दुनिया की खबरें: कर्ज में डूबा पाकिस्तान, फिर भी नेताओं की तिजोरी भर रही और ट्रंप पर लगे गंभीर आरोप

पिछले कुछ महीनों में शरीफ सरकार ने मंत्रियों, सलाहकारों, सांसदों और अब स्पीकर और चेयरमैन के वेतन में भारी बढ़ोतरी की है। मार्च में कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और सलाहकारों के वेतन में 188 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी।

फोटो: IANS
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नवजीवन डेस्क

वित्तीय संकट और महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने एक और चौंकाने वाला फैसला लिया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक और सीनेट चेयरमैन यूसुफ रजा गिलानी का वेतन 500 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है।

अब दोनों शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों को हर महीने 13 लाख पाकिस्तानी रुपए वेतन मिलेगा, जबकि पहले यह राशि केवल 2.05 लाख रुपए थी। यह वृद्धि 1 जनवरी 2025 से प्रभावी होगी।

पिछले कुछ महीनों में शरीफ सरकार ने मंत्रियों, सलाहकारों, सांसदों और अब स्पीकर और चेयरमैन के वेतन में भारी बढ़ोतरी की है। मार्च में कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और सलाहकारों के वेतन में 188 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। वहीं, सांसदों और सीनेटरों के लिए 5.19 लाख रुपए मासिक वेतन स्वीकृत किया गया था।

यह सब उस वक्त हो रहा है जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कर्ज, राजनीतिक अस्थिरता, बेरोजगारी, महंगाई और ईंधन तथा बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी से त्रस्त है। आम जनता को जहां कमर कसने की सलाह दी जा रही है, वहीं सरकार अपने ही खर्च बढ़ा रही है।

शरीफ सरकार की आलोचना करते हुए इस्लामाबाद के एक स्थानीय निवासी ने कहा, "पहले तो ये लोग कमर कसने और सादगी की बात करते हैं, फिर खुद ही कैबिनेट मंत्रियों की संख्या बढ़ाते हैं और उनका वेतन भी आसमान पर पहुंचा देते हैं। आम जनता पर टैक्स का बोझ और खुद पर ऐश, ये तो हद है!"

बता दें कि शरीफ सरकार ने जब सत्ता संभाली थी, तब कैबिनेट में केवल 21 सदस्य थे, जिसे बढ़ाकर अब 51 सदस्यों तक कर दिया गया है।

देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के बीच यह वेतन वृद्धि आम जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसी लग रही है। आलोचकों का कहना है कि अगर यही ‘आर्थिक सुधार’ का रास्ता है, तो पाकिस्तान को मुश्किलों से उबरने में लंबा वक्त लग सकता है।

ट्रंप ने दूसरे कार्यकाल में आपातकालीन शक्तियों का किया जमकर इस्तेमाल

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में आपातकालीन शक्तियों का जिस तरह से इस्तेमाल किया, वैसा किसी भी पूर्व राष्ट्रपति ने नहीं किया है।

हालांकि ट्रंप का दावा है कि उनके नेतृत्व में अमेरिका संकट से उबर रहा है, लेकिन उन्होंने कड़े आयात शुल्क लगाने, सीमा पर सैनिकों की तैनाती और पर्यावरण नियमों को दरकिनार करने जैसे फैसलों में उन नियमों और कानूनों का सहारा लिया, जिन्हें सिर्फ युद्ध या राष्ट्रीय आपात जैसी असाधारण परिस्थितियों के लिए बनाया गया था।

एसोसिएटेड प्रेस के विश्लेषण में सामने आया है कि ट्रंप के 150 कार्यकारी आदेशों में से 30 में किसी न किसी प्रकार की आपातकालीन शक्ति का हवाला दिया गया है। यह आंकड़ा उनके हालिया पूर्ववर्तियों की तुलना में काफी अधिक है।

इसका परिणाम यह हुआ है कि राष्ट्रपति का उनकी शक्तियों का इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। ट्रंप अप्रत्याशित संकट का सामना करने के बजाय आपातकालीन शक्तियों का उपयोग संसद के अधिकार को कमजोर करने और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।

इल्या सोमिन ने कहा, "ट्रंप की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने आपातकालीन शक्तियों का जो उपयोग किया, उसका पैमाना और विस्तार बहुत बड़ा है, जो किसी भी हाल के राष्ट्रपति के कार्यकाल से कहीं अधिक है।"

इल्या सोमिन उन पांच अमेरिकी व्यवसायों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जिन्होंने प्रशासन पर मुकदमा दायर किया था और दावा किया था कि ट्रंप के कथित 'लिबरेशन डे' शुल्क से उन्हें नुकसान हुआ है।

ट्रंप ने सबसे ज्यादा बार 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (आईईपीए) का हवाला देते हुए शुल्क लगाए। यह कानून विदेशी खतरों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति या अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए बनाया गया था।


उत्तरी चिली में 6.4 तीव्रता का भूकंप, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं

उत्तरी चिली में शुक्रवार को 6.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे बुनियादी ढांचे को मामूली नुकसान पहुंचा और 20,000 से अधिक लोगों की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। अधिकारियों ने भूकंप के बाद किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी है।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि भूकंप स्थानीय समयानुसार दोपहर 1:15 बजे आया और इसका केंद्र अटाकामा रेगिस्तान के तट के पास धरती से 76 किलोमीटर नीचे स्थित था।

प्रारंभिक खबरों में किसी के हताहत होने की तत्काल पुष्टि नहीं हुई।

चिली की हाइड्रोग्राफिक और ओशनोग्राफिक सेवा ने कहा कि यह भूकंप दक्षिण अमेरिकी तट पर सुनामी उत्पन्न करने लायक नहीं है।

