दुनिया की खबरें: IRGC का दावा, अमेरिकी एयर बेस,सेंटकॉम मुख्यालय को बनाया निशाना, जापान में आबादी गिरने से हड़कंप!
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बुधवार को दावा किया कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिका के एक सैन्य एयर बेस और अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुख्यालय पर हमला किया है। यह जानकारी स्थानीय मीडिया में दी गई।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है। उसके मुताबिक, उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन में अमेरिकी एयर बेस और सेंटकॉम के मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। आईआरजीसी ने कहा कि जब तक अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ 'धमकियां, गैरकानूनी और दुश्मनी भरे कदम' उठाए जाते रहेंगे, तब तक उसका विरोध जारी रहेगा। यह ताजा हमला पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े तनाव के बीच हुआ है।
वहीं, अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया। अमेरिका ने इसे मध्य पूर्व में तैनात अपनी सेना पर किया गया 'अचानक हमला' बताया।
घटती आबादी ने बढ़ाई जापान की चिंता, पहली बार 42 वर्षों में 120 मिलियन से नीचे पहुंची संख्या
जापान में रहने वाले जापानी नागरिकों की कुल आबादी इस साल एक जनवरी तक घटकर 119,736,483 रह गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 42 साल बाद पहली बार यह संख्या 120 मिलियन से नीचे पहुंची है।
मिनिस्ट्री ऑफ इंटरनल अफेयर्स एंड कम्युनिकेशंस के डेटा मुताबिक, पिछले वर्ष की तुलना में जापानी नागरिकों की संख्या में 917,000 की कमी आई है। 1968 से जब इस तरह के आंकड़े दर्ज किए जाने लगे, तब से यह अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, जापान के 47 प्रांतों में केवल टोक्यो ऐसा प्रांत रहा, जहां जापानी नागरिकों की संख्या में 0.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वहीं, जापान में रहने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 4,031,159 हो गई है। पिछले साल के मुकाबले इसमें 354,000 की बढ़ोतरी हुई है। 2013 में गिनती शुरू होने के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
विदेशी नागरिकों को शामिल करने पर जापान की कुल आबादी 123,767,642 रही, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 563,000 कम है। केवल टोक्यो, चिबा और ओसाका प्रांतों में ही आबादी बढ़ी है।
इससे पहले मई में सरकार के आंकड़ों से पता चला था कि जापान में बच्चों की संख्या भी लगातार घट रही है। एक अप्रैल तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों की अनुमानित संख्या 13.29 मिलियन रह गई थी, जो पिछले साल से 350,000 कम है। यह अब तक का सबसे कम स्तर है। बच्चों की संख्या में लगातार 45वें साल गिरावट दर्ज की गई है।
जापान के क्योडो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनल अफेयर्स और कम्युनिकेशन मिनिस्ट्री के जारी डेटा के अनुसार, कुल आबादी में 15 साल से कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी 0.3 प्रतिशत अंक घटकर 10.8 प्रतिशत रह गई है। 1950 के बाद से यह सबसे कम स्तर है।
रूस को कमजोर करने की पश्चिमी साजिशों का दिया जाएगा जवाब: रूसी विदेश मंत्री
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी साझेदारों पर साजिश के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि हम उनकी हर साजिश को समझते हैं। पूरे पश्चिमी समूह ने हमारे खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह बातें उन्होंने सरकारी समाचार एजेंसी ‘टास’ को दिए एक साक्षात्कार में कहीं।
सर्गेई लावरोव ने मौजूदा हालात को गंभीर बताते हुए रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव, यूक्रेन संघर्ष और भविष्य की रणनीति को लेकर कई अहम बातें कहीं। रूसी विदेश मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस साक्षात्कार की जानकारी साझा की।
न्यूज एजेंसी 'टास' के अनुसार, उन्होंने कहा कि हमारे 'पश्चिमी साझेदारों' की ओर से रूस को लगातार गुमराह करने की कोशिशों को देखते हुए, आखिरकार हमारा धैर्य भी जवाब दे जाता है। यह कोई संयोग नहीं था कि विशेष सैन्य अभियान शुरू होने के कुछ ही समय बाद, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिम और यूरोप के साथ हमारे रिश्तों पर बात करते हुए कहा था कि 'फरवरी 2022 से पहले जैसी स्थिति में अब वापस लौटना संभव नहीं है।'
रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, लावरोव ने कहा कि पश्चिम में फिर से ऐसे नारे सुनाई देने लगे हैं, जिनमें हमारे देश को 'रणनीतिक हार' देने और 'रूस का उपनिवेश खत्म करने' की बात कही जा रही है। यह असल में रूस को तोड़ने की योजना के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक सीधा शब्द है।
उन्होंने कहा कि हम अच्छी तरह समझते हैं कि पश्चिम क्या योजना बना रहा है, और हर किसी को इसे समझना चाहिए ताकि पता चले कि स्थिति कितनी गंभीर है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इसे छिपाया नहीं है। खुद को 'सभ्य दुनिया' कहने वाले पूरे पश्चिमी समूह ने हमारे खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
उन्होंने कहा कि अब जेलेंस्की डोनबास और दूसरे मोर्चों पर लगातार पीछे हटते हुए खुले तौर पर आतंकवादी गतिविधियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। पश्चिम यह देख रहा है कि उसके दिए गए कई लंबी दूरी के हथियार अपने निशानों तक पहुंच रहे हैं, इसलिए वह इस संघर्ष को 'निर्णायक मोड़' के रूप में पेश कर रहे हैं। उनको लगता है कि 'यूक्रेन का हौसला आखिरकार रूस को हरा सकता है।'
रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, लावरोव ने कहा कि रूस मोर्चे पर हर दिन आगे बढ़ रहा है उतनी तेजी से नहीं जितनी हम चाहते हैं, लेकिन अपने सैनिकों की जान बचाते हुए आगे बढ़ रहा है। यूक्रेन (और उसके पश्चिमी समर्थक) मैदान में अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसे हमलों का सहारा ले रहे हैं जिनका उद्देश्य लोगों की सामान्य जिंदगी को प्रभावित करना है।
लावरोव ने कहा कि पश्चिम अब हमें कह रहा है कि बातचीत फिर से शुरू करने का समय वही तय करेगा। उसकी योजना है कि बातचीत की मेज पर यूरोप, अमेरिका, जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हों। इससे पहले वे युद्धविराम और संघर्ष रोकने की मांग कर रहे हैं। इसके बाद फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में बहुराष्ट्रीय सेनाएं तैनात की जाएंगी और फिर बातचीत होगी। इसका मतलब क्या है? यह एक तरह का अल्टीमेटम है। इससे मोर्चे की मौजूदा स्थिति को स्थिर कर दिया जाएगा, जबकि यूक्रेन की मौजूदा सरकार बनी रहेगी।
जापान में भूकंप के बाद हालात गंभीर, पीएम तकाइची की आपातकालीन आपदा प्रबंधन बैठक, राहत-बचाव अभियान तेज
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने बुधवार को बताया कि कुमामोटो प्रांत में आए 7.1 तीव्रता के भूकंप में 13 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि मंगलवार को आए इस भूकंप के बाद कई जगहों पर लोगों के घायल होने, इमारतें गिरने, आग लगने और सड़कों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि हुई है।
जापान की समाचार एजेंसी क्योडो न्यूज के अनुसार, मौसम एजेंसी ने बताया कि मंगलवार को स्थानीय समय के अनुसार शाम 4:27 बजे कुमामोटो प्रांत में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसकी गहराई जमीन के अंदर दस किलोमीटर थी।
प्रधानमंत्री तकाइची ने भूकंप में जान गंवाने वालों के प्रति शोक जताया और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार तेजी से नुकसान का जायजा ले रही है। सभी संबंधित मंत्रालय और सरकारी एजेंसियां राहत और बचाव के शुरुआती काम में जुटी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार बिजली और पानी जैसी जरूरी सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। वहीं, जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्स पानी पहुंचाने और मरीजों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने का काम कर रही है।
बुधवार को प्रधानमंत्री तकाइची ने कुमामोटो भूकंप को लेकर दूसरी आपातकालीन आपदा प्रबंधन बैठक की। इस बैठक में कुमामोटो के गवर्नर किमुरा और कैबिनेट कार्यालय के उपमंत्री त्सुशिमा ने ऑनलाइन हिस्सा लिया।
उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, "बचाव और राहत अभियान के लिए सेल्फ-डिफेंस फोर्स के जवानों की संख्या बढ़ाकर लगभग 4,600 कर दी गई है। इसके अलावा करीब 2,000 पुलिसकर्मी और 1,400 अग्निशमन कर्मी भी लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं।"
उन्होंने लिखा, "राहत-बचाव का काम समय के खिलाफ एक दौड़ है। 'आईओएन मॉल कुमामोटो' और 'निप्पॉन पेपर यात्सुशिरो मिल' समेत कई जगहों पर अभी भी लोग फंसे हुए हैं और उन्हें बचाए जाने का इंतजार है। मैंने सभी टीमों से कहा है कि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाने के लिए अपने कर्मचारियों और संसाधनों को मजबूत करें।"
