दुनिया की खबरें: रूस में नौकरी के नाम पर युद्ध में धकेला और ऑस्ट्रेलिया में आसमान से बरस रही आग

‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) की पड़ताल में सामने आया कि बांग्लादेशी कामगारों को छोटी-मोटी नौकरियां देने का झूठा वादा कर रूस बुलाया गया और बाद में उन्हें यूक्रेन में युद्ध की आग में झोंक दिया गया। कई लोगों को हिंसा, जेल में डालने या मार डालने की धमकी दी गई।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

एक श्रमिक एजेंट ने बांग्लादेश के मकसूदुर रहमान को अपने गर्म इलाके वाले गांव से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर सर्द मौसम वाले रूस में चौकीदार की नौकरी का झांसा दिया लेकिन कुछ ही हफ्तों में वह यूक्रेन में चल रहे रूस के युद्ध के मोर्चे पर पाया गया।

‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) की पड़ताल में सामने आया कि बांग्लादेशी कामगारों को छोटी-मोटी नौकरियां देने का झूठा वादा कर रूस बुलाया गया और बाद में उन्हें यूक्रेन में युद्ध की आग में झोंक दिया गया। कई लोगों को हिंसा, जेल में डालने या मार डालने की धमकी दी गई।

रूसी ड्रोन हमलों में यूक्रेन में 23 लोग घायल, ज़ेलेंस्की ने त्वरित कूटनीति का अनुरोध किया

यूक्रेन के दक्षिणी शहर ओडेसा पर रूसी ड्रोन हमले में दो बच्चों और एक गर्भवती महिला सहित 23 लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अपने देश पर रूस के लगभग चार साल पुराने आक्रमण को समाप्त करने के लिए अमेरिका के प्रयासों में तेजी लाने का आह्वान किया।

यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, ओडेसा हमले में 50 से अधिक ड्रोन शामिल थे, जिनमें से कुछ मॉडल रूस द्वारा हाल ही में उनकी मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए 'अपग्रेड' किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन ने बिजली ग्रिड को निशाना बनाया और साथ ही पांच रिहाइशी इलाकों पर भी हमले किए।

ज़ेलेंस्की ने मैसेजिंग ऐप ‘टेलीग्राम’ पर कहा, “मलबे के नीचे दबे सभी लोगों का पता चलने तक बचाव अभियान जारी रहेगा”। एक अनौपचारिक प्रोटेस्टेंट प्रार्थना स्थल को भी नुकसान पहुंचा है।

उन्होंने कहा, “रूस का ऐसा प्रत्येक हमला कूटनीति को कमजोर करता है, जो अब भी जारी है, और विशेष रूप से उन साझेदारों के प्रयासों को प्रभावित करता है जो इस युद्ध को समाप्त करने में मदद कर रहे हैं।”

अधिकारियों के अनुसार, युद्ध को समाप्त करने के लिए ट्रंप प्रशासन द्वारा किए गए राजनयिक प्रयासों में प्रगति हुई है, लेकिन रूसी कब्जे वाली यूक्रेनी भूमि और मॉस्को द्वारा दावा किए जा रहे अन्य क्षेत्रों के संबंध में कोई महत्वपूर्ण सफलता नहीं मिली है।


ऑस्ट्रेलिया में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचा

भीषण गर्मी की लहर का प्रकोप झेल रहे ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में मंगलवार को तापमान लगभग 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

विक्टोरिया राज्य के ग्रामीण कस्बों होपटाउन और वालपेउप में प्रारंभिक तौर पर अधिकतम तापमान 48.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अगर रात भर में इसकी पुष्टि हो जाती है तो यह वर्ष 2009 में दर्ज अधिकतम तापमान के रिकॉर्ड को तोड़ देगा।

मंगलवार की भीषण गर्मी से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन विक्टोरिया के अधिकारियों ने सावधानी बरतने का आग्रह किया क्योंकि तीन जंगल की आग बेकाबू होकर फैल रही थी।

राज्य के सबसे बड़े शहर मेलबर्न में भी भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया। शायद मेलबर्न पार्क में भीषण गर्मी का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिला, जहां ऑस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस टूर्नामेंट के बाहर उमड़ने वाली सामान्य भीड़ तापमान बढ़ने के कारण बेहद कम हो गई।

तापमान में बुधवार को गिरावट की उम्मीद है, हालांकि लू का प्रकोप सप्ताहांत तक जारी रहने की आशंका है। ऑस्ट्रेलिया में अब तक की सबसे भीषण गर्मी के बीच इसी महीने की शुरुआत में भी लू चली थी।

