दुनिया की खबरें: समुद्री लुटेरों ने हाईजैक किए दो जहाज और ईरान से जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
समुद्री लुटेरों के कब्जे में लिए गए दो कमर्शियल जहाजों में सवार सभी 22 भारतीय सुरक्षित हैं। शुक्रवार को प्रेस वार्ता में मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी जानकारी दी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार यमन और सोमालिया तट के पास समुद्री लुटेरों के कब्जे में लिए गए दो कमर्शियल जहाजों में सवार सभी 22 भारतीय सुरक्षित हैं। शुक्रवार को प्रेस वार्ता में मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी जानकारी दी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "दो जहाज हैं; दोनों पर विदेशी झंडे लगे हैं और उन पर भारतीय नाविक सवार हैं। इनमें कुल 22 (एक जहाज पर 16 और दूसरे पर छह) भारतीय हैं। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, ये 22 नाविक सुरक्षित हैं और हम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस मामले में संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं।"
जानकारी के अनुसार, दो अलग-अलग घटनाओं में सशस्त्र समुद्री डाकुओं ने दो जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया। 20 अगस्त को एक इरिट्रिया के ध्वज वाले तेल उत्पाद टैंकर ‘एम टी सिबू 1' को अदन की खाड़ी में यमन के तट से करीब 30 समुद्री मील दूर हमला किया। इसमें कथित तौर पर 16 भारतीय नाविक सवार थे।
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (यूकेएमटीओ) सेंटर के अनुसार गुरुवार को उसे यमन के अल मुकल्ला से 136 नॉटिकल मील (252 किमी) पूर्व में एक घटना की सूचना मिली थी। यहां 'सीमल' टैंकर (जिसे सिबू 1 के नाम से भी जाना जाता है) ने मदद के लिए एक संदेश (डिस्ट्रेस कॉल) भेजा था कि अदन की खाड़ी में पश्चिम की ओर जाते समय एक अनधिकृत जहाज उसके पास आ रहा था।
यूकेएमटीओ ने बताया कि छह हथियारबंद लोगों ने यमन के तट के पास एक टैंकर पर कब्जा कर लिया और उसे सोमालिया की ओर मोड़ दिया।
वहीं कैमरून के ध्वज वाले एक अन्य पोत ‘एम/वी लुतुफ' का 17 अगस्त को सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास अगवा किया गया। इस पोत के चालक दल के 10 सदस्यों में छह भारतीय हैं। कथित तौर पर पोलर मूवमेंट शिपिंग की इस नाव पर मोगादिशू में तुर्की के मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर के लिए हथियार, साथ ही कम्युनिकेशन और सैटेलाइट उपकरण ले जाए जा रहे थे।
ट्रंप का दावा: ईरान के रणनीतिक समुद्री जलमार्गों पर जल्द होगा अमेरिका का 'पूरा नियंत्रण'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान से जुड़े रणनीतिक जलमार्गों पर 'लगभग नियंत्रण' रखे हुए है और जल्द ही उन पर पूरी तरह नियंत्रण कर लेगा। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अपने पूर्व निजी वकील माइकल कोहेन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने माना कि इस संघर्ष की वजह से अमेरिकी लोगों को पेट्रोल और ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।
77 डब्ल्यूएबीसी रेडियो पर प्रसारित इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "अब ईरान के मामले में, उनके पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा। हम इन जलमार्गों पर लगभग नियंत्रण रख रहे हैं और जल्द ही पूरी तरह नियंत्रण में होंगे। ईरान के मामले में हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।"
जारी इंटरव्यू में ट्रंप ने किसी विशेष जलमार्ग का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और नेतृत्व को काफी कमजोर कर दिया गया है, जिससे किसी समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
ट्रंप ने कहा, "समस्या का एक हिस्सा यह है कि उनके कई नेता अब नहीं रहे। ऐसे में कोई समझौता करना आसान नहीं है। किसी को ठीक से पता ही नहीं है कि नेतृत्व कौन कर रहा है।"
उन्होंने तर्क दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना इतना जरूरी है कि इसके लिए अमेरिकी उपभोक्ताओं को कुछ अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़े तो वह उचित है।
उन्होंने कहा, "मैं लोगों से कहता हूं कि आपकी ऊर्जा की लागत थोड़ी बढ़ सकती है, पेट्रोल भी थोड़ा महंगा हो सकता है। हमें मध्य पूर्व में कदम उठाने होंगे, क्योंकि हम ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दे सकते।"
ईरान ने अमेरिका की ‘कठोर आर्थिक कदम’ उठाने की धमकियों को खारिज किया
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उनके देश को दी गई अमेरिका की ‘कठोर आर्थिक कदम’ उठाने की धमकियों को खारिज किया और कहा कि ऐसी ‘नाकाम नीतियां’ ईरानियों में और अधिक विरोध की भावना पैदा करेंगी।
अराघची की यह टिप्पणी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बृहस्पतिवार को ईरान के खिलाफ ‘कठोर आर्थिक कदम’ उठाने की धमकी दिए जाने के कुछ घंटे बाद आई।
ट्रंप ने ‘‘अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलगाव’’ का वादा किया, हालांकि उन्होंने इसके बारे में ज्यादा विवरण नहीं दिया।
अराघची ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि ये धमकियां अमेरिकी जनता का ध्यान देश की घरेलू वित्तीय समस्याओं से भटकाने के उद्देश्य से दी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका का ‘‘आर्थिक आतंकवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था और दुनियाभर के देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए खतरा है।’’
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बृहस्पतिवार को कहा कि ईरान को ‘‘दुनिया के इतिहास में सबसे बड़े समन्वित आर्थिक अलगाव’’ का सामना करना पड़ेगा।
सीएनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में बेसेंट ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिका के सहयोगी देश यह तय करें कि वे किस ओर हैं।
चीन में तूफान मेसाक से 159 लोगों की मौत, 10 लापता
चीन में एक महीने पहले आए तूफान मेसाक के कारण कम से कम 159 लोगों की मौत हुई और 10 अन्य लापता हैं। स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
जुलाई की शुरुआत में चीन के दक्षिण-पश्चिमी गुआंग्शी प्रांत में आए इस तूफान के कारण भारी बारिश हुई और भीषण बाढ़ आ गई। नाननिंग और गुइगांग शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। उस समय अधिकारियों ने 39 लोगों की मौत की जानकारी दी थी।
किसी घटना के कई दिनों बाद अधिकारियों द्वारा मृतक संख्या को अद्यतन किया जाना असामान्य बात नहीं है, हालांकि इस मामले में, तूफान के आने के एक महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद मृतक संख्या के बारे में जानकारी साझा की गई है।
सरकारी मीडिया के अनुसार, कुल मृतकों में से 107 लोगों की मौत नाननिंग में छह बांधों के टूटने से आई बाढ़ के कारण हुई।
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए
