दुनिया की खबरें: अमेरिकी प्रतिबंधों पर भड़का ईरान, उधर इंडोनेशिया के बांदा सागर में 6.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप

ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था के नए प्रमुख ने रविवार को चेतावनी दी कि अगर कोई देश प्रतिबंधों का समर्थन करेगा तो ईरान इसे ‘‘युद्ध की कार्रवाई’’ मानेगा।

फोटोः IANS
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ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगर अमेरिका ने प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया तो तेहरान करारा जवाब देगा और उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, जिन्हें वह अमेरिका के सहयोगियों के तौर पर देखता है। मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकई ने कहा, ‘‘इस तनाव को और बढ़ाने के निश्चित रूप से दुष्परिणाम होंगे। हमारे हाथ बंधे हुए नहीं हैं।’’

ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था के नए प्रमुख ने रविवार को चेतावनी दी कि अगर कोई देश प्रतिबंधों का समर्थन करेगा तो ईरान इसे ‘‘युद्ध की कार्रवाई’’ मानेगा।

अमेरिका ने कई सप्ताह से जारी गतिरोध के बाद ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने की बात कही है।

अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण खत्म नहीं कर पाया है। युद्ध शुरू होने से करीब छह महीने पहले तक दुनिया में 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती थी।

ईरान की शर्त है कि इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाए, क्षेत्र से अपनी सेना वापस बुलाए और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दे। ईरान में प्रतिबंधों के कारण पहले भी रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं।इंडोनेशिया के बांदा सागर में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया, नुकसान की कोई खबर नहीं

जकार्ता, 24 अगस्त (आईएएनएस)। इंडोनेशिया के पास बांदा सागर में सोमवार को 6.4 तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इसका सेंटर लगभग 37 किलोमीटर की गहराई में था। इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी (बीएमकेजी) ने भी भूकंप की पुष्टि की।

इंडोनेशिया के बांदा सागर में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया, नुकसान की कोई खबर नहीं

जकार्ता, 24 अगस्त (आईएएनएस)। इंडोनेशिया के पास बांदा सागर में सोमवार को 6.4 तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, इसका सेंटर लगभग 37 किलोमीटर की गहराई में था। इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी (बीएमकेजी) ने भी भूकंप की पुष्टि की। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार भूकंप शाम 7:40 बजे आया।

इससे पहले 18 अगस्त को इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा प्रांत में नियास द्वीप के पास 6.1 तीव्रता का भूकंप आया। सिंहुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जानमाल के नुकसान की तुरंत कोई खबर नहीं मिली।

एजेंसी ने बताया कि भूकंप दोपहर 1:02 बजे (स्थानीय समयानुसार) आया, जिसका केंद्र साउथ नियास रीजेंसी से लगभग 147 किमी दक्षिण-पूर्व में 29 किमी की गहराई पर था। भूकंप से सुनामी आने का खतरा नहीं था।

यह इस महीने की शुरुआत में आए एक और तेज भूकंप के बाद आया है। इंडोनेशिया के ईस्ट नुसा तेंगारा (एनटीटी) प्रांत में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें जान माल का काफी नुकसान हुआ था।

नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी (बीएनपीबी) यानी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने सोमवार को बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई। बीएनपीबी के प्रिवेंशन डिप्टी अब्दुल मुहरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "मौमंगराई रीजेंसी में 26, ईस्ट मंगराई में 24, नागेकेओ में आठ, सिक्का में चार, और एंडे, वेस्ट मंगराई और नगाडा में दो-दो लोगों की मौत हुई, जबकि 213 अन्य घायल हुए।"

भूकंप के बाद से कम से कम 1,576 आफ्टर-शॉक रिकॉर्ड किए गए थे। आदेश के अनुसार, भूकंप का केंद्र नागेकेओ रीजेंसी में मबे से लगभग 30 किमी उत्तर-पूर्व में 15 किमी की गहराई पर था। भूकंप से 914 घरों को भारी, 126 को मामूली और 317 को हल्का नुकसान पहुंचा था। इससे 93 शिक्षण केंद्र, 36 स्वास्थ्य सेवा केंद्र और 38 सरकारी कार्यालयों को भी नुकसान पहुंचा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगगराई और नागेकेओ में दो फील्ड अस्पताल (अस्थाई) भेजे हैं और भूकंप प्रभावित इलाकों में चिकित्सा और संकट प्रबंधन दलों को तैनात किया। इस बीच, पश्चिमी और पूर्वी फ्लोरेस आइलैंड में बिजली 99.5 फीसदी जबकि फ्लोरेस में 95.4 फीसदी तक दूरसंचार सेवाएं व्यवस्थित हो गई। इंडोनेशियाई सेना ने भी मुश्किल इलाकों में राहत आपूर्ति सामग्री बांटने में पूरी तत्परता दिखाई। एक प्रांतीय सरकार के आदेश के मुताबिक, ईस्ट नुसा तेंगारा प्रांतीय सरकार ने 15 अगस्त को आए भूकंप के बाद 14 दिन की इमरजेंसी रिस्पॉन्स स्टेटस घोषित कर दी।


इमरान की पार्टी ने उन्हें जांच के लिए तत्काल शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने की मांग की

