दुनिया की खबरें: डोनाल्ड ट्रंप बोले- डील पर सस्पेंस बरकरार, कई बातें तय होना बाकी और समझौते की कॉपियां लीक

ट्रंप ने मीडिया के पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। दोनों के बीच फिलहाल एमओयू हुआ है और अभी कई बातें तय होनी बाकी हैं। इस बातचीत में ट्रंप ने मार्केट सेंटिमेंट पर भी चर्चा की।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
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यूएस-ईरान शांति समझौते का एक ओर पूरी दुनिया स्वागत कर रही है तो, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ऐसी टिप्पणी की है जिससे इस पर आशंका के बादल मंडराने लगे हैं। जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने गए ट्रंप ने मीडिया के पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। दोनों के बीच फिलहाल एमओयू हुआ है और अभी कई बातें तय होनी बाकी हैं। इस बातचीत में ट्रंप ने मार्केट सेंटिमेंट पर भी चर्चा की।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि लगभग 99.99 प्रतिशत संभावना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार इस खबर से “बेहद खुश” है और तेल की कीमतें गिर रही हैं, जो उनके अनुसार इस समझौते की सफलता को दर्शाता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता “अंतिम नहीं” है और उन्होंने चेतावनी दी, “अगर उन्होंने ठीक से व्यवहार नहीं किया, तो हम फिर बम बरसाएंगे।”

उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ समझौते से बाजारों में भरोसा बढ़ा है और इसका असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अगले एक-दो दिन में पूरी तरह खुल जाएगा। उनके मुताबिक, समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।

फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात से पहले पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता सिर्फ एक “समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग)” है।

अमेरिका की ओर से ईरान को फंड देने वाली बात को भी ट्रंप ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि यूएस निवेश नहीं करेगा और स्पष्ट किया कि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड की खबरें गलत हैं। उन्होंने कहा, “हम 10 सेंट भी नहीं लगा रहे हैं, हम कोई निवेश नहीं कर रहे हैं और न ही हमारे पास कोई फंड है।”

अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते की प्रतियां हुईं लीक, तेहरान को कई रियायतें मिलने की संभावना

अमेरिका से युद्ध खत्म करने के लिए होने वाले एक अस्थायी समझौते के बाद ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए कदम उठाएगा, जिसके बदले में उसे बिना किसी प्रतिबंध के तेल बेचने की अनुमति दी जाएगी। अंतरिम समझौते की लीक हुई प्रतियों से यह जानकारी मिली है।

समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक समारोह में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाने हैं। इसमें कहा गया है कि अमेरिका युद्ध के बाद ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर देगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित अंतिम समझौता होने के बाद तेहरान पर लगाए गए सभी अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को समाप्त करने की दिशा में काम करेगा।

अमेरिका की ओर से ईरान को तुरंत स्वतंत्र रूप से तेल बेचने की अनुमति देने और बाद में सभी प्रतिबंध हटाने के प्रस्ताव को उन रियायतों से भी बड़ा माना जा रहा है, जो ईरान को 2015 के परमाणु समझौते के तहत दी गई थीं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिका को 2015 के समझौते से अलग कर लिया था और उसे “सबसे खराब समझौता” बताया था।

माना जा रहा है कि इस नए समझौते की अमेरिका में कड़ी आलोचना हो सकती है और यह इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है, जिन्होंने 28 फरवरी को ट्रंप के साथ मिलकर युद्ध शुरू किया था।

समझौते में लेबनान में इजराइल और ईरान समर्थित चरमपंथी संगठन हिज़्बुल्ला के बीच तुरंत लड़ाई समाप्त करने की बात कही गई है। यह समझौते का सबसे संवेदनशील हिस्सा है क्योंकि इजराइल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए लेबनान के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण बनाए रखेगा।


ओमान तट के पास अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले दो भारतीय नाविकों के शव स्वदेश लाए गए

ओमान तट के पास एक पोत पर पिछले सप्ताह हुए अमेरिकी हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों में से दो के शव बुधवार को स्वदेश ले जाए गए। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

इससे एक दिन पहले पलाऊ के ध्वज वाले इस पोत ‘एमटी सेटेबेलो’ से बचाए गए 21 भारतीय नाविकों को स्वदेश लाया गया था।

मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘एमटी सेटेबेलो पर हुए हमले में दुखद रूप से जान गंवाने वाले आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया के शव भारत ले जाए गए हैं।’’

हालांकि, दूतावास ने हमले में मारे गए तीसरे भारतीय नाविक पटनाला सुरेश के शव के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी। भारतीय दूतावास ने कहा, ‘‘दुख की इस घड़ी में हमारी संवेदनाएं उनके परिवारों के साथ हैं।’’

अमेरिका ने ओमान तट के पास पिछले सप्ताह भारतीय चालक दल वाले तीन व्यापारिक पोत पर हमले किए। इनमें से एक पोत ‘एमटी सेटेबेलो’ था। इस पोत पर हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि अन्य को बचा लिया गया था।

मोदी ने ट्रंप से बातचीत के दौरान नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के दौरान समुद्री नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया और कहा कि ईरान तथा अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति समझौते में उनकी सुरक्षा के प्रावधान होने चाहिए।

मोदी और ट्रंप ने जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर व्यापक वार्ता की, जिसमें प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता, द्विपक्षीय रक्षा व सुरक्षा संबंधों तथा पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा हुई।

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब कुछ दिन पहले एक व्यापारिक जहाज पर अमेरिकी सेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी।

प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में शांति और प्रगति की उम्मीद को फिर से जगाने में ट्रंप के नेतृत्व की भी सराहना की।

मोदी ने अपने मीडिया वक्तव्य में कहा, "हम हमेशा कहते रहे हैं कि समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता होनी चाहिए। समुद्री व्यापार क्षेत्र में लाखों भारतीय नाविक काम करते हैं। मेरा मानना है कि उनकी सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है कि (ईरान के साथ) समझौते में नाविकों की सुरक्षा के प्रावधान होंगे।"

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