दुनिया की खबरें: होर्मुज के पास नया ‘नो-एंट्री जोन’ बनाएगा ईरान और इंडोनेशिया में ज्वालामुखी का प्रकोप जारी

रेजाई ने कहा कि नए क्षेत्र की घोषणा आने वाले दिनों में की जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘यह क्षेत्र अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की सीमा से शुरू होगा, होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ेगा और इस तरफ से फारस की खाड़ी तक फैलेगा।

फोटो: IANS
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 ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के नए प्रमुख मोहसिन रेजाई ने रविवार को कहा कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर एक ‘‘प्रवेश निषिद्ध क्षेत्र’’ घोषित करने की योजना बना रहा है। इस क्षेत्र का उद्देश्य उन जहाजों को रोकना या उन पर निगरानी रखना होगा, जिनके बारे में ईरान को संदेह है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने की कोशिश कर रहे हैं।

ईरान के सरकारी प्रसारक से बातचीत में रेजाई ने यह बात कही। हालांकि, उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। उनके इस बयान से एक दिन पहले अमेरिका ने तीन ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया था। यह कार्रवाई ईरान द्वारा अमेरिकी युद्धपोतों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के जवाब में की गई थी।

विशेषज्ञों ने इन मिसाइल हमलों को तनाव बढ़ाने वाला खतरनाक कदम बताया है। इससे पहले समुद्र में ईरान के हमलों का निशाना वाणिज्यिक जहाज रहे थे।

रेजाई ने कहा कि नए क्षेत्र की घोषणा आने वाले दिनों में की जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘यह क्षेत्र अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की सीमा से शुरू होगा, होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ेगा और इस तरफ से फारस की खाड़ी तक फैलेगा। जो भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के इरादे से इस क्षेत्र में प्रवेश करेगा और जिसकी पहचान हो जाएगी, उसे हमारी प्रतिबंध सूची में डाल दिया जाएगा।’’

यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान कई सप्ताह से जारी अमेरिकी नाकाबंदी की सीमा किस जगह को मानता है। अमेरिका ने यह नाकाबंदी ईरान के बंदरगाहों को निशाना बनाने और तेहरान को अपना तेल बाहर भेजने से रोकने के लिए की है। अमेरिकी सेना ने कहा है कि 20 से अधिक युद्धपोत इस नाकाबंदी में मदद कर रहे हैं। रविवार तक इसके कारण 92 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला गया है और तीन जहाजों को निष्क्रिय किया गया है।

रूसी पुलिस ने मेरे पति को हिरासत में लिया, सेना में भर्ती होने दबाव डाल रही है: भारतीय महिला

एक भारतीय महिला ने आरोप लगाया है कि मॉस्को में रूसी पुलिस ने उसके पति को हिरासत में ले लिया है और उन पर रूसी सेना में शामिल होने का दबाव डाल रही है। उसके बाद भारतीय दूतावास ने रूस से उसे राजनयिक पहुंच उपलब्ध कराने की मांग की है।

स्नेहा गुप्ता ने छह सितंबर को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किये गये एक अपील वीडियो में ये आरोप लगाए हैं। स्नेहा अपने इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल पर खुद को वकील बताती हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति चंदन गुप्ता कानपुर के एक अभियंता हैं और वे दोनों मॉस्को में उनके ‘हाईली क्वालिफाइड स्पेशलिस्ट’ वीजा पर रह रहे हैं। स्नेहा ने कहा कि यह वीजा नोएडा की एक कंपनी ने जारी किया था, जहां उनके पति काम करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि रूसी पुलिस ने बिना किसी गलती के रविवार रात करीब 12:30 बजे उनके पति को हिरासत में ले लिया।

स्नेहा ने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके पति पर रूसी सेना में शामिल होने के लिए दबाव डाला जा रहा है। भारतीय महिला का कहना है कि रूसी सेना में सैनिकों की कमी के कारण विदेशी नागरिकों को भर्ती करने की कोशिशें की जा रही हैं। स्नेहा के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

अपने वीडियो संदेश में स्नेहा ने बताया कि उनका 10 साल का बेटा है और वह परेशान हैं क्योंकि उन्हें स्थानीय भाषा नहीं आती है और उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि इस स्थिति से कैसे निपटें।


इंडोनेशिया ने ज्वालामुखी के फिर से फटने के कारण चार एयरपोर्ट बंद रखने की अवधि बढ़ाई

इंडोनेशिया ने माउंट अनाक क्राकाताऊ ज्वालामुखी के फिर से फटने के बाद चार हवाई अड्डों पर उड़ान निलंबन को सोमवार की शाम 6 बजे तक बढ़ा दिया है। अधिकारियों ने बताया कि ज्वालामुखी की राख जकार्ता की ओर बढ़ रही है।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की ओर से साझा जानकारी अनुसार, हवाई अड्डा संचालक अंगकासा पुरा इंडोनेशिया ने कहा कि जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा और हलीम परदानाकुसुमा हवाई अड्डों के साथ-साथ लाम्पुंग के राडिन इंटेन II और बांडुंग के हुसैन सास्त्रानेगारा हवाई अड्डे पर उड़ानें निलंबित रहेंगी।

मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी (बीएमकेजी) ने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरों में सोमवार सुबह 6 बजे तक ज्वालामुखी राख के दो गुच्छे जकार्ता की ओर बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह नया विस्फोट तब हुआ जब अनाक क्राकाताऊ की राख के कारण सप्ताहांत में 1,500 से अधिक उड़ानें बाधित हुईं और लगभग 170,000 यात्री प्रभावित हुए।

माउंट अनाक क्राकाताऊ, जो जावा और सुमात्रा के बीच सुंडा स्ट्रेट में स्थित है, हाल के वर्षों में कई बार फटा है। 2018 में इसके आंशिक रूप से ढहने से सुनामी आई थी, जिसमें 400 से अधिक लोग मारे गए थे।

पिछले महीने, इंडोनेशिया के पूर्वी जावा प्रांत में स्थित माउंट सेमेरू में विस्फोट हुआ था, जिससे इंडोनेशियाई ज्वालामुखी और भूवैज्ञानिक आपदा शमन केंद्र (पीवीएमबीजी) के अनुसार शिखर से लगभग 2,000 मीटर ऊपर राख का गुबार उठा था।

पीवीएमबीजी ने बताया कि विस्फोट से सफेद से भूरे रंग की राख का गुबार दक्षिण-पूर्व की ओर बहता देखा गया और एक नदी के किनारे लगभग 2 किलोमीटर तक पायरोक्लास्टिक प्रवाह हुआ।

अधिकारियों ने निवासियों को क्रेटर के 5 किलोमीटर के दायरे में और दक्षिण-पूर्वी नदी घाटी के किनारे 13 किलोमीटर के दायरे में किसी भी गतिविधि से बचने की चेतावनी दी है।

मई में, इंडोनेशिया के उत्तरी मालुकु प्रांत में माउंट डुकोनो में विस्फोट के बाद तीन लोगों की मौत हो गई थी। माउंट डुकोनो में 8 मई को सुबह करीब 7:40 बजे स्थानीय समय पर विस्फोट हुआ था, जिससे लगभग 10 किलोमीटर ऊंचाई तक ज्वालामुखी राख का गुबार आकाश में उठा था।

'रूस में लोकतंत्र खत्म, चुनाव सिर्फ दिखावा', यूक्रेन के विदेश मंत्री का पुतिन पर तीखा हमला

क्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा ने रूस में होने वाले चुनाव पर सवाल उठाते हुए राष्‍ट्रपत‍ि व्लादिमीर पुतिन की तीखी आलोचना की। उन्‍होंने कहा क‍ि पुत‍िन की सरकार ने रूस में लोकतंत्र जैसी दिखाई देने वाली लगभग हर व्यवस्था को खत्‍म कर द‍िया है।

सिबीहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर पोस्‍ट किया, ''18 से 20 सितंबर के बीच रूस में होने वाली इस प्रक्रिया को 'विधानसभा चुनाव' नहीं कहा जा सकता।''

उन्होंने पोस्‍ट में आगे ल‍िखा, ''व्लादिमीर पुतिन पिछले 26 वर्षों से रूस पर शासन कर रहे हैं, जो जोसेफ स्टालिन के शासन काल से भी लंबा समय है। इस दौरान उनकी सरकार ने लोकतंत्र जैसी दिखाई देने वाली लगभग हर व्यवस्था को धीरे-धीरे खत्म कर दिया है।''

एंड्री सिबीहा ने बताया क‍ि रूस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कड़े प्रतिबंध हैं, विपक्षी नेताओं को जेल में डाला गया है या उनकी हत्या कर दी गई है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध की हल्की आलोचना करने वाली एकमात्र राजनीतिक पार्टी को भी चुनावी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। चुनाव में मौजूद बाकी विकल्प मतदाताओं को कोई वास्तविक विकल्प नहीं देते और स्वतंत्र ओएससीई पर्यवेक्षकों को भी पूरी तरह बाहर रखा गया है।

उन्‍होंने कहा क‍ि इसके अलावा ये तथाकथित 'चुनाव' दूसरे संप्रभु देशों के उन क्षेत्रों में भी कराए जाने वाले हैं, जिन पर रूस ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। इनमें यूक्रेन का क्रीमिया और देश के पूर्वी तथा दक्षिणी हिस्सों के कब्जे वाले क्षेत्र शामिल हैं। बयान के अनुसार, यह मतदान अवैध होगा और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन माना जाएगा, जिससे पूरी चुनावी प्रक्रिया की वैधता पर और सवाल उठेंगे।


यूएन चीफ की तालिबान से अपील, 'संयुक्त राष्ट्र के लिए महिलाओं को करने दें काम, बैन वापस लें'

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने तालिबान द्वारा अफगान महिलाओं और युवतियों पर लगातार थोपी जा रही भेदभावपूर्ण नीतियों पर गहरी फिक्र जाहिर की है। उन्होंने अफगान महिलाओं के संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने पर लगी रोक को तुरंत हटाने और देश भर में संयुक्त राष्ट्र के परिसरों तक उनकी सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के पहुंच सुनिश्चित करने की अपनी मांग को फिर से दोहराया है।

गुटेरेस ने कहा कि सार्वजनिक जीवन, शिक्षा और रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की पूरी भागीदारी पर लगी रोक उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। साथ ही, यह अफगानिस्तान के आर्थिक विकास, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में फिर से शामिल होने की राह में एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

गुटेरेस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब 7 सितंबर को अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) परिसरों में अफगान महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगे हुए एक साल पूरा हो गया है। यूएन प्रमुख ने तालिबान से आग्रह किया कि वे यूएन के लिए काम करने वाली अफगान महिलाओं पर लगी रोक को तुरंत हटाएं और यूएन परिसरों तक उनकी सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के पहुंच सुनिश्चित करें।

"ये प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। इसमें यूएन चार्टर भी शामिल है। ये संगठन की उस क्षमता को कमजोर करते हैं जिसके जरिए वह अपना काम पूरा करता है और अफगान लोगों तक जीवन बचाने वाली और अन्य सहायता पहुंचाता है, खासकर ऐसे समय में जब उनकी जरूरतें बहुत ज्यादा हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "अपने काम को पूरा करने और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुसार जरूरतमंद लोगों, खासकर महिलाओं और लड़कियों तक पहुंचने और उनकी मदद करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सभी कर्मचारियों की अपने कार्यस्थलों तक बिना किसी रुकावट के पहुंच बहुत जरूरी है। यह सुनिश्चित करना कि महिलाएं दूसरी महिलाओं और लड़कियों तक मानवीय सहायता और जरूरी सेवाएं पहुंचा सकें, एक प्रभावी और सिद्धांतों पर आधारित प्रतिक्रिया के लिए बहुत जरूरी है।"

अपने बयान में, गुटेरेस ने तालिबान से यह भी आग्रह किया कि वे अफगान महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाएं और अफगान समाज के सभी पहलुओं में उनकी पूरी, समान और सार्थक भागीदारी के अधिकार का सम्मान करें।

पिछले महीने, यूएन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि तालिबान के शासन में अफगानिस्तान में संस्थागत रूप से लिंग-आधारित दमन और गहरा हो गया है, जबकि अफगान आबादी, खासकर महिलाओं और लड़कियों पर प्रतिबंध बढ़ते जा रहे हैं।

विशेषज्ञों ने कहा, "किसी देश के जीवन में पांच साल का समय छोटा हो सकता है, लेकिन एक बच्चे के जीवन में यह बहुत लंबा समय होता है। लड़कियों की एक पूरी पीढ़ी को अब माध्यमिक शिक्षा से वंचित कर दिया गया है। जो लड़की प्रतिबंध शुरू होने के समय छठी कक्षा में थी, वह बिना एक भी दिन स्कूल गए वयस्क हो रही है।"

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