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ने एक सरकारी अस्पताल में अधिकारियों की ‘‘लगातार लापरवाही’’ की निंदा की है और आरोप लगाया कि हृदय संबंधी जटिलताओं के संभावित खतरे को लेकर हृदयरोग विशेषज्ञों की चिंता के बावजूद खान की सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी (सीटीए) नहीं कराई गई।

पार्टी ने खान को तत्काल शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाकर यह जांच कराने की मांग की है।

डॉन अखबार की खबर के अनुसार पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के केंद्रीय सूचना सचिव शेख वकास अकरम ने रविवार को एक बयान में कहा कि पाकिस्तान आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (पीआईएमएस) में सीटी स्कैन की मशीन उपलब्ध और चालू होने के बावजूद अधिकारियों ने खान की चिकित्सकीय रूप से जरूरी जांच नहीं कराई।

खान को शुक्रवार को आंख के इलाज और कुछ अन्य चिकित्सकीय जांचों के लिए पीआईएमएस ले जाया गया था।

चिकित्सकों ने उनके हृदय की सीटीए कराने की कथित तौर पर सलाह दी, लेकिन अस्पताल अधिकारियों ने कहा कि इसके लिए जरूरी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके बाद बिना जांच किए खान को वापस अदियाला जेल भेज दिया गया।

पीटीआई पार्टी ने अधिकारियों की इस ‘‘लगातार लापरवाही’’ की निंदा करते हुए मांग की कि सीटीए जांच तत्काल शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में कराई जाए।

अकरम ने कहा, ‘‘इसे महज प्रशासनिक चूक मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। यह एक बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।’’

उन्होंने कहा कि शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में इस जांच के लिए जरूरी विशेषज्ञ और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अकरम ने खान की व्यापक चिकित्सकीय जांच और उपचार से संबंधित उच्चतम न्यायालय के आदेश का भी हवाला दिया। उनका आरोप है कि अधिकारियों ने इस निर्देश को दरकिनार करते हुए खान को ऐसे अस्पताल में भेज दिया, जहां सीटी एंजियोग्राफी नहीं कराई गई।

अकरम ने कहा कि 10 अगस्त को हृदय की गति तेज होने और सिरदर्द की शिकायत के बाद सरकारी चिकित्सा बोर्ड ने खान की चिकित्सीय जांच की थी। उन्होंने बताया कि पीआईएमएस के एक हृदयरोग विशेषज्ञ ने एक अगस्त को ही सीटीए कराने की सलाह दी थी।

इन खबरों का संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को तथ्यों का पता लगाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए स्थापना प्रभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की।

ट्रंप के 'अप्रत्याशित व्यवहार' की वजह से भारत ने बरती सावधानी

भारत ने इस साल जून में फ्रांस के एवियान में जी7 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान ‘सावधानीपूर्ण रुख’ अपनाया था। शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि यह फैसला ट्रंप के "अप्रत्याशित व्यवहार" को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की सप्ताहांत में एक कार्यक्रम के दौरान की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए मामले से परिचित सरकारी अधिकारियों ने कहा कि किसी भी वीवीआईपी यात्रा से पहले नेताओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया से बातचीत की व्यवस्था को लेकर चर्चा सामान्य प्रक्रिया है।

दरअसल, गोर ने कहा था कि भारत ने दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद मीडिया के साथ किसी भी संयुक्त बातचीत से बचने का ‘विशेष अनुरोध’ किया था।

एक अधिकारी ने कहा, "इस संबंध में भारतीय पक्ष ने ऐसी यात्राओं के लिए अपनी मानक प्रक्रिया से अमेरिकी पक्ष को अवगत कराया। जब कोई प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलता है तो उनके अप्रत्याशित व्यवहार को लेकर सतर्क रहता है। दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों के साथ उनकी बातचीत में भी ऐसा व्यवहार देखा गया है। यही कारण है कि भारत ने सावधानीपूर्ण रुख अपनाया।"

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 18 जून को एवियान में हुई बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बहाल करने की दिशा में ट्रंप के प्रयासों की सराहना की थी। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन स्वतंत्रता और निर्बाध वाणिज्यिक गतिविधियों को बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया था। साथ ही, समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता रेखांकित की थी।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, " दोनों नेताओं ने फरवरी 2025 में वाशिंगटन डीसी में हुई अपनी बैठक के बाद से भारत-अमेरिका सीओएमपीएसीटी (कैटेलाइजिंग ऑपर्च्युनिटीज फॉर मिलिट्री पार्टनरशिप, एक्सेलरेटेड कॉमर्स एंड टेक्नोलॉजी) के तहत हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की।"

बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने रक्षा, रणनीतिक प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्रों में हुई प्रमुख प्रगति का स्वागत किया।

पीएमओ ने कहा कि दोनों नेताओं ने अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर विशेष संतोष व्यक्त किया और अधिकारियों को जल्द से जल्द संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी तथा व्यावसायिक रूप से सार्थक समझौते की दिशा में काम करने का निर्देश दिया।

दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा दोनों देशों और उनके लोगों के पारस्परिक हित में सभी क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

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