दुनिया की खबरें: हॉर्मूज के बाद अब बाब-अल-मंदेब पर भी संकट और 'अमेरिका- इजरायल नहीं चाहते ईरान और अरब देश..'
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के बाधित होने के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट पहले ही गहरा चुका है। अब एक और खतरा स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब पर मंडरा रहा है, जो रेड सी और अदन की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण चोक प्वाइंट है।

ईरान का इजरायल और अमेरिका के साथ संघर्ष जारी है। इस संघर्ष में ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोही भी शामिल हो गए हैं। हूतियों ने इजरायल पर कई मिसाइल हमले किए हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज के बाधित होने के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट पहले ही गहरा चुका है। अब एक और खतरा स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब पर मंडरा रहा है, जो रेड सी और अदन की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण चोक प्वाइंट है। इसी कारण भारतीय नौसेना पूरी तरह सतर्क है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस समय उत्तरी अरब सागर में ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के आसपास भारतीय नौसेना के कई युद्धपोत तैनात हैं। एंटी-पायरेसी मिशन के तहत यहां हमेशा एक युद्धपोत मौजूद रहता है। वेस्ट एशिया संकट के दौरान भारतीय नौसेना लगातार भारतीय कच्चे तेल और एलपीजी टैंकरों को एस्कॉर्ट कर रही है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक आवश्यकता पड़ने पर यहां भी भारतीय ध्वज वाले जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा भी दी जा सकती है।
फिलहाल हूतियों ने रेड सी में किसी जहाज पर हमला नहीं किया है, लेकिन भविष्य में ऐसा नहीं होगा, यह कहना मुश्किल है। ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब को भी बाधित कर सकता है। वर्ष 2023–24 में जब रेड सी क्षेत्र में हूती हमले शुरू हुए थे, तब दुनिया की बड़ी शिपिंग कंपनियों ने इस मार्ग को जोखिमपूर्ण घोषित कर दिया था।
बाब-अल-मंदेब लगभग 20 मील चौड़ा है, और यह रेड सी को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यहां से करीब 12 प्रतिशत वैश्विक व्यापार गुजरता है। रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी (सेवानिवृत्त) के अनुसार, हूती ऐसा प्रयास जरूर कर सकते हैं क्योंकि वे ईरान के प्रॉक्सी हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में ईरान दबाव में है, और ऐसे में हूती उसकी मदद के लिए इस मार्ग को भी 'वेपोनाइज' करने की कोशिश कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो वैश्विक व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जिसमें भारत भी शामिल है—महंगाई बढ़ सकती है, उर्वरकों की कीमतें बढ़ सकती हैं, और निर्यात प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिबूती में अमेरिका के अलावा चीन, जापान और फ्रांस की सैन्य मौजूदगी है और भारत की भी वहां सक्रियता रहती है, इसलिए इस क्षेत्र को बाधित करना इतना आसान नहीं होगा। हालांकि, यदि हूती यमन से ऐसी गतिविधियां जारी रखते हैं, तो अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है, जिससे क्षेत्र में गतिविधियां और कठिन हो जाएंगी।
यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक प्रमुख समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज, ओमान की खाड़ी और अरब सागर होते हुए आगे जाता है। दूसरा मार्ग मेडिटेरेनियन सागर से स्वेज नहर, रेड सी और अदन की खाड़ी होते हुए अरब सागर तक आता है। ये दोनों मार्ग ऊर्जा और कार्गो व्यापार की जीवनरेखा हैं। यदि रेड सी और स्ट्रेट ऑफ बाब-अल-मंदेब भी प्रभावित होते हैं, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। अगर हूती विद्रोही रेड सी से लेकर अदन की खाड़ी और उत्तरी अरब सागर तक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर हमले शुरू करते हैं, तो वैश्विक व्यापार बुरी तरह बाधित हो जाएगा। अब युद्ध का खतरा और बढ़ गया है।
रूस का आरोप,'अमेरिका- इजरायल नहीं चाहते ईरान और अरब देशों के बीच संबंध रहें सामान्य'
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का आरोप है कि अमेरिका-इजरायल शांति की इच्छा नहीं रखते हैं। उन्होंने रशियन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल की एक बैठक में दावा किया कि अमेरिका और इजरायल, ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच सामान्य रिश्ते (नॉर्मलाइजेशन) नहीं चाहते हैं।
