दुनिया की खबरें: पाकिस्तान ने भारत को लिखा पत्र और रूस ने बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन से यूक्रेन के शहरों पर किया हमला
विदेश कार्यालय प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने साप्ताहिक प्रेसवार्ता में बताया कि चिनाब नदी पर स्वालकोट परियोजना का मुद्दा सिंधु जल आयुक्तों के स्तर पर उठाया गया था, और पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त ने पिछले साल जुलाई में एक पत्र लिखा था।

पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने भारत को पत्र लिखकर चिनाब नदी से संबंधित स्वालकोट जलविद्युत परियोजना के बारे में जानकारी मांगी है।
विदेश कार्यालय प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने साप्ताहिक प्रेसवार्ता में बताया कि चिनाब नदी पर स्वालकोट परियोजना का मुद्दा सिंधु जल आयुक्तों के स्तर पर उठाया गया था, और पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त ने पिछले साल जुलाई में एक पत्र लिखा था।
उन्होंने कहा, “मैं पुष्टि कर सकता हूं कि इस सप्ताह, संभवतः 11 फरवरी को, भारतीय सिंधु जल आयुक्त को एक और पत्र लिखा गया है। यह पत्र 1960 के भारतीय जल आयुक्त समझौते के अनुसार, स्वालकोट परियोजना के संबंध में जानकारी और परामर्श के लिए था।”
पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदम उठाए थे, जिनमें 1960 की सिंधु जल संधि को ‘‘स्थगित’’ करना भी शामिल था।
रूस ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से यूक्रेन के शहरों पर हमला किया
रूस ने बुधवार रात यूक्रेन के शहरों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि यूक्रेन के आवासीय क्षेत्रों और विद्युत ग्रिड समेत यूक्रेन के कई इलाकों पर रूसी हवाई हमले जारी हैं।
यूक्रेनी वायुसेना ने कहा कि बुधवार रात से लेकर बृहस्पतिवार तक रूस ने हमलों में लंबी दूरी के 219 ड्रोन, 24 बैलिस्टिक मिसाइलों और एक विमान मिसाइल का इस्तेमाल किया।
वायुसेना के अनुसार, मुख्य रूप से यूक्रेन की राजधानी कीव, दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव, मध्य यूक्रेन में स्थित निप्रो और दक्षिणी बंदरगाह शहर ओडेसा पर हमले किए गए।
इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूस युद्ध रोकने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता में होने वाली दूसरे दौर की बातचीत को लेकर हिचकिचा रहा है।
जेलेंस्की ने बुधवार रात कहा कि अमेरिका ने अगले सप्ताह मियामी या संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबूधाबी में रूसी और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच आगे की बातचीत का प्रस्ताव रखा है। दोनों पक्षों के बीच पिछली वार्ता अबूधाबी में हुई थी।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने तुरंत पुष्टि कर दी है कि वह वार्ता में शामिल होगा। जेलेंस्की ने पत्रकारों से कहा, “अब तक जहां तक मैं समझ रहा हूं, रूस हिचकिचा रहा है।”
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बृहस्पतिवार को कहा कि एक और दौर की वार्ता जल्द हो सकती है। हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
अप्रैल में चीन पहुंचेंगे राष्ट्रपति ट्रंप, साल के आखिर में जिनपिंग करेंगे अमेरिका का दौरा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल 2026 में चीन यात्रा की पुष्टि की है। ट्रंप ने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक समिट के लिए अप्रैल में चीन जाएंगे। इसके साथ ही प्रेसिडेंट शी के इस साल के आखिर में अमेरिका आने की उम्मीद है।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “हां, मैं अप्रैल में राष्ट्रपति शी से मिलने जाऊंगा। मैं इसका इंतजार कर रहा हूं। वह साल के आखिर में यहां आ रहे हैं, और मुझे इसका काफी इंतजार है।”
ट्रंप ने बीजिंग के साथ अमेरिका के संबंधों को स्थिर बताया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “नहीं, चीन के साथ हमारे संबंध अभी बहुत अच्छे हैं। राष्ट्रपति शी के साथ मेरे संबंध बहुत अच्छे हैं।”