प्रधानमंत्री ने बताया कि लगभग 450 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां करीब 7,700 लोग ठहरे हुए हैं। सरकार इन शिविरों में खाना-पानी, बिस्तर, सफाई का सामान, टॉयलेट पेपर, एयर कंडीशनर और बिजली की व्यवस्था जैसी जरूरी चीजें उपलब्ध कराने में लगी हुई है।
जेलेंस्की का दावा: रूस की रिफाइनरी, लॉजिस्टिक्स सेंटर और सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि यूक्रेन ने रूस के कई अहम सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर लंबी दूरी से सफल हमले किए हैं। उनके मुताबिक, ये ठिकाने रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने और उसे सहारा देने का काम कर रहे थे।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ''रूस के उन ठिकानों पर हमारी लंबी दूरी की कार्रवाई के नए नतीजे सामने आए हैं, जो युद्ध को जारी रखने और उसे सहारा देने का काम कर रहे हैं।''
उन्होंने बताया कि रियाजान में एक तेल रिफाइनरी और एक लॉजिस्टिक्स सेंटर को निशाना बनाया गया। यह जगह यूक्रेन की सीमा से करीब 360 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा, अस्थायी रूप से कब्जे वाले क्रीमिया में रूसी ब्लैक सी फ्लीट की तेज रफ्तार नौकाओं के बेस पर भी हमला किया गया।
उन्होंने बताया कि लंबी दूरी की कार्रवाई के तहत पर्म क्षेत्र की एक तेल रिफाइनरी, रोस्तोव क्षेत्र के एक निर्यात टर्मिनल और एक सैन्य उद्यम को भी निशाना बनाया गया।
जेलेंस्की ने कहा कि मैं हमारे सभी योद्धाओं का उनकी सटीक कार्रवाई के लिए धन्यवाद देता हूं। साथ ही उन सभी लोगों का भी आभारी हूं, जिनकी वजह से इस तरह की लंबी दूरी की कार्रवाइयां सफल हो रही हैं। रूस को हर दिन यह महसूस होना चाहिए कि इस युद्ध की कीमत उसे लगातार ज्यादा चुकानी पड़ेगी। हमें आक्रामक पक्ष को कमजोर करना है और उस पर दबाव बनाए रखना है, ताकि इस युद्ध का अंत जल्द से जल्द हो सके।
साथ ही एक अन्य 'एक्स' पोस्ट में जेलेंस्की ने अमेरिका की रक्षा कंपनी जो एफ-16 लड़ाकू विमान और पैट्रियट सिस्टम के लिए मिसाइलें बनाने वाली कंपनियों के साथ अपनी मुलाकात के बारे में बताया।
उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, ''मैंने अमेरिका की रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन की टीम से मुलाकात की। यह अमेरिका की सबसे मजबूत रक्षा कंपनियों में से एक है और हम लंबे समय से इसके साथ मिलकर काम कर रहे हैं। लॉकहीड मार्टिन वही कंपनी है जो एटीएसीएमएस, हिमर्स, एफ-16 लड़ाकू विमान और पैट्रियट सिस्टम के लिए मिसाइलें बनाती है।
इराक पर हवाई हमलों के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को दी सतर्क रहने की सलाह
इराक पर हवाई हमले के बाद अमेरिका ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बुधवार को एडवाइजरी जारी कर उन्हें इलाके के हालात पर पैनी नजर बनाए रखने को कहा है।
बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास के अनुसार, ईरान समर्थित समूहों ने इराकी क्षेत्र से इराक और क्षेत्र के अन्य स्थानों को निशाना बनाकर हमले किए हैं, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। दूतावास ने कहा कि अमेरिकी नागरिक स्थानीय मीडिया पर नजर रखें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
दूतावास ने याद दिलाया कि इराक अब भी अमेरिकी विदेश विभाग की 'लेवल-4: यात्रा न करें' (यू नॉट ट्रैवल) श्रेणी में है। एडवाइजरी में कहा गया है कि आतंकवाद, अपहरण, सशस्त्र संघर्ष, नागरिक अशांति और आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराने की सीमित क्षमता के कारण अमेरिकी नागरिकों को किसी भी वजह से इराक की यात्रा नहीं करनी चाहिए।
दूतावास ने यह भी चेतावनी दी कि सुरक्षा स्थिति के कारण उड़ानों के संचालन में बाधा आ सकती है और पूर्व सूचना के बिना ही हवाई क्षेत्र बंद किया जा सकता है। यात्रियों को एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी एयरलाइन से उड़ान की स्थिति की पुष्टि करने की सलाह दी गई है।
अमेरिकी दूतावास ने बताया कि गैर-जरूरी कर्मचारियों की पहले से जारी वापसी प्रक्रिया के बावजूद बगदाद स्थित दूतावास अपना कामकाज जारी रखे हुए है।
सुरक्षा सलाह में अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है कि वे विरोध प्रदर्शनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूरी बना कर रखें। अपने परिवार और दोस्तों से लगातार संपर्क बनाए रखें, यात्रा संबंधी दस्तावेज तैयार रखें, मोबाइल फोन चार्ज रखें और आपातकालीन नंबर पहले से सुरक्षित कर लें।
साथ ही उन्हें स्मार्ट ट्रैवलर एनरोलमेंट प्रोग्राम (एसटीईपी) में पंजीकरण कराने और अमेरिकी विदेश विभाग के सुरक्षा अपडेट प्राप्त करने की भी सलाह दी गई है।
