दुनिया की खबरें: ईरान का सनसनीखेज दावा, 'अमेरिका ने छिपाए अपने सैनिकों की मौत और तबाही के आंकड़े'
अमेरिकी सैनिकों की मौत और अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के नुकसान का असल आंकड़ा सार्वजनिक रूप से बताए गए आंकड़ों से "कहीं ज्यादा" है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर युद्ध में हुए नुकसान के आंकड़ों को छुपाने का आरोप लगाया है। गुरुवार को उन्होंने दावा किया कि जो दिखाया और बताया जा रहा है उससे असली संख्या कहीं ज्यादा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सेंटकॉम की पोस्ट शेयर करते हुए दावा किया कि अमेरिकी सैनिकों की मौत और अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के नुकसान का असल आंकड़ा सार्वजनिक रूप से बताए गए आंकड़ों से "कहीं ज्यादा" है। उन्होंने अमेरिकी संसद की अनुसंधान समिति 'कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस' की ओर से जारी किए गए बयान को शेयर करते हुए अपनी बात कही।
उन्होंने लिखा, "मई में, कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस ने माना था कि ईरान की सेना ने अमेरिका के 42 मिलिट्री एयरक्राफ्ट को नष्ट कर दिया था। अब यह संख्या 81 है।"
अराघची ने अपनी बात समझाते हुए आगे कहा, "असली नुकसान इससे कहीं ज्यादा है। सबूत? सेंटकॉम किसी मौजूदा सीनेटर को उन बेस का निरीक्षण नहीं करने देगा जिनके बारे में उसका दावा है कि वे ठीक-ठाक हैं।"
उन्होंने कटाक्ष करते हुए अमेरिकी अधिकारियों को याद दिलाया, "आप कुछ समय के लिए सभी लोगों को बेवकूफ बना सकते हैं।"
सेंटकॉम वाला कटाक्ष डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी के सार्वजनिक दावे का जवाब हो सकता है। हाल ही में मर्फी ने कहा, "पेंटागन और यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने मुझे कतर में अल उदीद एयर बेस का निरीक्षण करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।"
ट्रंप ने फिर कहा, 'मुझे मिलना चाहिए नोबेल शांति पुरस्कार,' अवॉर्ड समिति की मंशा पर जताया संदेह
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोहराया है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए, लेकिन साथ ही उन्होंने इसके मिलने की संभावना पर संदेह भी जताया। ट्रंप ने 2026 के पुरस्कार के बारे में कहा, "मुझे नहीं पता कि उनका फैसला क्या होगा।" नॉर्वेजियन नोबेल समिति इस पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को करेगी।
समिति पर संदेह जताते हुए ट्रंप ने कहा, "उनकी ऐसी छवि है कि वे शायद मुझ जैसे लोगों को यह पुरस्कार नहीं देते।" पिछले साल व्हाइट हाउस में वापसी के बाद से, ट्रंप बार-बार कहते रहे हैं कि वे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले इस पुरस्कार के हकदार हैं।
ट्रंप ने बुधवार रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा, "अब समय आ गया है।" "लेकिन पिछली बार इसे पाने वाले व्यक्ति से इसे अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करके मुझे बहुत सम्मान महसूस हुआ था; उन्होंने कहा था कि इतिहास में राष्ट्रपति ट्रंप से ज्यादा इसका कोई और हकदार नहीं है।"
दरअसल, वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने जनवरी 2026 में अपना 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार पदक ट्रंप को सौंप दिया था। वेनेजुएला में अमेरिकी मदद के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने ऐसा किया था।
पिछले साल जनवरी में पद संभालने के बाद से ट्रंप अकसर कहते हैं कि "आठ संघर्षों को रुकवाने में उनकी अहम भूमिका रही है और इसलिए उन्हें यह पुरस्कार मिलना चाहिए।" हालांकि कंबोडिया, इजरायल और पाकिस्तान ने ट्रंप को नामांकित किया है।
जिन संघर्षों को सुलझाने का ट्रंप दावा करते हैं, उनमें शामिल पक्ष अमेरिकी राष्ट्रपति की कूटनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हैं। साथ ही, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और कंबोडिया-थाईलैंड सीमा सहित कुछ क्षेत्रों में लड़ाई भड़कती रहती है।
