दुनिया की खबरें: पाकिस्तान में महंगाई और बेरोजगारी से परेशान जेन-जेड और श्रमिकों की कमी से जूझ रहा रूस

देश की सबसे बड़ी और डिजिटल रूप से सबसे अधिक जुड़ी पीढ़ी, जेनरेशन जेड, में बदलाव लाने की क्षमता है। यह आबादी ऐसे समय में वयस्कता में प्रवेश कर रही है जब आशा से कहीं अधिक असुरक्षा व्याप्त है।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

पाकिस्तान की करीब 60 प्रतिशत आबादी 30 वर्ष से कम ही है और यह देश एक महत्वपूर्ण परीक्षा का सामना कर रहा है जो इसके आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक भविष्य को आकार दे सकती है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

मेडियालाइन की रिपोर्ट में कहा गया कि देश की सबसे बड़ी और डिजिटल रूप से सबसे अधिक जुड़ी पीढ़ी, जेनरेशन जेड, में बदलाव लाने की क्षमता है। यह आबादी ऐसे समय में वयस्कता में प्रवेश कर रही है जब आशा से कहीं अधिक असुरक्षा व्याप्त है।

युवा बेरोजगारी का स्तर उच्च बना हुआ है, मुद्रास्फीति ने क्रय शक्ति को कम कर दिया है, और स्थिर नौकरियां मिलना कठिन होता जा रहा है।

कई युवा पाकिस्तानियों नागरिकों के लिए, अब जीवनयापन और स्थिरता की महत्वाकांक्षा या दीर्घकालिक सपनों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक कठिनाई, राजनीतिक अनिश्चितता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ती पाबंदियों के कारण कई युवा निराश हो रहे हैं और देश छोड़ रहे हैं।

प्रवासन सोच को भी बदल रहा है। जैसे-जैसे अधिक लोग, विशेषकर मध्यम वर्ग के लोग, देश छोड़ रहे हैं, यह धारणा फैल रही है कि शिक्षा और कड़ी मेहनत अब प्रगति की गारंटी नहीं हैं।

शिक्षा व्यवस्था स्वयं संघर्ष कर रही है। साक्षरता का स्तर कम बना हुआ है, लाखों बच्चे अभी भी स्कूल से बाहर हैं, और लैंगिक असमानता बनी हुई है क्योंकि कई लड़कियां कम उम्र में शादी या घरेलू जिम्मेदारियों के कारण स्कूल छोड़ देती हैं, जबकि लड़के अकसर कमाने के लिए जल्दी स्कूल छोड़ देते हैं।

श्रमिकों की कमी से जूझ रहा रूस, भारत से बुलाएगा 40 हजार से ज्यादा कामगार : रिपोर्ट

रूस में कामगारों की भारी कमी को देखते हुए वहां की सरकार भारत से ज्यादा मजदूर और कामगार बुलाने की योजना बना रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस साल करीब 40,000 भारतीय नागरिक काम के लिए रूस जा सकते हैं।

डीडब्ल्यू.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के अंत तक 70,000 से 80,000 भारतीय नागरिक पहले से ही रूस में काम कर रहे थे।

पिछले साल दिसंबर में भारत और रूस के बीच दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे। इन समझौतों का मकसद भारत के अर्ध-कुशल और कुशल कामगारों को रूस में काम करने के बेहतर अवसर देना है। ये समझौते हैं, "एक देश के नागरिकों को दूसरे देश में अस्थायी रूप से काम करने की अनुमति" और "अवैध प्रवासन से निपटने में सहयोग"।

इन समझौतों से भारतीय कामगारों को रूस में नौकरी मिलने का एक सुरक्षित ढांचा मिलेगा, ताकि उन्हें पहले की तरह धोखाधड़ी या गलत तरीकों का सामना न करना पड़े।

हाल ही में रूस में काम कर रहे एक युवा भारतीय सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल के सड़क पर काम करने की खबर ने लोगों का ध्यान खींचा था। वह उन 17 भारतीय कामगारों में शामिल था, जो कुछ महीने पहले सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे थे। उन्हें वहां सड़क रखरखाव के काम में लगाया गया था।

रूस के ऐप-आधारित मीडिया प्लेटफॉर्म फोंटांका की रिपोर्ट के अनुसार, इन कामगारों को रूस की एक सड़क रखरखाव कंपनी कोलोम्योज्स्कोये ने भर्ती किया था। उन्हें सड़क सफाई और सर्दियों में सड़कों के रखरखाव जैसे काम सौंपे गए थे।

रूस के कई हिस्सों में श्रमिकों की कमी बढ़ती जा रही है। इसी वजह से वहां नगरपालिका सेवाओं और हाथ से किए जाने वाले कामों में विदेशी कामगारों की मांग बढ़ रही है।

इस बीच, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा कि भारत का उद्यमशील माहौल काफी मजबूत है और भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है।


इंडोनेशिया में भूस्खलन में लापता 80 व्यक्तियों में मरीन सैनिक शामिल

इंडोनेशिया के मरीन फोर्स के उन्नीस सदस्य पश्चिम जावा प्रांत में शनिवार को हुए भूस्खलन में लापता 80 लोगों में शामिल हैं। पहाड़ी क्षेत्र में हुए भूस्खलन में कई लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

मरीन सैनिक कठिन इलाकों में और भारी बारिश के बीच प्रशिक्षण ले रहे थे, जब शनिवार तड़के हुए भूस्खलन की चपेट में उनका शिविर और पश्चिम जावा प्रांत के पासिर लांगू गांव में माउंट बुरंगरांग की ढलानों पर स्थित लगभग 34 घर आ गए। एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया है, जिसमें शामिल कर्मियों की संख्या 500 से बढ़कर 2,100 हो गई है। ये कर्मी अपने हाथों, जल पंपों, ड्रोन और खुदाई मशीनों का उपयोग कर रहे हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने कहा कि 17 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जिनमें से 11 की पहचान कर ली गई है जबकि छह अन्य की पहचान प्रक्रिया अभी जारी है।

नौसेना प्रमुख एडमिरल मुहम्मद अली ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि मृतकों में चार मरीन सैनिक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वे 23 सदस्यीय एक टीम का हिस्सा थे, जो इंडोनेशिया–पापुआ न्यू गिनी सीमा पर प्रशिक्षण ले रहे थे। उन्होंने कहा कि बाकी लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

अली ने कहा, ‘‘दो रात तक हुई भारी बारिश ने उस ढलान को कमजोर कर दिया था जिसने उनके प्रशिक्षण क्षेत्र को मलबे में दफन कर दिया। भारी मशीनरी को प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि वहां जाने वाली सड़क संकीर्ण है और जमीन अस्थिर बनी हुई है।’’

राष्ट्रीय खोज और बचाव एजेंसी के अभियान निदेशक युधी ब्रामंत्यो ने कहा कि बचावकर्मी 2 किलोमीटर तक फैले भूस्खलन के मलबे, पत्थर और उखड़े हुए पेड़ों को हटा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर मलबा 8 मीटर तक गहरा है।

भारत, रूस 100 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं : राजदूत

मॉस्को में भारत के राजदूत विनय कुमार ने सोमवार को यहां कहा कि भारत और रूस 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं और व्यापार के दायरे को बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

राजदूत कुमार ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर ‘पीटीआई’ से बातचीत में कहा, “पिछला वर्ष विशेष रूप से सक्रिय रहा। राष्ट्रपति (व्लादिमीर) पुतिन की यात्रा अत्यंत सफल रही। 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करना पूरी तरह से संभव है।”

उन्होंने कहा, “नए उत्पादों की पहचान सहित कई कदम उठाए जा रहे हैं, और एक मुक्त व्यापार समझौता इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि उर्वरक, कृषि और अभियांत्रिकी में नए अवसरों के साथ व्यापार में वृद्धि हुई है।

खबरों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में, रूसी कच्चे तेल के बड़े पैमाने पर आयात के कारण भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार लगभग 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया।

राजदूत ने कहा, “अधिकतर व्यापार पहले से ही राष्ट्रीय मुद्राओं में किया जा रहा है और जैसे-जैसे हम व्यापार और आर्थिक संबंधों को और गहरा करेंगे, यह प्रवृत्ति जारी रहेगी।”

इससे पहले, 77वें गणतंत्र दिवस पर दूतावास परिसर में बड़ी संख्या में एकत्रित भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए, राजदूत कुमार ने नयी दिल्ली और मॉस्को के बीच द्विपक्षीय संबंधों के “सक्रिय और परिणामोन्मुखी” चरण पर जोर दिया।

पिछले महीने पुतिन की नयी दिल्ली यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्वास जताया था कि भारत और रूस के बीच 100 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को 2030 से पहले ही हासिल कर लिया जाएगा।

वहीं, बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंका ने सोमवार को भारत के साथ अपने देश के दीर्घकालिक संबंधों पर गर्व व्यक्त करते हुए भारतीय सभ्यता की बुद्धिमत्ता पर आधारित भारतीय लोकतंत्र के लचीलेपन की प्रशंसा की।