रूस-यूक्रेन शांति प्रयासों में लगे हुए हैं ट्रंप : व्हाइट हाउस

व्हाइट हाउस ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने की कोशिशों में लगातार जुड़े हुए हैं। हालांकि, इस समय रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी कोई सीधी फोन बातचीत तय नहीं है।

सोमवार को व्हाइट हाउस की नियमित प्रेस वार्ता में प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति कूटनीतिक प्रयासों पर नजर बनाए हुए हैं और बातचीत के जरिए इस युद्ध का समाधान निकालने की दिशा में काम जारी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इस पूरे मामले में गंभीर रूप से शामिल हैं और उनके सलाहकार उन्हें हर नए घटनाक्रम की जानकारी देते रहते हैं।

कैरोलिन लेविट ने साफ किया कि फिलहाल राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति पुतिन के बीच किसी फोन कॉल का कार्यक्रम तय नहीं है। उन्होंने कहा कि इस हफ्ते ऐसी किसी बातचीत की जानकारी उन्हें नहीं है, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशें लगातार जारी हैं।

उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों ने दूसरे देशों के साथ मिलकर कई स्तरों पर बातचीत की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है कि वे दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने के लिए लगातार संपर्क बनाए रखें।

प्रेस सचिव ने यह भी कहा कि अमेरिका के विशेष दूतों की हालिया बैठकें अपने आप में ऐतिहासिक रही हैं। इन बैठकों में युद्ध में शामिल दोनों पक्षों ने भाग लिया और युद्ध खत्म करने के तरीकों पर चर्चा की गई। उनका कहना था कि राष्ट्रपति की टीम शांति की दिशा में कदम आगे बढ़ाने में लगी हुई है।

कैरोलिन लेविट ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शांति की कोशिशों को छोड़ा नहीं है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति शांति प्रक्रिया को नहीं छोड़ रहे है। कूटनीति उनकी विदेश नीति के एजेंडे की प्राथमिकता बनी हुई है।"

रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने चौथे साल में प्रवेश कर चुका है। राष्ट्रपति ट्रंप दोनों देशों के बीच युद्धविराम या राजनीतिक समाधान निकालने के लिए गंभीर प्रयास कर रहे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका ने कूटनीतिक और सुरक्षा से जुड़े कदमों में अहम भूमिका निभाई है।


टैक्स चोरी से पाकिस्तान को सालाना 1 ट्रिलियन रुपये का नुकसान

पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हो रही टैक्स चोरी के कारण सरकार को हर साल करीब 1 ट्रिलियन रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, केवल रियल एस्टेट सेक्टर में टैक्स चोरी से राष्ट्रीय खजाने को सालाना लगभग 500 अरब रुपये का नुकसान हो रहा है, जबकि अवैध तंबाकू कारोबार से 310 अरब रुपये की चपत लग रही है। इसके अलावा कई उपभोक्ता वस्तु उद्योग दस्तावेज़ी अर्थव्यवस्था से बाहर काम कर रहे हैं।

कराची स्थित बिजनेस रिकॉर्डर में प्रकाशित लेख में कहा गया है कि इतनी व्यापक टैक्स चोरी और तस्करी नियामक एजेंसियों की मिलीभगत और संरक्षण के बिना संभव नहीं है। लेख के अनुसार, यदि यह संरक्षण न हो तो मामूली प्रवर्तन दबाव में ही छाया अर्थव्यवस्था तेजी से सिमट सकती है।

लेख में बताया गया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) का 545 अरब रुपये का राजस्व घाटा इसी गंभीर स्थिति को दर्शाता है। यह केवल कमजोर आर्थिक गतिविधियों या सीमित टैक्स आधार का नतीजा नहीं है, बल्कि ऐसी अर्थव्यवस्था का परिणाम है, जहां मूल्य सृजन का बड़ा हिस्सा जानबूझकर टैक्स दायरे से बाहर रखा जाता है। इसके बावजूद सरकार टैक्स चोरी को बढ़ावा देने वाली संरचनाओं को तोड़ने के बजाय उन्हीं ईमानदार टैक्सदाताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

लेख में कहा गया, “यह तरीका अब आम हो चुका है और बेहद नुकसानदेह है। वेतनभोगी वर्ग, पंजीकृत व्यवसाय और औपचारिक कंपनियां लंबे समय से असमान रूप से भारी टैक्स बोझ उठा रही हैं। इस वर्ग पर अधिक प्रभावी टैक्स दरें निवेश को हतोत्साहित करती हैं, प्रोत्साहनों को बिगाड़ती हैं और सीमांत कारोबारियों को फिर से अनौपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर धकेल देती हैं। इससे एक ऐसा चक्र बनता है, जिसमें ईमानदारी को सज़ा और टैक्स बचाने को इनाम मिलता है।”

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