दुनिया की खबरें: यूक्रेन में रूसी हमले से 4 लोगों की मौत और यूरोप में भीषण गर्मी ने ली 10 हजार की जान
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन पर रात भर हुए रूसी हमलों में कम से कम चार आम नागरिकों की मौत हो गई और 20 अन्य लोग घायल हो गए। जेलेंस्की अपने लोकप्रिय रक्षा मंत्री को हटाये जाने के बाद राजनीतिक संकट से जूझ रहे हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन पर रात भर हुए रूसी हमलों में कम से कम चार आम नागरिकों की मौत हो गई और 20 अन्य लोग घायल हो गए। जेलेंस्की अपने लोकप्रिय रक्षा मंत्री को हटाये जाने के बाद राजनीतिक संकट से जूझ रहे हैं।
बृहस्पतिवार को जेलेंस्की ने अपनी सरकार में बड़े बदलाव किए, जिसमें नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति भी शामिल है। इस कदम से देश के सैन्य नेतृत्व में बेचैनी फैल गई और जनता में भी नाराजगी देखी गई।
चार साल से ज़्यादा समय से चल रहे रूसी हमले के ख़िलाफ लड़ाई में यूक्रेन को जब कुछ कामयाबी मिल रही थी, तब यह एक अनचाही मुश्किल खड़ी हो गई।
सरकार के युवा और लोकप्रिय सदस्य मिखाइलो फेडोरोव के रक्षा मंत्रालय से अचानक हटने के बाद, बृहस्पतिवार को यूक्रेन के कई शहरों में हज़ारों लोगों ने उन्हें हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया।
फ़ेडोरोव (35) इस पद पर सिर्फ़ छह महीने रहे। उन्हें यूक्रेन में तेजी से हुए सफल प्रौद्योगिकी नवोन्मेष और दूसरे कदमों – जैसे कि सेना में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ लड़ाई – के पीछे मुख्य ताकत माना जाता है। इन कदमों ने यूक्रेन के लोगों में युद्ध को लेकर नई उम्मीद जगाई।
जेलेंस्की के अनुसार, फेडोरोव और यूक्रेन की सेना के कमांडर जनरल ओलेक्जेंडर सिरस्की के बीच रिश्ते खराब हो गए थे। इन खराब रिश्तों की वजह से फ़ेडोरोव का पद पर बने रहना मुश्किल हो गया था।
क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख ओलेह किपर ने बताया कि यूक्रेन के दक्षिणी बंदरगाह शहर ओडेसा पर रात भर हुए रूसी मिसाइल हमले में दो लोगों की मौत हो गई और बच्चों समेत 10 अन्य घायल हो गए।
यूरोप में भीषण गर्मी से इस साल करीब 10 हजार लोगों की मौत हुई
यूरोप ने इस साल अप्रत्याशित रूप से भीषण गर्मी का सामना किया और पूरे महाद्वीप से संकलित आंकड़ों के मुताबिक तापमान में बेतहाशा वृद्धि से जुड़ी घटनाओं में सामान्य से कहीं अधिक करीब 10 हजार लोगों की जान गई है।
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार जून के आखिर में इसमें तेजी से तब वृद्धि हुई जब यूरोप के कुछ हिस्सों में तापमान ने रिकॉर्ड तोड़ दिया।
जानकारों का कहना है कि पूरी स्थिति समझने में समय लगता है और गर्मी से होने वाली कई मौतों को आधिकारिक तौर पर उस तरह दर्ज नहीं किया जाता। उदाहरण के लिए, भीषण गर्मी से दिल का दौरा पड़ सकता है, खासतौर पर उन लोगों को जो उम्रदराज हैं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं। लेकिन उनकी मौत होने पर मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत की वजह दिल का दौरा लिखा जा सकता है।
अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक गर्मियों की शुरुआत चिंताजनक रही है। पिछले कुछ सालों में यूरोप में कई बार भीषण गर्मी पड़ी जिसकी वजह से हजारों लोगों की मौत हुई है। फिर भी, गर्मी के कारण यूरोप में 2003 का साल सबसे ज़्यादा जानलेवा रहा, जिसमें लगभग 70,000 लोगों की मौत हुई थी। जलवायु परिवर्तन की वजह से भीषण गर्मी की आवृत्ति बढ़ रही है और यह बदलाव कोयला, तेल और गैस जैसे ईंधन दहन से होता है।
यूरोएमओएमओ मृत्यु निगरानी केंद्र है, जिसे दो दर्जन देशों से आंकड़े प्राप्त होते हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक 28 जून को समाप्त हुए हफ़्ते में सभी वजहों से करीब 14,260 अधिक मौते हुईं। इनमें से 12,000 से ज़्यादा मौतें 65 साल और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों की थीं। यह उस हफ्ते हुई कुल 84,583 मौतों में से था। उससे पहले और बाद के हफ्तों में ये आंकड़े काफी कम थे।
डेनमार्क के स्टेटन्स सीरम इंस्टीट्यूट से संबद्ध और यूरोएमओएमओ के समन्वयक लासे वेस्टेरगार्ड ने कहा, ‘‘हम इसका कारण यूरोप के कई देशों में पड़ रही भीषण गर्मी को मानते हैं, और ऐसा इसलिए है क्योंकि इस अवधि में इतनी अधिक मौतों की कोई और साफ वजह समझ नहीं आती।’’
