कड़ी चेतावनी देकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम अमेरिका के लिए ही खतरा बन सकते हैं। इसमें आशंका जताई गई है कि यदि ईरान के खिलाफ किसी प्रकार की व्यापक सैन्य कार्रवाई या उसकी सभ्यता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका की वैश्विक भूमिका पर सवाल खड़े हो सकते हैं और उसका इकबाल बुलंद नहीं रहेगा।

उन्होंने एक्स पर ट्रंप की पोस्ट शेयर करते हुए लिखा- ट्रंप को लगता है कि वह ईरान को बर्बादी की धमकी दे रहे हैं, लेकिन सच ये है कि अमेरिका खतरे में है। अगर वह ईरानी सभ्यता को खत्म करने की कोशिश करते हैं, तो अमेरिका को दुनिया में स्थिरता लाने वाली ताकत के तौर पर नहीं, बल्कि अव्यवस्था फैलाने वाले एजेंट के तौर पर देखा जाएगा। नतीजतन दुनिया की सबसे बड़ी सुपरपावर के तौर पर हमारा दर्जा खत्म हो जाएगा।

ईरान ने अपना रवैया नहीं बदला तो और भी साधन हैं, उम्‍मीद है तय समय सीमा से पहले मिलेगा जवाब: जेडी वेंस

हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा क‍ि ईरान को अब अपनी मंशाओं से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

जेडी वेंस ने कहा क‍ि अमेरिका को उम्मीद है कि आज रात तक ईरान की ओर से कोई प्रतिक्रिया मिल सकती है। 'मुझे उम्मीद है कि वे सही जवाब देंगे।'

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में हैं, जहां वे हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के साथ अमेरिका और हंगरी के बीच द्विपक्षीय बैठक में शाम‍िल हुए।

उन्होंने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर पोस्‍ट कर कहा, ''ईरान को अब अपने इरादों से ग्लोबल इकॉनमी को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।''

जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका इस बात को लेकर आश्वस्त है कि बातचीत जारी है और तय समय के भीतर कोई जवाब मिल सकता है। भरोसा जताया कि आज रात तक ईरान की ओर से कोई प्रतिक्रिया मिल सकती है।

उन्होंने कहा, "उन्हें यह जानना होगा कि हमारे पास ऐसे साधन मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल करने का फैसला हमने अब तक नहीं किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनका इस्तेमाल करने का फैसला कर सकते हैं। अगर ईरानी अपना रवैया नहीं बदलता तो वे निश्चित रूप से उनका इस्तेमाल करेंगे।"

उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा, "अमेरिका और हंगरी मिलकर प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में जिस चीज का प्रतिनिधित्व करते हैं, वह है पश्चिमी सभ्यता की रक्षा... उस विचार की रक्षा कि हमारी नींव एक विशिष्ट ईसाई सभ्यता और ईसाई मूल्यों पर रखी गई है।"

वहीं, दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी धमकी को दोहराते हुए कहा क‍ि मंगलवार को ईरान की पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी।

ट्रंप ने मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा, "आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।"


नेपाल ने भारत समेत छह देशों से अपने राजदूत वापस बुलाए

नेपाल ने भारत समेत छह देशों से अपने राजदूत वापस बुला लिए हैं, जिन्हें केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के कार्यकाल में नियुक्त किया गया था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने बताया कि सरकार ने एक मंत्रिमंडल फैसले के माध्यम से भारत, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका में कार्यरत राजदूतों को वापस बुला लिया है।

छेत्री के मुताबिक, जिन राजदूतों को वापस बुलाया गया है, उनमें शंकर प्रसाद शर्मा (भारत), चित्रलेखा यादव (ऑस्ट्रेलिया), सुमनिमा तुलाधर (डेनमार्क), पूर्ण बहादुर नेपाली (श्रीलंका), शिवमाया तुम्बाहम्फे (दक्षिण कोरिया) और कपिलमान श्रेष्ठ (दक्षिण अफ्रीका) शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि छह देशों में तैनात राजदूतों को सोमवार को पत्र जारी कर एक महीने के भीतर लौटने का निर्देश दिया गया है।

इससे पहले, अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली कार्यवाहक सरकार ने ओली प्रशासन की ओर से राजनीतिक कोटे के तहत नियुक्त किए गए 17 राजदूतों में से 11 को वापस बुला लिया था।

रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह ने ‘जेन जेड’ समूह के नेतृत्व में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान ओली सरकार के पतन के लगभग छह महीने बाद मार्च 2026 में नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी।

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