दुनिया की खबरें: ईरान ने नयी रक्षा रणनीति के संकेत दिए, कहा- खतरा पैदा होने से पहले करेंगे कार्रवाई

ईरान के सरकारी मीडिया ने बेहतर क्षमताओं वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल का सोमवार को हवाला देते हुए इसे देश की रक्षा रणनीति में ‘‘निर्णायक मोड़’’ बताया।

फोटोः IANS
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ईरान ने अमेरिका और इजराइल के साथ जारी युद्ध के बीच अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव के संकेत देते हुए कहा है कि वह किसी भी संभावित खतरे के पैदा होने से पहले ही उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा।

ईरान के सरकारी मीडिया ने बेहतर क्षमताओं वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल का सोमवार को हवाला देते हुए इसे देश की रक्षा रणनीति में ‘‘निर्णायक मोड़’’ बताया।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में सरकारी टेलीविजन पर एक दिन पहले प्रसारित ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसिन रेजाई की टिप्पणियों का बार-बार हवाला दिया गया। रेजाई ने ईरान की नयी मिसाइल क्षमता का दावा किया था और कहा था कि इसका एक अमेरिकी युद्धपोत के खिलाफ ‘‘परीक्षण’’ किया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं था कि जिस मिसाइल का परीक्षण किए जाने की बात कही गई, वह वही ठोस ईंधन वाली ‘कासेम बसीर’ मिसाइल थी, जिसका सोमवार की रिपोर्ट में जिक्र किया गया।

अमेरिका ने शनिवार को कहा था कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं और इसके जवाब में अमेरिका ने तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया।

हाल के दिनों में ईरान की ओर से दिए जा रहे बयानों में अधिक आक्रामक रुख देखने को मिला है। सोमवार की रिपोर्ट में कहा गया कि ‘कासेम बसीर’ ईरान की रक्षा रणनीति में ‘‘एक निर्णायक मोड़’’ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिसाइल की मारक क्षमता और सटीकता अधिक है तथा इसमें आधा टन वजन का ‘वारहेड’ है। इस मिसाइल का अनावरण पिछले साल किया गया था और उस समय इसकी मारक क्षमता कम से कम 1,200 किलोमीटर बताई गई थी।

ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर चिंता उन कारणों में शामिल थी, जिनकी वजह से अमेरिका और इजराइल ने इस साल की शुरुआत में ईरान पर हमला किया था और इसके बाद युद्ध शुरू हो गया। इस बीच, अमेरिका ने ईरान द्वारा घोषित ‘प्रवेश निषिद्ध क्षेत्र’ की योजना खारिज की।

महिला कर्मचारियों के समर्थन में प्रदर्शन के बाद एफिल टावर बंद

पेरिस का मशहूर एफिल टावर कर्मचारियों के विरोध के कारण सोमवार को बंद कर दिया गया। एक हिंदू धार्मिक समूह के दौरे के समय महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से ‘‘हटाने’’ के विरोध में कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे। यह जानकारी एफिल टावर के प्रबंधन एवं कर्मचारियों ने दी।

‘यूरोन्यूज’ ने सोमवार को बताया कि यह घटना शनिवार को हुई जब बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) से जुड़े करीब 100 लोगों ने एफिल टावर का दौरा किया था।

श्रमिक संगठन की एक प्रतिनिधि डायने डावोइन ने फ्रांस टेलीविजन को बताया कि शनिवार को प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को ‘‘उनके कार्यस्थलों से हटा दिया गया था।’’

खबर के अनुसार एफिल टावर के कर्मचारियों ने एक बयान जारी करके उन ‘‘पेशेवर निर्देशों’’ की निंदा की, जिनके कारण ‘‘महिला कर्मचारियों को उनकी लैंगिक पहचान के आधार पर कार्यस्थल से अलग रखा गया तथा उनकी जगह दूसरे कर्मचारियों को लाया गया।’’

एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी सीईटीई ने स्वीकार किया है कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया था कि उसके दौरे का आयोजन इस तरह किया जाए कि ‘‘महिलाओं के साथ बातचीत’’ को यथासंभव सीमित रखा जा सके। कंपनी ने कहा कि ‘‘इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था।’’

सीजीटी ट्रेड यूनियन की ओर से जारी एक बयान में कर्मचारियों ने ‘‘कार्यस्थल पर दिए गए उन निर्देशों’’ की निंदा की, जिनके चलते महिला कर्मचारियों को उनकी लैंगिक पहचान के आधार पर दरकिनार किया गया, उनकी जगह अन्य कर्मचारियों को लगाया गया।

फ्रांस24 द्वारा उद्धृत बयान के अनुसार, ‘‘कुछ महिला कर्मचारियों से अपनी जगह छोड़कर अन्य क्षेत्रों में चले जाने को कहा गया। कुछ स्थानों पर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया।’’

बयान में कहा गया, ‘‘सभी महिला कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि जब तक प्रतिनिधिमंडल वहां मौजूद है, वे कुछ निर्धारित क्षेत्रों से होकर न गुजरें और न ही उन्हें पार करें।’’

फ्रांस24 की खबर के अनुसार, हर साल करीब 70 लाख पर्यटकों को आकर्षित करने वाला यह लोकप्रिय स्थल कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच बैठक के बाद मंगलवार को फिर से खोल दिया जाएगा।

पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने कहा कि एफिल टावर के कर्मचारियों का गुस्सा जायज है। उन्होंने कथित परिस्थितियों को अस्वीकार्य बताया और कहा कि यह पता लगाने के लिए जांच शुरू की जाएगी कि वास्तव में क्या हुआ था।


नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या बढ़कर 1,357 हुई; बचाव अभियान जारी

नेपाल में अचानक आयी विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित इलाकों से और शव बरामद किए जाने के बाद मंगलवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 1,357 हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि बचाव दल अब भी 5,326 लोगों की तलाश कर रहे हैं जबकि अब तक 13,583 लोगों को बचाया जा चुका है।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को हिमस्खलन के कारण अचानक भोटेकोशी नदी में आयी बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई। अलग-अलग प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद, मरने वालों की संख्या 1,357 हो गई है।

सुरक्षाबलों की संयुक्त कमान ने अब तक चितवन जिले से 363 शव, नवलपरासी पूर्व से 223, नवलपरासी पश्चिम से 222 और नुवाकोट से 197 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, रसुवा से 169, गोरखा से 75, धादिंग से 70 और तनहूं से 38 शव बरामद किए गए हैं।

एनडीआरआरएमए के मुताबिक सोमवार तक केवल 102 शवों की पहचान की गई और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया।

चीनी मीडिया की खबरों के मुताबिक इस आपदा से चीन नियंत्रित तिब्बत में भी कम से कम 43 लोगों की मौत हुई है, जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

अल नीनो के प्रभाव से श्रीलंका में पेयजल संकट, 1.15 लाख से अधिक लोग प्रभावित

श्रीलंका में उभरती अल नीनो स्थिति, बढ़ते तापमान और कम बारिश के कारण देश के कुछ हिस्सों में शुष्क मौसम की स्थिति गंभीर होने से 1.15 लाख से अधिक लोग पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मौसम विभाग के महानिदेशक अजित विजेमन्ना ने कहा कि अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है और हो सकता है कि यह मौजूदा मौसम संबंधी परिस्थितियों को प्रभावित कर रही हो।

अल नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के पानी के समय-समय पर गर्म होने की स्थिति है, जो क्षेत्र में तापमान को प्रभावित कर सकती है। श्रीलंका में जारी शुष्क मौसम के बीच इसके विकास और संभावित प्रभाव पर करीबी नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर से घिरे श्रीलंका में इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।

आपदा प्रबंधन केंद्र (डीएमसी) के अनुसार, देश के 25 प्रशासनिक जिलों में से सात में अल नीनो से जुड़ी मौसम संबंधी स्थिति के कारण 1,15,586 लोग प्रभावित हुए हैं। डीएमसी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भीषण गर्मी और बारिश की कमी से कई इलाके प्रभावित हुए हैं, जिससे पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं।

डीएमसी के अधिकारी प्रगिथ दनंसूरिया ने कहा कि वर्तमान में 1,15,534 लोग पेयजल की कमी से प्रभावित हैं। सिंचाई अधिकारियों ने बताया कि उत्तर-मध्य अनुराधापुरा जिले में करीब 3,500 एकड़-फुट क्षमता वाले एरुवेवा जलाशय में पानी का स्तर घटकर करीब 1,000 एकड़-फुट रह गया है।

अधिकारियों के अनुसार, मध्य क्षेत्र के मातले और उत्तर-पूर्व में नंदीकडल समेत कई अन्य इलाकों में भी जल स्तर में कमी आई है।

लंबे समय से जारी शुष्क परिस्थितियों का जलीय जीवों और वन्यजीवों पर भी असर पड़ रहा है। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में मुल्लैतिवु लैगून में हजारों छोटी मछलियां मृत पाई गई हैं। अधिकारियों ने इनकी मौत का कारण समुद्री और मीठे पानी के मिश्रण को बताया है।

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