सऊदी अरब में नागरिक ठिकानों पर हमले की भारत ने की आलोचना, आमजन को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं
भारत ने सऊदी अरब के दो हवाई अड्डों पर हुए अलग-अलग हमलों की कड़ी निंदा की। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक इन हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 36 अन्य घायल हो गए। भारत ने इस मुश्किल समय में सऊदी अरब के साथ एकजुटता की बात कही।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत पिछले कुछ दिनों में आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किए गए हमलों की कड़ी निंदा करता है। इन हमलों में आम लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल हुए हैं।
विदेश मंत्रालय ने हमलों का विरोध जताते हुए कहा कि आम नागरिकों से जुड़ी जगहों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। हम उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताते हैं, जिन्होंने इन हमलों में अपने प्रियजनों को खोया है। साथ ही, हम घायलों के जल्द ठीक होने की कामना करते हैं। भारत इस मुश्किल समय में सऊदी अरब की जनता और सरकार के साथ एकजुटता से खड़ा है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन ने बताया कि इन हमलों में मंगलवार और बुधवार को दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और सऊदी राजधानी रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया और दोनों जगहों पर संपत्ति का नुकसान हुआ।
इससे पहले बुधवार को हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया ने कहा था कि कई ड्रोन से किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया। वहीं, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से अब्हा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और दक्षिण-पश्चिमी असीर इलाके में खामिस मुशैत के पास स्थित किंग खालिद एयर बेस पर हमला किया गया।
बांग्लादेश में खसरा हुआ बेकाबू, विशेषज्ञों ने सरकार की वैक्सीन खरीद नीति को ठहराया जिम्मेदार
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप और गंभीर हो गया है। मार्च के मध्य से अब तक खसरे के 32,000 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं और 250 से ज्यादा की मौत हो गई है। रिपोर्ट में इसके लिए अंतरिम सरकार के उस फैसले को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसके तहत सितंबर 2025 में यूनिसेफ के जरिए वैक्सीन खरीद रोक दी गई थी।
बांग्लादेश के अखबार 'द डेली स्टार' की एक रिपोर्ट में सरकार के उस फैसले की आलोचना की गई है, जिसमें ओपन टेंडर प्रोसेस (खुली निविदा प्रक्रिया) अपनाई गई थी, लेकिन बाद में उसमें देरी हो गई।
'साइंस डॉट ओआरजी' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अखबार ने बताया कि चेतावनी दी गई थी कि रूटीन टीकाकरण में रुकावट आ सकती है और बीमारी फैल सकती है, सरकार ने खरीद रोक दी। इससे पहले, खसरे और रूबेला के टीके की सप्लाई के लिए सरकार लंबे समय से यूनिसेफ पर निर्भर थी, जिसके लिए मुख्य रूप से 'गावी' और सरकार से फंड मिलता था।
रिपोर्ट के अनुसार, यह बीमारी जनवरी में म्यांमार सीमा के पास रोहिंग्या शरणार्थी कैंपों में शुरू हुई और देश के 64 में से 58 जिलों में फैल गई, जिससे 21,000 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
सरकारी आंकड़ों से पता चला कि 2025 में सिर्फ 59 प्रतिशत योग्य बच्चों को खसरे का टीका लगा था, हालांकि बाद में ये आंकड़े आधिकारिक वेबसाइटों से हटा दिए गए। अफसरशाही की वजह से टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई, जिससे टीके की सप्लाई में कमी आई और रूटीन टीकाकरण प्रभावित हुआ।
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