चिली की राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया सेवा, सेनाप्रेड उप निदेशक मिगुएल ऑर्टिज़ ने कहा कि शक्तिशाली भूकंप के कारण बुनियादी ढांचे को "मामूली" क्षति हुई और लगभग 23,000 लोगों की विद्युत आपूर्ति बाधित हुई।

दक्षिणी मैक्सिको में विमान दुर्घटनाग्रस्त, तीन लोगों की मौत

दक्षिणी मैक्सिको में ग्वाटेमाला की सीमा के पास शुक्रवार को एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार ग्वाटेमाला के दो पायलटों और मैक्सिको के एक कृषि वैज्ञानिक की मौत हो गई।

मैक्सिको के कृषि मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ग्वाटेमाला का यह विमान दक्षिणी मेक्सिको के तापाचुला के निकट दुर्घटनाग्रस्त हुआ। बयान में कहा गया कि दुर्घटना के कारण के बारे में अभी जानकारी नहीं दी गई है।


नेपाल में अवैध सोना रखने के आरोप में भारतीय नागरिक गिरफ्तार

नेपाल में एक भारतीय नागरिक को 274 ग्राम अवैध सोना लाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने बताया कि पश्चिम बंगाल के 31 वर्षीय महादेव सामंत को शुक्रवार को काठमांडू जा रही एक यात्री बस में सुरक्षा जांच के दौरान चंद्रगिरि नगर पालिका के नागधुंगा से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि भारतीय नागरिक बिना सीमा शुल्क चुकाए सोना लेकर आया था।.पुलिस ने मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है।

बांग्लादेश का चुनाव वर्ष 2026 के अप्रैल में कराने की घोषणा से लोग निराश: बीएनपी

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने शनिवार को कहा कि मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की ओर से वर्ष 2026 के अप्रैल में चुनाव कराने की घोषणा से लोग ‘निराश’ हुए हैं। उन्होंने इस साल दिसंबर तक चुनाव कराने की पार्टी की मांग दोहराई।

‘ढाका ट्रिब्यून’ ने एक बयान में पार्टी के हवाले से कहा, ‘‘लोगों की जीत जुलाई के विद्रोह के दौरान छात्रों और जनता द्वारा किए गए अपार बलिदानों के माध्यम से हासिल हुई थी। लेकिन चुनाव की व्यवस्था में अनुचित देरी ने लोगों को निराश और आक्रोशित किया है।’’

बयान में कहा गया है कि बीएनपी की राष्ट्रीय स्थायी समिति ने एक आपातकालीन ‘वर्चुअल’ (आभासी) बैठक में रमजान, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक या समकक्ष परीक्षाओं और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस साल दिसंबर तक चुनाव कराने के अपने प्रस्ताव को दोहराया।

बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान की अध्यक्षता में बैठक मुख्य सलाहकार की घोषणा के बाद बुलाई गई थी, जिसमें लंबे संघर्षों के माध्यम से मतदान के अपने अधिकार को पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रहे राष्ट्र की आकांक्षाओं को कथित तौर पर नजरअंदाज किया गया है।

इसमें कहा गया, ‘‘लगभग डेढ़ दशक से अपने बुनियादी मताधिकार से वंचित इस देश के लोगों ने गायब होने, हत्या किए जाने, कैद किए जाने, घायल होने और प्रताड़ित किए जाने के बावजूद मतदान के माध्यम से लोकतंत्र को बहाल करने के लिए अपना संघर्ष जारी रखा है।’’

बीएनपी की स्थायी समिति ने पाया कि अप्रैल की शुरुआत में चुनाव कराने से जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, क्योंकि प्रतिकूल मौसम की स्थिति और रमजान के दौरान अभियान और चुनाव संबंधी गतिविधियों के संचालन की चुनौतियां भी होंगी, जिसका इस्तेमाल अंततः चुनाव स्थगित करने के लिए किया जा सकता है।

इसने कहा कि मुख्य सलाहकार के संबोधन में इस बात का कोई स्पष्ट औचित्य नहीं बताया गया कि दिसंबर तक चुनाव कराना क्यों व्यावहारिक नहीं हैं।

यूनुस की यह घोषणा पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बीएनपी और कई अन्य समूहों द्वारा दिसंबर तक चुनाव कराने के को लेकर बढ़ाए गए दबाव के बीच आई है।

हालांकि, छात्र नेतृत्व वाली एनसीपी और कई दक्षिणपंथी समूहों ने कहा कि चुनावों का तब तक इंतजार करना चाहिए जब तक कि ‘सुधार’ और ‘न्याय’ से जुड़ा काम पूरा नहीं हो जाता।


पाकिस्तान: गैस सिलेंडर विस्फोट में छह लोगों की मौत, दो लड़िकयां घायल

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शनिवार को गैस सिलेंडर विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

आपात बचाव सेवा ‘खैबर पख्तूनख्वा रेस्क्यू’ 1122 के प्रवक्ता बिलाल अहमद फैजी ने बताया कि यह घटना मर्दान जिले की अराम कॉलोनी में हुई और विस्फोट से दो मंजिला मकान ढह गया।

फैजी ने बताया, “इस दुर्घटना में छह लोगों की मौत हो गई और दो लड़कियां गंभीर रूप से घायल हो गईं।’’

उन्होंने बताया कि विस्फोट की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे बचाव दल ने मलबे में फंसे घायलों को बाहर निकाला।

मर्दन के उपायुक्त अजमतुल्ला वजीर, जिला आपात अधिकारी सैयद शोएब मंसूर और सहायक आयुक्त जुनैद खालिद घटनास्थल पर मौजूद थे तथा उन्होंने पूरे अभियान की निगरानी की।

मृतकों को निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने सहित सात घंटे में अभियान पूरा हो गया।

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