ट्रंप ने अप्रैल के दौरे की जगह या एजेंडा के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि शी का अमेरिका दौरा कब होगा, बस इतना कहा कि यह इस साल के आखिर में होगा।
बता दें, हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति और शी जिनपिंग ने फोन पर बातचीत की थी, जिसकी जानकारी अमेरिकी प्रेसिडेंट ने दी। ट्रंप के मुताबिक, यह बातचीत लंबी और गहन रही और इसमें व्यापार, सैन्य सहयोग, चीन की उनकी प्रस्तावित अप्रैल यात्रा, ताइवान, रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान की स्थिति और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग जैसे विषय शामिल रहे।
इस संबंध में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा, “मेरी अभी चीन के राष्ट्रपति शी के साथ टेलीफोन पर काफी अच्छे से बातचीत हुई है। यह एक लंबी और विस्तारपूर्ण बातचीत थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।”
आर्थिक मुद्दों पर विशेष जोर देते हुए ट्रंप ने कहा कि बातचीत में चीन द्वारा अमेरिका से ऊर्जा और कृषि उत्पादों की खरीद पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने चीन द्वारा अमेरिका से तेल और गैस की खरीद के साथ-साथ अमेरिकी कृषि उत्पादों की अतिरिक्त खरीद पर भी बात की।
अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका-चीन के संबंध व्यापार, तकनीक और सुरक्षा में कॉम्पिटिशन से निर्धारित हो रहे हैं। एक तरफ दोनों देशों के बीच टैरिफ और सेमीकंडक्टर एक्सपोर्ट कंट्रोल को लेकर टकराव जारी है। दूसरी ओर हिंद-प्रशांत में रणनीतिक दुश्मनी भी गहरी हो गई है। तनाव के बीच दोनों पक्षों ने बातचीत के लिए उच्चस्तरीय राजनयिक माध्यम खुला रखा है।
जिनेवा में अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच अगले राउंड की बैठक
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रोकने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच दो राउंड की बैठक पूरी हो गई है। रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच तीसरे राउंड की बैठक जिनेवा में होगी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने अगली बैठक को लेकर जानकारी दी है।
तुर्किए की न्यूज एजेंसी अनादोलू एजेंसी (एए) ने जानकारी दी है कि इस बैठक का आयोजन 17-18 फरवरी को स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में किया जाएगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मीडिया से कहा, “इस बात पर सहमति बनी है कि यह अगले हफ्ते जरूर होगी। हम आपको जगह और सही तारीखें बताएंगे। लेकिन यह अगले हफ्ते ही होगी।”
रूस और यूक्रेन ने जनवरी में और इस महीने की शुरुआत में, संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में अमेरिका की मध्यस्थता में शांति वार्ता के दो राउंड की बैठक पूरी की। दूसरे राउंड की बैठक में दोनों पक्ष पहली बार युद्धबंदियों की अदला-बदली पर सहमत हुए।
फरवरी की शुरुआत में अमेरिका की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत में दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर कैदियों की अदला-बदली पर सहमति जताई, लेकिन क्षेत्रीय व्यवस्था और युद्धविराम जैसे मुख्य मुद्दों पर कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई।
यूक्रेन के अनुसार, बातचीत पहले तीन देशों के बीच हुई और उसके बाद समूह स्तर पर चर्चा की गई। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव ने कहा कि यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने सम्मानजनक और स्थायी शांति की मांग की, लेकिन उन्होंने किसी खास नतीजे का खुलासा नहीं किया।
बातचीत खत्म होने के बाद रूस और यूक्रेन की ओर से कोई संयुक्त राजनीतिक या सुरक्षा बयान जारी नहीं किया गया। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच जमीन के विवाद, युद्धविराम और सुरक्षा की गारंटी जैसे मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं।
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