यूरोएमओएमओ ने अलग-अलग देशों के आंकड़े नहीं दिये हैं, लेकिन उसने फ्रांस, बेल्जियम और जर्मनी में अतिरिक्त मामलों की सबसे ज्यादा दरें पाईं।
जर्मनी के रोग नियंत्रण केंद्र, रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट ने इस साल जुलाई की शुरुआत तक गर्मी से सीधे तौर पर 6,830 लोगों की मौत होने की बात कही है। इनमें से 6,470 लोगों की उम्र 65 साल या उससे अधिक थी।
अमेरिका ने ईरान में पुलों को बनाया निशाना, चाबहार बंदरगाह पर टावर ढहा
अमेरिका ने शुक्रवार तड़के ईरान के खिलाफ अपने हवाई हमलों का दायरा बढ़ाते हुए और अधिक पुलों, विद्युत उपकरणों को निशाना बनाया तथा एक प्रमुख ईरानी बंदरगाह पर स्थित टावर को ध्वस्त कर दिया।
यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ ढीली नहीं करता है तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे पर भी हमले करेगा।
इसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया में कतर समेत अमेरिका के सहयोगी देशों पर फिर मिसाइल हमले किए और चेतावनी दी कि उसके हमले आगे और तेज होंगे। कतर युद्ध में अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, अमेरिका द्वारा शुक्रवार तड़के किए गए हवाई हमलों में दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत में कई पुलों को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। हमले होर्मुज जलडमरूमध्य के तट पर स्थित ईरानी शहर बंदर खमीर में भी किए गए।
राजमार्ग और रेलवे पुलों पर किए गए ये हमले संभवतः ईरान के प्रमुख बंदरगाह बंदर अब्बास को देश के मध्य क्षेत्र और राजधानी तेहरान की ओर जाने वाले सड़क मार्गों से काटने के उद्देश्य से किए गए थे।
हालांकि अन्य मार्ग अब भी खुले हुए हैं, लेकिन अमेरिका अपने हवाई हमलों का दायरा और बढ़ा सकता है। इससे ईरान की सैन्य सामग्री की आवाजाही के साथ-साथ वहां की लगभग नौ करोड़ आबादी के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
ईरान के हमले में बिजली और जल संयंत्र को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ : कुवैत
कुवैत ने शुक्रवार को कहा कि ईरान ने एक बिजली एवं जल अलवणीकरण संयंत्र पर हमला किया, जिससे इसे व्यापक नुकसान पहुंचा।
कुवैत में पेयजल की लगभग 90 प्रतिशत आपूर्ति जल के अलवणीकरण से होती है और ऐसी किसी भी प्रकार की बाधा से इस छोटे रेगिस्तानी देश में जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
कुवैत के बिजली, जल एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने हमले की जानकारी देते हुए कहा कि इससे आग लग गई और "बड़ी संख्या में बिजली उत्पादन इकाइयों को नुकसान पहुंचा।"
कुवैत ने कहा कि आग पर काबू पा लिया गया है तथा नुकसान का आकलन करने और संयंत्र को दोबारा चालू करने के लिए प्रयास जारी है।
पाकिस्तान : गिलगित-बाल्टिस्तान विस ने अस्थायी रूप से सूबे का दर्जा देने की मांग की
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान की तथाकथित विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर संघीय सरकार से पर्वतीय क्षेत्र को संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ अस्थायी सूबे का दर्जा देने की मांग की है। मीडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार ‘डॉन’ में प्रकाशित खबर के मुताबिक बृहस्पतिवार को विधानसभा सत्र के दौरान विधायक जलाल अली शाह ने यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्यों का समर्थन मिला।
इसमें कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान (सशक्तीकरण और स्व-शासन) आदेश 2009 से चुनी हुई विधानसभा गठित हुई और स्व-शासन को बढ़ावा मिला।
प्रस्ताव के मुताबिक सरताज अजीज की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के बाद, गिलगित-बाल्टिस्तान आदेश 2018 के तहत विधानसभा को विधायी शक्तियां दी गईं।
सदन ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया कि वह समिति की सिफारिशों को लागू करे और गिलगित-बाल्टिस्तान को अस्थायी सूबे का दर्जा दे, ताकि वहां के निवासी नेशनल असेंबली के लिए अपने प्रतिनिधि चुन सकें और संघीय स्तर पर प्रतिनिधित्व हासिल कर सकें।
