दुनिया की खबरें: ईरान की अमेरिका को दोटूक, कहा- 'दोहा में अमेरिकी अधिकारियों से बैठक का कोई प्लान नहीं'
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाघेई ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी स्तर पर बैठक की कोई योजना नहीं है।
दोहा में अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन को लेकर वार्ता तय है। इससे पहले कतर ने और फिर खुद ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच बैठक नहीं होगी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाघेई ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी स्तर पर बैठक की कोई योजना नहीं है।
उन्होंने कहा, “संभावना है कि बुधवार को दोहा में कतर के अधिकारियों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) के प्रावधानों के क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें ईरान की कतर में फंसी प्रतिबंधित वित्तीय संपत्तियों की रिहाई से जुड़ा प्रावधान भी शामिल है।”
बाघेई ने दोहराया, “मैं फिर स्पष्ट कर रहा हूं कि अगले कुछ दिनों में अमेरिकी पक्ष के साथ किसी भी स्तर पर कोई बैठक निर्धारित नहीं की गई है।”
इससे पहले कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि कतर में रखे ईरान के 6 अरब डॉलर के फ्रीज किए गए फंड अभी तक तेहरान को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं।
वहीं बाघेई ने लेबनान को लेकर अपने देश का रुख एक बार फिर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, "समझौता ज्ञापन के पहले प्रावधान के अनुरूप अमेरिका के लिए सभी मोर्चों, विशेषकर लेबनान में युद्ध समाप्त कराने की अपनी प्रतिबद्धता निभाना महत्वपूर्ण है।"
ईरानी प्रवक्ता ने कहा, “अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जायोनी शासन (इजरायल) को भी अपने वादों का पालन करने के लिए बाध्य करना चाहिए।" उन्होंने दोहराया, "अमेरिका की प्रतिबद्धता का आकलन समझौता ज्ञापन के पाठ के आधार पर किया जाएगा।"
होर्मुज को लेकर पूछे सवाल पर बाघेई ने कहा कि स्ट्रेट में बारूदी सुरंग हटाने के लिए उन्हें किसी विदेशी मदद की आवश्यकता नहीं है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी दखल का उद्देश्य “सद्भावनापूर्ण नहीं होगा” और इससे स्थिति और अधिक जटिल होगी।
उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंगों को हटाने का मुद्दा पहले से ही समझौता ज्ञापन का हिस्सा है, इसलिए इस मामले में क्षेत्र के बाहर के किसी पक्ष के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
ट्रंप ने ‘राइट टू रिपेयर’ आदेश पर हस्ताक्षर किए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक राष्ट्रपति ज्ञापन (प्रेसिडेंशियल मेमोरेन्डम) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य वाहन मरम्मत को सस्ता और आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकियों को अपनी कारों की मरम्मत खुद करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, बिना अनावश्यक सरकारी प्रतिबंधों या बढ़ी हुई लागतों का सामना किए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित एक राष्ट्रपति ज्ञापन (प्रेसिडेंशियल मेमोरेन्डम) के तहत अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) को निर्देश दिया गया है कि वह वाहन मालिकों को अपनी गाड़ियां स्वयं ठीक करने के अधिकार को बढ़ावा दे और आफ्टरमार्केट पार्ट्स उद्योग में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करे।
इस पहल का उद्देश्य वाहन रखरखाव और मरम्मत की लागत को कम करना बताया गया है। ट्रंप ने हस्ताक्षर से पहले कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है, इससे आपकी कार की कीमत कम होगी। आपकी कार को ठीक कराने की लागत भी कम होगी। यह वहनीयता से जुड़ा मुद्दा है।”
उन्होंने कहा कि यह मुद्दा तब उनके सामने आया जब उन्हें पता चला कि लोग अपनी गाड़ियों की मरम्मत करने पर सरकारी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यह मेरे ध्यान में इसलिए आया क्योंकि मैंने देखा कि लोग अपनी कार ठीक करने पर गिरफ्तार किए जा रहे थे। यह बात विश्वास करने योग्य भी नहीं है।”
ट्रंप ने आगे कहा, “यह ‘राइट टू रिपेयर’ है और मुझे लगता है कि यह पूरी तरह से सामान्य समझ (कॉमन सेंस) की बात है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कई वाहन मालिकों के पास पेशेवर मैकेनिकों से भी बेहतर कौशल होता है। उन्होंने कहा, “कुछ लोग तो इतने अच्छे मैकेनिक होते हैं कि वे दुकान के मैकेनिक को बताते हैं कि उनकी कार या ट्रक कैसे ठीक करना है।”