उन्होंने कहा, "अमेरिका और इजरायल, ईरान और अरब देशों के बीच संबंध सामान्य होने से रोक रहे हैं, और 2010 में रूस की पहल पर किए गए सामूहिक खाड़ी सुरक्षा प्रस्ताव को कमजोर कर रहे हैं।"
लावरोव ने कहा कि क्षेत्र में चल रहे “रेजीम चेंज” (तख्तापलट) के पीछे असली मकसद तेल और गैस संसाधनों पर कब्जा हासिल करने की बेताब कोशिश है। लावरोव ने चेतावनी दी कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो यह संकट पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है और एक बड़े संघर्ष में तब्दील हो सकता है।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ये भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, "ट्रंप कहते हैं कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानूनों की कोई परवाह नहीं है। बर्बर तरीके से शहर उजाड़े जा रहे हैं। अस्पतालों पर हमले हो रहे हैं। ऐसे हालात में हम और हमारे सहयोगियों के अलावा किसी को भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों की परवाह नहीं है।"
ईरान के खिलाफ जमीनी हमला कर सकते हैं, मिशन तो हमारी शर्तों पर ही होगा खत्म: हेगसेथ
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार को दावा किया कि वो 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' के लिए तैयार हैं और संघर्ष उनकी शर्तों पर ही खत्म होगा। ये भी कहा कि अगर संवाद से बात नहीं बनेगी तो 'बम के जरिए बातचीत' को अंजाम दिया जाएगा।
वाशिंगटन डीसी में 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का अपडेट देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने आगामी योजनाओं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जज्बे और सैन्य ऑपशन को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दिया।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान को लेकर बातचीत चल रही है और इसमें तेजी आ रही है, लेकिन साथ ही सैन्य ऑप्शन भी खुले हैं। अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका जमीनी हमला (ग्राउंड इनवेजन) भी कर सकता है। हालांकि, शायद इसकी जरूरत न पड़े।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका की रणनीति थोड़ी 'अनप्रेडिक्टेबल' यानी अनिश्चित रहने की है, ताकि दुश्मन अंदाजा न लगा सके कि अगला कदम क्या होगा?
उन्होंने कहा, "आप कोई युद्ध तब तक न तो लड़ सकते हैं और न ही जीत सकते हैं, जब तक आप अपने विरोधी को यह बता दें कि आप क्या करने को तैयार हैं और क्या नहीं—जिसमें जमीनी सैनिकों की तैनाती भी शामिल है।"
हेगसेथ ने आगे कहा, "हमारा विरोधी इस समय सोच रहा है कि ऐसे 15 अलग-अलग तरीके हैं जिनसे हम जमीनी सैनिकों के साथ उन पर हमला कर सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका "उन विकल्पों को अमल में ला सकता है। या शायद हमें उनका इस्तेमाल करने की जरूरत ही न पड़े। शायद बातचीत से बात बन जाए। मुख्य बात यह है कि इस मामले में अप्रत्याशित बने रहें - निश्चित रूप से किसी को भी यह न पता चलने दें कि आप क्या करने को तैयार हैं और क्या नहीं।"
हमारे तीन जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया, 'संबंधित पक्षों' को धन्यवाद: चीन
चीन ने मंगलवार को कहा कि तेल लेकर आ रहे उसके तीन जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और उसने इसकी सुविधा और समन्वय के लिए संबंधित पक्षों को धन्यवाद दिया।
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने यहां एक प्रेसवार्ता में ईरान का नाम लिए बिना कहा कि संबंधित पक्षों के समन्वय के बाद हाल ही में तीन चीनी जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम संबंधित पक्षों की सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हैं।’’
ईरान वर्तमान में खाड़ी से जलडमरूमध्य पार करने वाले तेल के जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित कर रहा है। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता की अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग कर रहा है।
माओ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास का जलक्षेत्र अंतरराष्ट्रीय माल और ऊर्जा व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा कि चीन खाड़ी में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए शत्रुता तत्काल समाप्त करने का आह्वान करता है।
अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद चीन वर्षों से ईरानी तेल का एक बड़ा आयातक रहा है। चीन ने अपने जहाजों के होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने के बारे में पहली बार बात की। ऐसी खबरें हैं कि ईरान घनिष्ठ रणनीतिक संबंधों को देखते हुए चीनी जहाजों को जलडमरूमध्य पार करने दे रहा है।
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia