दुनिया की खबरें: ईरान ने लिया बदला, दो जहाजों पर हमला कर किया कब्जा और ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाया
इन जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांन्सेस्का और एपामिनोड्स के रूप में की गई है। जहाजों के मालिकों से इस मामले पर टिप्पणी के लिए फिलहाल संपर्क नहीं हो सका।

ईरान के अर्द्धसैन्य बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बुधवार को दो जहाजों पर हमला किया। ईरानी सरकारी टेलीविज़न ने यह जानकारी दी। ये जहाज अब रिवोल्यूशनरी गार्ड के कब्जे में हैं और उन्हें ईरान ले जाया जा रहा है। खबर में इन जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांन्सेस्का और एपामिनोड्स के रूप में की गई है। जहाजों के मालिकों से इस मामले पर टिप्पणी के लिए फिलहाल संपर्क नहीं हो सका।
ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाया
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थ देश पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है। ट्रंप ने कहा कि यह कदम तेहरान के आंतरिक मतभेदों से जूझ रहे नेतृत्व को सात सप्ताह से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार करने का समय देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नाटकीय रूप से यह घोषणा तब की गई, जब आठ अप्रैल को घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम कुछ ही घंटों में समाप्त होने वाला था। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की इस्लामाबाद यात्रा भी टल गई, जहां ईरानी प्रतिनिधियों के साथ शांति वार्ता प्रस्तावित थी।
वेंस और विशेष अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मंगलवार को इस्लामाबाद जाने वाले थे, लेकिन व्हाइट हाउस ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की ‘‘पाकिस्तान यात्रा आज (मंगलवार को) नहीं होगी।’’
ट्रंप ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘‘इस तथ्य के आधार पर कि ईरान की सरकार गंभीर रूप से आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तथा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध पर हमसे कहा गया है कि हम ईरान पर अपने हमले को तब तक रोकें, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि समेकित प्रस्ताव तैयार नहीं कर लेते।’’
हालांकि, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर अपने हमले को तब तक ही रोकेगा, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि समेकित प्रस्ताव तैयार नहीं कर लेते। उन्होंने कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने ‘‘इसलिए अपनी सेना को नाकेबंदी जारी रखने तथा अन्य सभी मामलों में पूरी तरह तैयार और सक्षम रहने का निर्देश दिया है और युद्धविराम को तब तक बढ़ाया जाएगा, जब तक उनका प्रस्ताव पेश नहीं हो जाता और बातचीत किसी न किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाती।’’
अमेरिका की आलोचना करते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी ‘‘युद्ध की कार्रवाई है और युद्धविराम का उल्लंघन है।’’
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘किसी वाणिज्यिक जहाज पर हमला करना और उसके चालक दल को बंधक बनाना इससे भी बड़ा उल्लंघन है। ईरान जानता है कि प्रतिबंधों को कैसे निष्प्रभावी करना है, अपने हितों की रक्षा कैसे करनी है और दबाव व धमकी का मुकाबला कैसे करना है।’’
पाकिस्तान में हिरासत में लेकर जबरन देश से निकाले जा रहे अफगान शरणार्थी, एचआरडब्ल्यू ने किया खुलासा
अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने कहा है कि अफगानिस्तान के साथ सीमा पर फिर से हुई झड़पों के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने अफगान शरणार्थियों पर छापे, मनमानी हिरासत और जबरदस्ती देश निकाला बढ़ा दिया है।
एचआरडब्ल्यू ने बताया कि पुलिस ऑपरेशन की वजह से हजारों कमजोर अफगान शरणार्थियों, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं, को स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा और दूसरी जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, पाकिस्तान पर इस तरह के आरोप बलूचिस्तान की तरफ से भी लगाए जा रहे हैं। बलूचिस्तान के लोगों ने भी आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान में लोगों को जबरन गायब कर रही है, गिरफ्तार कर रही है और न्यायेतर की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
एचआरडब्ल्यू ने कहा कि पाकिस्तान का अफगानी लोगों को जबरदस्ती डिपोर्ट करना, यूएन कन्वेंशन अगेंस्ट टॉर्चर के एक पक्ष के तौर पर देश की जिम्मेदारियों का उल्लंघन हो सकता है। प्रथागत अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत किसी ऐसी जगह पर वापस भेजने या जबरदस्ती वापस भेजने पर रोक है, जहां उन्हें सच में जुल्म, टॉर्चर या दूसरे बुरे बर्ताव या उनकी जान को खतरा हो सकता है।
ह्यूमन राइट्स वॉच की रिसर्चर फरेश्ता अब्बासी ने जोर देकर कहा, "पाकिस्तानी अधिकारी अफगान शरणार्थियों को सुरक्षा की जरूरत वाले लोगों की तरह मानने के बजाय उनमें डर फैला रहे हैं। पुलिस के बुरे बर्ताव की वजह से लोगों को खाना और स्वास्थ्य सुविधा छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन की वजह से शरणार्थी अफगानिस्तान में जुल्म और उससे भी बुरे हालात में लौट रहे हैं।"
अब्बासी ने पाकिस्तान से पुलिस के गलत कामों के खिलाफ एक्शन लेने और अफगान शरणार्थियों को जबरदस्ती वापस भेजने पर तुरंत रोक लगाने की अपील की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन कामों के बारे में अपनी चिंताएं पाकिस्तानी सरकार के सामने रखने और लगातार हो रहे मानवाधिकार के उल्लंघन की निंदा करने की अपील की।
एचआरडब्ल्यू ने अपने बयान में बताया कि फरवरी से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लड़ाई बढ़ने के साथ, पाकिस्तानी पुलिस अधिकारियों ने देश के कई इलाकों में अफगान लोगों के खिलाफ ऑपरेशन बढ़ा दिए हैं, घर-घर जाकर रेड की है, देर रात घरों की तलाशी ली है और बिना वारंट के गिरफ्तारियां की हैं।
पुलिस ने वैध वीजा वाले अफगानों और बिना सही डॉक्यूमेंट्स वाले लोगों को भी गिरफ्तार किया है, जो कई अफगानों के पास नहीं हैं क्योंकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने 2023 में अफगान शरणार्थियों के लिए प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन कार्ड और दूसरे रेजिडेंसी डॉक्यूमेंट्स को रिन्यू करना बंद कर दिया।
पुलिस आमतौर पर हिरासत में लिए गए शरणार्थियों को होल्डिंग सेंटर में ट्रांसफर करती है और फिर उन्हें डिपोर्ट कर देती है। 2026 में पाकिस्तान से 146,000 से ज्यादा अफगानों को डिपोर्ट किया गया है और 1 अप्रैल से यह संख्या बढ़ रही है।
इजरायल-लेबनान के बीच दूसरे दौर की वार्ता से पहले विदेश मंत्री सार का बयान, 'कोई गंभीर मतभेद नहीं'
लेबनान और इजरायल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में कई सालों के बाद बातचीत हो रही है। पहले राउंड की वार्ता अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो की मौजूदगी में हुई। अब दूसरे दौर की वार्ता होने जा रही है।
इस संबंध में इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि बेरूत और यरुशलम के बीच गुरुवार को वॉशिंगटन में होने वाली बातचीत के अगले दौर से पहले, इजरायल का लेबनान के साथ कोई गंभीर मतभेद नहीं है।
यरूशलम में विदेशी डिप्लोमैटिक कॉर्प्स के लिए स्वतंत्रता दिवस के रिसेप्शन में सार ने कहा, “हमने 40 से ज्यादा सालों के बाद लेबनान के साथ सीधे बातचीत करने का ऐतिहासिक फैसला किया है।”
विदेश मंत्री सार ने कहा, "बदकिस्मती से, लेबनान एक नाकाम देश है। एक ऐसा देश जो असल में हिज्बुल्लाह के जरिए ईरान के कब्जे में है। लेकिन, इससे यह नतीजा भी निकलता है कि हिज्बुल्लाह इजरायल और लेबनान का एक आम दुश्मन है। जैसे यह इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा है, वैसे ही यह लेबनान की आजादी को नुकसान पहुंचाता है और उसके भविष्य के लिए खतरा है।"
इजरायली विदेश मंत्री ने कहा कि इजरायल का "लेबनान के साथ कोई गंभीर मतभेद नहीं है। कुछ छोटे-मोटे बॉर्डर विवाद हैं, जिन्हें सुलझाया जा सकता है। देशों के बीच शांति और नॉर्मलाइजेशन में एक ही रुकावट है, हिज्बुल्लाह।"
अगले राउंड की वार्ता से पहले उन्होंने लेबनान सरकार से अपील की है कि "हिज्बुल्लाह ने आपके इलाके में जो आतंकी राज बनाया है, उसके खिलाफ मिलकर काम करें। इस सहयोग की जरूरत आपको हमसे भी ज्यादा है। इसके लिए नैतिक तौर पर साफ सोच और जोखिम उठाने की हिम्मत चाहिए। लेकिन, आपके और हमारे लिए शांति का भविष्य सुनिश्चित करने का कोई असली विकल्प नहीं है। आपके लिए, लेबनान के लिए संप्रभुता, आजादी और ईरानी कब्जे से आजादी का भविष्य है।"
नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने अपने पद से दिया इस्तीफा, संपत्ति रखने व मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
नेपाल के गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बिजनेसमैन दीपक भट्टा के साथ कथित कनेक्शन के मामले को लेकर जारी विवाद के बीच गुरुंग ने गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दिया है। नेपाली मीडिया के अनुसार, दीपक भट्टा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच चल रही है। नेपाल में बालेंद्र शाह की सरकार बनने के बाद से गुरुंग काफी चर्चा में रहे। बालेंद्र शाह की सरकार बनने के बाद यह दूसरे मंत्री का इस्तीफा है।
इससे पहले श्रमिक मंत्री कुमार शाह को अनुशासनहीनता के आरोप में हटा दिया गया था। नेपाल में 5 मार्च को हुए चुनाव के बाद 8 मार्च को चुनाव के परिणाम घोषित हुए, जिसके बाद 27 मार्च को बालेंद्र शाह ने बतौर पीएम शपथ ग्रहण किया। महीनेभर के अंदर ही नेपाल की सियासत में भूचाल देखने को मिल रहा है।
गुरुंग ने सोशल मीडिया के जरिए अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, "मुझसे जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पद पर रहते हुए किसी भी तरह के हितों के टकराव या प्रक्रिया पर किसी भी तरह के असर से बचने के लिए, मैंने आज से गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है।"
नेपाली भाषा में किए गए फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "मैं सुदान गुरुंग 2082 चैत्र 13 से गृहमंत्री की जिम्मेदारी पर ईमानदारी से काम कर रहा हूं। हाल के दिनों में नागरिक स्तर से उठाए गए सवालों, टिप्पणियों और हितों को मैंने गंभीरता से लिया है जिसमें मेरे हिस्से भी शामिल हैं। मेरे लिए पद से बड़ी नैतिकता है और लोक आस्था से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। देश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करने वाले जनरल जेड आंदोलन ने भी यही संदेश दिया है। जन जीवन स्वच्छ हो, नेतृत्व जिम्मेदार हो। मेरे 46 भाई-बहनों के खून और बलिदान की आड़ में बनी सरकार पर कोई सवाल करे तो जवाब नैतिकता है।"
उन्होंने आगे कहा, "इसलिए मैंने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है जो आज से लागू होगा जिससे मुझसे संबंधित विषयों पर निष्पक्ष जांच हो और पद के रहते हितों का टकराव दिखाई नहीं देता और इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मैंने अपनी ओर से नैतिक जिम्मेदारी ली है। अब मेरी अपील है, प्रिय संचारकर्मी मित्रों, आम नेपाली भाइयों, बहनों और युवाओं, अगर हम वास्तव में बदलाव चाहते हैं तो हम सभी को सच्चाई, ईमानदारी और आत्मशुद्धता के मार्ग पर खड़ा होना चाहिए। कितने मीडियाकर्मी मित्रों के मीठे शेयर हैं धीरे-धीरे आएंगे, रामराज्य की लालसा रखने वाले भी त्याग और नैतिक साहस दिखाएं। मेरे देश के लिए और हमारे सुरक्षा बलों के सम्मान के लिए और नेपाल के युवाओं के लिए।"