ईपीए प्रमुख ली जेल्डिन ने कहा कि यह आदेश फरवरी में कृषि उपकरणों के लिए लाई गई ‘राइट टू रिपेयर’ नीति को आगे बढ़ाता है और अब इसे यात्री वाहनों तक विस्तारित करता है।
उन्होंने कहा, “यह एक प्रेसिडेंशियल मेमो है जो मरम्मत के अधिकार का समर्थन करता है। अमेरिकी नागरिकों को अपनी गाड़ी ठीक करने का अधिकार है। राष्ट्रपति ट्रंप इस पर जोर देते हैं। हम उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेंगे जो अपनी गाड़ी खुद ठीक करते हैं, जैसा कि पिछली सरकारें करती थीं।”
ट्रंप ने समाजवाद को अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समाजवाद को संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने मौजूद सबसे बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर पद के उम्मीदवार जोहरान ममदानी की कड़ी आलोचना करते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और चेतावनी दी कि देश उस दिशा में जा सकता है, जिसे उन्होंने “कम्युनिज्म” (साम्यवाद) बताया।
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से न्यूयॉर्क के मेयर पद के उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी के हालिया बयान पर सवाल पूछा गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह समाजवादी उम्मीदवारों के लिए “पोस्टर चाइल्ड” बनने को तैयार हैं।
इस पर ट्रंप ने कहा कि यह मुद्दा केवल समाजवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं बड़ा वैचारिक बदलाव है।
ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि यह हमारे देश के लिए एक बड़ा खतरा है, वास्तव में, क्योंकि यह समाजवाद नहीं है, यह असल में साम्यवाद (कम्युनिज्म) है।”
उन्होंने आगे कहा, “वे ‘सोशल डेमोक्रेट’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन असल में आप साम्यवाद की बात कर रहे हैं।”
राष्ट्रपति ने इसे देश के सामने सबसे गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह हमारे राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है, शायद हमारे देश की स्थापना के बाद से अब तक का सबसे बड़ा खतरा।”
ट्रंप ने आगे कहा कि इसमें प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध, 11 सितंबर और पर्ल हार्बर हमले जैसी ऐतिहासिक घटनाएँ भी शामिल हैं।
उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ लोग उनकी तुलना को अतिशयोक्ति मान सकते हैं, लेकिन उन्होंने अपने रुख पर जोर देते हुए कहा, “लोग जब मैं यह कहता हूं तो मुस्कुराएंगे, लेकिन समझदार लोग कहेंगे कि शायद वह सही हैं।”
उन्होंने यह भी कहा, “यह वास्तव में अमेरिका में साम्यवाद लाने जैसा है। इससे ज्यादा खतरनाक कुछ नहीं हो सकता।”
अमेरिका-भारत संबंध पिछले 30 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए: रो खन्ना
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेहद विनाशकारी नीतियों के कारण अमेरिका और भारत के संबंध पिछले 30 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए रो खन्ना ने दावा किया कि हाल ही में उनकी चीन यात्रा के दौरान वहां भारत के राजदूत ने उनसे कहा कि ट्रंप की नीतियों की वजह से दोनों देशों के बीच भरोसा खत्म हो गया है।
रो खन्ना ने कहा ‘‘ मैं बातों को घुमा-फिराकर कहने वालों में से नहीं हूं। चीजें जैसी हैं मैं उन्हें वैसा ही बताता हूं। अमेरिका-भारत संबंध पिछले 30 वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर हैं।’’
उन्होंने कहा कि,‘‘ ईरान के साथ युद्ध में शामिल होने की ट्रंप की नीति बेहद विनाशकारी साबित हुई है। इसका भारत में पेट्रोल और गैस की कीमतों पर भी बुरा असर पड़ा है। अगर आपको मेरी बात पर भरोसा नहीं है, तो विदेश मंत्री एस. जयशंकर से पूछ लीजिए।’’
कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद, ‘‘ मैं चीन गया था। वहां भारत के राजदूत ने मुझसे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों के कारण दोनों देशों के बीच भरोसा खत्म हो गया है। अगर हम वर्तमान राष्ट्रपति द्वारा किए गए नुकसान के बारे में सच नहीं बोलेंगे, तो इसका मतलब है कि हम वास्तविकता से आंखें मूंद हैं।’’
रो खन्ना ने ट्रंप की ईरान और क्यूबा को धमकाने तथा ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की नीतियों की भी कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा,‘‘ अब अमेरिका अपना नैतिक नजरिया भूल चुका है। उसकी विदेश नीति ‘जिसकी लाठी,उसकी भैंस’ जैसी हो गई है। वह केवल ईरान को ही नहीं, बल्कि क्यूबा को भी धमका रहा है और ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात कर रहा है। और हम ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे सब कुछ सामान्य हो।’’
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