दुनिया की खबरें: अमेरिका से जंग के लिए ईरान की नई रणनीति, हॉर्मुज में सी-माइंस धमाके से टेंशन
ईरानी सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने बुधवार को दावा किया कि अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान नई रणनीति अपनाएगा।

ईरानी सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने बुधवार को दावा किया कि अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान नई रणनीति अपनाएगा। ये नया बयान अमेरिका के मंगलवार रात ईरान पर बरसाए बम के बाद सामने आया है । ईरानी स्टेट मीडिया के अनुसार हमलों में 12 लोग मारे गए जबकि 68 जख्मी हैं।
रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट में अमेरिका को चेतावनी दी कि तेहरान की नई रणनीति उसकी ‘बुनियाद हिला देगी।' उन्होंने लिखा, "ईरान सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीति और आर्थिक प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए भी नई रणनीति अपनाएगा।"
वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने भी इमोशनल एक्स पोस्ट में सिरिक पर हुए हमले को युद्ध अपराध बताया। उन्होंने कहा कि बमबारी वहां की गई जहां शादी की रस्म अदा की जा रही थी।
बाघेई के अनुसार ये अमेरिका की हताशा का प्रमाण है। उन्होंने आगे अमेरिकी लेखक ओ ब्रायन को कोट किया। लिखा, "अमेरिकी लेखक टिम ओ'ब्रायन ने अपनी किताब 'द थिंग्स दे कैरिड' में लिखा है:जंग की सच्ची कहानी कभी नैतिक नहीं होती... अगर कोई कहानी नैतिक लगे, तो उस पर यकीन न करें।"
मंगलवार को ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए ने दावा किया कि खुजस्तान प्रांत में अमेरिकी मिसाइल हमले में 7 लोगों की मौत हुई और 8 घायल हुए। अमेरिका ने 3 जगहों को निशाना बनाया।
होर्मुज में सी माइंस से टकराए दो टैंकर, आईआरजीसी की चेतावनी 'अवैध मार्ग न चुनें'
पश्चिम एशिया में हवाई हमलों का दौर फिर शुरू हो गया है। अमेरिका-ईरान एक दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कर रहे हैं। इईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आने के बाद क्षतिग्रस्त होकर रुक गए। आईआरजीसी ने इसके साथ ही उन शिपिंग कंपनियों को आगे कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो उसके अनुसार अमेरिका के कहने पर जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा निर्धारित मार्ग के बजाय “अवैध मार्ग” का इस्तेमाल कर रही हैं।
ईरान के सरकारी समाचार चैनल प्रेस टीवी ने बताया कि बुधवार को जारी बयान के मुताबिक, दोनों टैंकरों ने अपने चालक दल को उतार दिया था और अमेरिकी कर्मियों के नियंत्रण वाले मार्ग से गुजरने का प्रयास कर रहे थे। आईआरजीसी का दावा है कि इस दौरान दोनों जहाज बारूदी सुरंगों से टकराए, उनमें विस्फोट हुआ और वे आगे बढ़ने में असमर्थ हो गए।
कॉर्प्स ने कहा कि उसकी नौसेना पहले ही इस खनन किए गए मार्ग से गुजरने के खतरों को लेकर चेतावनी जारी कर चुकी थी। साथ ही उसने उन शिपिंग कंपनियों के खिलाफ “दोगुनी सजा” की बात कही है, जो ईरान के मुताबिक कानूनी रास्ते का पालन करने के बजाय अमेरिकी निर्देशों पर भरोसा कर अपने जहाजों को “दुश्मन” के हवाले कर रही हैं।
हालांकि, आईआरजीसी ने दोनों टैंकरों के नाम, उनके झंडे, घटना की सटीक स्थिति या संभावित हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। स्वतंत्र रिपोर्टों में होर्मुज में दो तेल टैंकरों पर हमले की पुष्टि हुई है, लेकिन घटनाओं की परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
हिमालयी जलवायु संकट पर नेपाल के पीएम शाह ने दुनिया से मांगा ठोस जवाब
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि नेपाल को जलवायु परिवर्तन के कारण सामने आ रही आपदाओं की गंभीरता को दुनिया के सामने और मजबूती से रखना होगा। फ्लैश फ्लड को आठ दिन बीत चुके हैं और विनाशकारी बाढ़ के बाद मृतकों की संख्या 1,100 के पार पहुंच गई है।
प्रतिनिधि सभा (नेपाली संसद का निचला सदन) को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब केवल पर्यावरणीय चिंता नहीं रह गए हैं, बल्कि वे मानव जीवन, बुनियादी ढांचे और भविष्य की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, बुधवार सुबह 9 बजे तक पिछले सप्ताह आई बाढ़ में बह गए 1,114 शव बरामद किए जा चुके थे, जबकि करीब 3,916 लोग अब भी लापता हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास भोटेकोशी नदी की सहायक नदी लेंगडे खोला में हिमस्खलन के कारण पानी का प्राकृतिक अवरोध बन गया था। बाद में पानी के भारी दबाव से यह प्राकृतिक बांध टूट गया और अचानक आई बाढ़ ने भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबे के साथ नीचे की ओर तबाही मचा दी। बाढ़ आगे त्रिशूली नदी की ओर बढ़ी और रास्ते में बस्तियों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि इस आपदा ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह घटना इतनी भयावह कैसे हुई और भविष्य में नेपाल को ऐसी आपदाओं के लिए किस तरह तैयार होना होगा?
उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से अचानक सामने आई इस बड़ी आपदा ने हमें चौबीसों घंटे नुकसान को नियंत्रित करने में जुटे रहने को मजबूर कर दिया है। साथ ही हमारे मन में एक गहरा सवाल भी उठा है कि आखिर यह आपदा हमारे सामने कैसे आई?”
शाह ने विशेषज्ञों के आकलन का हवाला देते हुए कहा कि यह घटना हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते जोखिमों की गंभीर चेतावनी है।
आईआरजीसी का दावा: अमेरिकी हमले के जवाब में कुवैत, जॉर्डन और इराक में सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को दावा किया कि उसने कुवैत में स्थित अमेरिकी 'अली अल-सलेम' एयर बेस, जॉर्डन में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के एक सैन्य शिविर और इराक में एक अमेरिकी निगरानी प्रणाली को निशाना बनाकर हमले किए हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि उसने कुवैत के अली अल-सलेम बेस में अमेरिकी कमांडर के आवासीय क्षेत्र और कमांड पोस्ट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।
ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के मुताबिक, आईआरजीसी ने कहा कि यह कार्रवाई उसके अली अल-सलेम बेस के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा थी और इससे यह साबित होता है कि उसके पास क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों से जुड़ी व्यापक खुफिया जानकारी मौजूद है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, आईआरजीसी ने कहा कि उसने जॉर्डन में अकाबा की खाड़ी के पास स्थित अमेरिकी मरीन बेस कैंप टिटियन पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। आईआरजीसी का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के सिरिक क्षेत्र में एक शादी समारोह पर हुए कथित अमेरिकी हमले के जवाब में की गई।
बयान के अनुसार, इस हमले में कई सैन्य सुविधाएं और हेलीकॉप्टर नष्ट हो गए तथा अमेरिकी बलों को भारी नुकसान हुआ।
आईआरजीसी ने दावा किया कि उसने इराक के एरबिल में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मौजूद सर्विलांस बैलून नियंत्रण प्रणाली को नष्ट कर दिया।
आईआरएनए के मुताबिक, आईआरजीसी की जमीनी सेना ने एरबिल स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर एक रखरखाव केंद्र और तकनीकी उपकरणों के गोदामों को भी नष्ट कर दिया। संगठन ने दावा किया कि इस कार्रवाई में कई अमेरिकी कर्मी मारे गए और ईंधन भंडारण सुविधाओं में आग लग गई।
रूस के हमलों में आठ यूक्रेनी नागरिक घायल, दोनों देशों ने धमकी दी
रूस के हवाई हमलों ने रात भर और बुधवार सुबह यूक्रेन के कीव और ओडेसा इलाकों में रिहाइशी इमारतों को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम आठ आम नागरिक घायल हो गए। स्थानीय अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यूक्रेनी वायु सेना ने कहा कि देश पर हुए हालिया हमलों का सबसे ज्यादा असर इन्हीं दो इलाकों पर पड़ा।
रूस और यूक्रेन के बीच हवाई युद्ध और तेज हो गया है, क्योंकि मास्को के अपने पड़ोसी देश पर हमले के बाद से यह संघर्ष अब पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है। पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में मोर्चे पर स्थिति काफी हद तक गतिरोध वाली बनी हुई है, और शांति समझौता कराने की अमेरिकी कोशिशों से अभी तक शांति का कोई रास्ता नहीं निकल पाया है।
मंगलवार देर रात, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अपने अगले कदमों को लेकर एक-दूसरे को धमकियां दीं।
जेलेंस्की ने विदेशी एयरलाइंस को चेतावनी दी कि यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के कारण रूस के ऊपर का आसमान उड़ानों के लिए सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि “रूस का वायुक्षेत्र असल में बंद हो जाएगा”। उन्होंने कहा कि सैन्य दबाव का मकसद रूस को शांति वार्ता के लिए मजबूर करना है।
पुतिन ने जेलेंस्की पर “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” का आरोप लगाया और कहा: “हम आतंकवादियों के साथ बातचीत नहीं करते”।
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